रेव पार्टियों में नशा पिला कर युवतियों को दुष्कर्म का शिकार बनाया जा रहा है..

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हिमाचल प्रदेश में रेव पार्टियों के बहाने लड़कियों को नशा देकर दुष्कर्म की घटनाएँ लगातार बढ़ती जा रही हैं. रेव पार्टी में युवक अपनी प्रेमिकाओं और उनकी सहेलियों को एकांत ठिकानों पर बुलाकर नशा देकर दुराचार करते हैं. ड्रग एंड रेव पार्टी के दौरान ड्रिंक में नशा मिलाकर दिया जाता है.Rave-Party-Hotel-Oakwoods-Juhu

बाद में बेहोशी की हालत में दुराचार किया जाता है. वैसे तो रेव पार्टियों में दुष्कर्म के मामलों की संख्या बहुत अधिक मगर कुछ मामले सामने भी आये हैं तथा पुलिस तक भी पहिंचे हैं. कांगड़ा जिले में पांच, चंबा से एक, ऊना से एक, मंडी से दो और शिमला से दो मामलों में लड़कियों ने पुलिस थानों में नशा देकर दुराचार करने की शिकायतें दर्ज करवाई हैं.

फोरेंसिक लैबोरेटरी में भी इन मामलों पर रिपोर्ट तैयार की जा रही है. लैबोरेटरी की रिपोर्ट में भी लड़कियों के साथ दुराचार की पुष्टि हुई है. सबसे ज्यादा मामले धर्मशाला फोरेंसिक लैब में पहुंचे हैं.

यहां पर नूरपुर, कांगड़ा, पालमपुर, धर्मशाला, ऊना और चंबा से सात मामले पहुंचे हैं. मंडी फोरेंसिक लैब में कुल्लू और मंडी से दो मामले सामने आए हैं. स्टेट फोरेंसिक लैब शिमला में दो मामले आए हैं. ये सभी मामले फोरेंसिक लैबोरेटरी में पिछले तीन महीनों के दौरान आए हैं.

इन मामलों में रिपोर्ट अब पुलिस को सौंपी जानी है. स्टेट फोरेंसिक लैब के निदेशक डा. अरुण शर्मा और सहायक निदेशक डा. एसके पाल ने बताया कि पार्टी में नशा देकर बेहोशी की हालत में 11 लड़कियों से दुराचार करने के मामले सामने आए हैं. इन मामलों की रिपोर्ट बनाई जा रही है.party

पार्टी में युवक अकसर युवतियों को खाद्य वस्तुओं में एमसीपामाइस और मेरीज्वाना दवाई खिला देते हैं. अगर मौका ड्रिंक करने का हो तो युवक एसएसटी, एमडीएमए, एमडीए ड्राप्स ड्रिंक में देकर लड़कियों को बेहोश कर दुराचार करते हैं.

पहले नामी शहरों में ही ड्रग एंड रेव पार्टियों का आयोजन होता था. अब धीरे-धीरे हिमाचल में भी पार्टियां आयोजित हो रही हैं. ड्रग एंड रेव पार्टियों के जाल में ज्यादातर अच्छे तथा धनवान घरों से ताल्लुक रखने वाली लड़कियों फंसाया जाता है.

ड्रग एंड रेव पार्टियों में बिगडै़ल घरों के लड़के और लड़कियां हिस्सा लेते हैं. इसमें जमकर नशा किया जाता है. नशा करने के बाद नाचना-गाना इस पार्टी का अहम हिस्सा होता है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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