चैनल वन का न्यूज रुम बना पहलवानों का अखाड़ा…

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खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे ये कहावत सर्वविदित है शेख चिल्ली की तरह चेयर मैन के सामने खुद को तीसमार खां बनने वाले भाई नवीन पांडे संस्थान में कुछ नया तो कर नहीं पाये अगर कुछ किया तो कई लोगों के पेट पर लात मार कर कद्दू में तीर मारा. भाई नवीन पांडे को चैनल वन ज्वाईन किये एक महीने हो गये लेकिन चैनल की ना तो दशा बदल पाये ना ही दिशा. हां अब मालिकान का प्रेशर बन रहा है तो न्यूज रुम में चिल्लाना या अपने किसी गुर्गे से लोगों को टार्चर करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे साथ ही नये और पुराने स्टाफ को भेद भाव का शिकार भी बनाने में पाछे नहीं हटते. नये लोगों से कहना कि पुराने पर चढ़ कर रहो, लेकिन है क्या कि जो भी नया स्टाफ है उसका या तो पहली नौकरी है या दूसरी अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि सुदर्शन या जनता से आये इंटर्न या ट्रेनी कितना समझदार होंगे. जिसे टाईप करना नहीं आता वो शिफ्ट इंचार्ज या रनडाउन पर हो तो क्या खबर से खेल पाएगा जहां खबर को लेकर सारे चैनल कंपटीशन कर रहे हैं. channel-one-logo-n_1

किसी भी संस्थान में संसाधन की कमी होने के साथ ही जब काम करना या कराना नहीं आयेगा या अम्मीद से ज्यादा अगर किसी को मिल जाता है तो वह अपने आप को जलालुद्दीन अकबर समझने लगता है. और बिना वजह सबको फांसी पर लटकाने लगता है. कुछ ही दिन पहले अली अब्बास और अमित दत्ता में किसी खबर को लेकर कहा सुनी हई थी बात मारने मराने तक की आ गयी. इन्ही सब के चलते एक दिन पहले चैनल से 3 लोग को इसी ग्रुप के दूसरे चैनल रिपोर्टर 24×7  भेज दिया गया शायद इन नये लोगों की कमियों को दबाया जा सके.

उठा पठक लगातार जारी है किसी को भी कोई एलीगेशन लगा कर उसे बाहर का या दूसरे चैनल का रास्ता दिखा सकता है. अब ताजा वाकया संस्थान के पीसीआर का है आउट पुट हेड योगेश गुलाटी पीसीआर में पहुंचे और किसी खबर को पैनल प्रोड्यूसर से दुबारा चलाने को बोले साथ ही उस खबर की आईडी गलत बताया उस प्रोड्यूसर ने चला तो दिया लेकिन जो आईडी गुलाटी बताये थे वह गलत था इसी पर कहा सुनी हो गयी और गुलाटी ने प्रोड़्यूसर को कहा कि राजनीति मत करो. दूध का जला पुराने स्टाफ की नुमाईंदगी करने वाले कुंदन अपनी सीट से ये कहकर उठ गये कि एक तो आईडी गलत लाते हैं सब साथ ही चिल्लाते हैं ये बात कहा नहीं कि गुलाटी शोर मचाने लगे और कुंदन को धमकी देने लगे कि काम नहीं आता राजनीति करते हैं सारे कोई काम नहीं करने दे रहा है अब आव न देखा ताव दोनो लड़ने लगे बात एक दूसरे को मारने मराने वाली आ गयी थी. शोर मचाते हुए गुलाटी पीसीआर से बाहर निकले औऱ पहुंच गये नवीन के केबिन में औऱ अपनी आप बीती बताई. नवीन पांडे न्यूज रुम आये और पूरे मामले का जायजा लिये साथ ही कुंदन को माफी मांगने को कहा कुंदन ने बात को खत्म करते हुए माफी मांग ली. बात यहीं नहीं खत्म हुई मामला चेयर मैन के पास पहुंचा, चेयर मैन आव ना देखा ताव अपने महिला सलाहकार गीतांजली से फरमान जारी कराया कि पूरा स्टाऱ न्यूज रुम में इकट्ठा हो जाय. कुछ वक्त बीता ही नहीं कि खुद दल बल के साथ न्यूज रुम में आ धमका जिसमें आरिफ यूसुफ अंसारी नवीन पांडे रंधावा बृजमोहन सिंह और अवनी सिनहा क्रुर सिंह के अइयार के तौर पर आये ओर फिर लगी अदालत और शुरू हुआ केस की सुनवाई, बारी बारी दोनो पक्ष को अपने बात रखने के लिये कहा गया. दोनो ने अपनी बात अपने तरीके से रखी. वहां का माजरा देखने के बाद आप अंदाजा लगा लेंगे जैसे केजी के बच्चे आपस में लड़ते हैं और मास्टर साहब दंड के लिये दोनो को कान पकड़ कर उठक बैठक लगाने को कहते हैं. यहा मामला तूल पकड़ने लगा था दोनो हाईपर होने लगे साथ ही चेयर मैन भी… लग रहा था कि स्लम एरिया में नाली के लिये आपस में दो पड़ोसी लड़ रहे हैं.  मौका मिलते ही नवीन पांडे ने कहा कि पुराने तरीके से काम नहीं होगा दर असल गुलाटी की तरफ से साफ्ट होते हुए नवीम पांडे ने अपने मन की भडास निकाली शायद उसकी बातों का असर चेयर मैन को हो जाए लेकिन चेयर मैन को चूहे बिल्ली का खेल खेलने में काफी दिलचसबी है. किसी तरह तू-तू मै-मै खत्म हुआ लेकिन लग रहा था दोनो एक दूसरे का खून पी जाएंगे. अब चेयर मैन भी क्या करे. कोई काम तो होता नहीं, सोचता है इसी तरह की घटना कराई जाए जिससे उसका टाईम पास भी हो जाए साथ ही टीम के हुक्मरानों का. अभी मामला खत्म होने की कगार पर था कि बृजमोहन ने मोके का फायदा उठाते हुए चैयर मैन के तारीफ में कसीदें पढ़ने शुरु किये. साथ ही चेयर मैन ने नये लोगों को सपोर्ट करने को कहा और अगर कोई भी पुराना स्टाफ नये लोगों को सपोर्ट नहीं किया तो उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा. किसी तरह से मामला खत्म हुआ और लोग अपने अपने काम करने में लग गये. लेकिन एक बात तो साफ है नये और पुराने के खेल में पुराने पर गाज गिरना तय है अब आप इस मामले पर निष्कर्ष निकाल सकते हैं. हालाकि कहना गलत नहीं होगा कि नवीन पांडे ने हिजड़ों की फौज पाल रखी है.

चलिये आज के लिये इतना ही आगे किसी और वाकिये से आपका रुबरु करायेंगे तबतक के लिये नमस्कार.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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