दिल्ली और राजस्थान में कांग्रेस का सूपड़ा साफ़..

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कांग्रेस के लिए बुरी खबर दिल्ली और राजस्थान के किले हाथ से निकले. हालांकि कांग्रेस पार्टी के लिए राहत की बात ये है कि छत्तीसगढ़ में सत्ता में वापसी हो सकती है. दिल्ली में पिछले 15 सालों से राज कर रही कांग्रेस का इस बार वोटरों ने सफाया ही कर दिया है. शीला दीक्षित को अपनी हार का एहसास होते ही उन्होंने राज्यपाल को अपना इस्तीफा भेज दिया है. राजस्थान में कांग्रेस को करारी हार मिल रही है.BJP

इस बार चुनाव में आम आदमी पार्टी ने बहुत बड़ा सरप्राइज दिया है. आम आदमी पार्टी का उदय हुआ है और दिल्ली में फिलहाल इसके खाते में 29 सीटें जा रही हैं. खुद अरविंद केजरीवाल कांग्रेस की उम्मीदवार और दिल्ली के मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के खिलाफ 16,000 वोटों से आगे चल रहे हैं.

दिल्ली में कांग्रेस 3 सीटें जीत चुकी है और 5 सीटों पर आगे है इसप्रकार कांग्रेस के खाते में सिर्फ 8 सीटें जाती दिखाई दे रही हैं. वहीं बीजेपी 9 सीटें जीत चुकी है और 23 सीटों पर आगे चल रही है इसप्रकार दिल्ली में बीजेपी को 32 सीटें मिलती दिखाई दे रही हैं. इसके अलावा आम आदमी पार्टी 5 सीटें जीत चुकी है और 25 पर आगे चल रही है इसप्रकार आप को 29 सीटें मिलती दिखाई दे रही हैं. अन्य 1 सीट पर आगे है.

दिल्ली में आम आदमी पार्टी दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. आम आदमी पार्टी ने अंबेडकरनगर, देवली और संगम विहार सीटों पर जीत दर्ज की है. आप के सतेंद्र जैन शकूर बस्ती से जीत गए हैं. दिल्ली के पटपड़गंज से आम आदमी पार्टी के मनीष सिसोदिया जीत गए हैं. हालांकि दिल्ली के आर के पुरम सीट से आप की शाजिया इल्मी चुनाव हार गई हैं. दिल्ली के महरौली सीट से बीजेपी के प्रवेश वर्मा जीत गए हैं. बीजेपी के मुख्यमंत्री उम्मीदवार हर्षवर्धन कृष्णानगर सीट से 30000 से ज्यादा वोटों से चुनाव जीत गए हैं.

विधानसभा चुनाव नतीजे से उत्साहित बीजेपी ने कहा है कि अब नरेंद्र मोदी लाल किले पर तिरंगा फहराएंगे. बीजेपी के वरिष्ठ नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा है कि पार्टी इस जीत पर गांव-गांव में जश्न मनाएगी. विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन से बीजेपी कार्यकर्ता बेहद खुश हैं और दिल्ली में कार्यकर्ता बीजेपी की जीत का जश्न मना रहे हैं.

एक तरफ बीजेपी जश्न मना रही तो दूसरी तरफ हारने के बाद दिल्ली की मौजूदा मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा कि वो दुखी हैं, मगर वो जनता के फैसले का सम्मान करती हैं. वहीं संसदीय कार्य राज्य मंत्री राजीव शुक्ला का कहना है कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस को बड़ा नुकसान पहुंचाया है. उनके मुताबिक दिल्ली में 15 साल से शीला की सरकार थी इसलिए लोगों में उनके खिलाफ गुस्सा था.

आम आदमी पार्टी ने कहा है कि पार्टी का गठन बीजेपी और कांग्रेस के सफाए के लिए हुआ है और ऐसे में किसी पार्टी के साथ गठबंधन का सवाल ही नहीं है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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  1. भा ज पा कुछ जल्दी ही जश्न मनाने लग गयी है.अभी यात्रा बहुत लम्बी , व काँटों भरी है.राज्यों के चुनाव से ज्यादा उम्मीद करना नासमझी होगी.अभी दक्षिण व उत्तरपूर्व के राज्यों में पार्टी का जनाधार नहीं है जब कि लोकसभा के लिए इन की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है.समीकरण बदलने में भी देर नहीं लगती .कांग्रेस भी घायल शेर के माफिक फिर से जोड़ तोड़ बैठाएगी आम आदमी पार्टी को भी नया रक्त संचार मिला है इधर बेचारे तीसरे मोर्चे वाले भी मुहं धो रहें हैं, मुलायम व नितीश भी सपने देख रहें है.इसलिए अभी कहना व सोचना जल्दबाजी होगी.

  2. भा ज पा कुछ जल्दी ही जश्न मनाने लग गयी है.अभी यात्रा बहुत लम्बी , व काँटों भरी है.राज्यों के चुनाव से ज्यादा उम्मीद करना नासमझी होगी.अभी दक्षिण व उत्तरपूर्व के राज्यों में पार्टी का जनाधार नहीं है जब कि लोकसभा के लिए इन की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है.समीकरण बदलने में भी देर नहीं लगती .कांग्रेस भी घायल शेर के माफिक फिर से जोड़ तोड़ बैठाएगी आम आदमी पार्टी को भी नया रक्त संचार मिला है इधर बेचारे तीसरे मोर्चे वाले भी मुहं धो रहें हैं, मुलायम व नितीश भी सपने देख रहें है.इसलिए अभी कहना व सोचना जल्दबाजी होगी.

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