लॉ इन्टर्न पर यौन हमले के आरोपी गांगुली के खिलाफ FIR दर्ज़ हो…

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पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष रिटायर्ड जज अशोक गांगुली पर लगा यौन शोषण का आरोप अब बड़े बवाल में बदलता जा रहा है.akganguli05

इस मामले की जांच कर रहे सु्प्रीम कोर्ट के पैनल का कहना है कि प्रथम दृष्टया ऐसा मालूम देता है कि रिटायर्ड जज गांगुली इस मामले में शामिल रहे हैं, क्योंकि घटना के वक्‍त वह रिटायर होने चुके थे, ऐसे में उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकते.

कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई है. सिब्बल ने कहा, “जब पैनल खुद कह रहा है कि गांगुली इस मामले में शामिल रहे हैं, तो कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही.”

उन्होंने कहा, “पैनल का कहना है कि वह घटना के वक्‍त रिटायर हो चुके थे, ऐसे में उनके खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया जा सकता. लेकिन अगर ऐसा है तो उनके खिलाफ जांच क्यों बैठाई गई. अगर जांच हुई और दोषी पाए गए, तो कार्रवाई भी होनी चाहिए.”

रिटायर्ड जज गांगुली को अब चौतरफा विरोध का सामना करना पड़ रहा है. उनकी तरफदारी करने वाले भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने भी रुख बदल लिया है.

स्‍वामी ने कहा कि “जो पार्टी का स्टैंड है, वही मेरा स्टैंड है. अब साबित हो गया है कि वह दोषी हैं, तो उन्हें सजा मिलनी चाहिए. एफआईआर दर्ज होनी चाहिए. वह पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद पर नहीं रह सकते.”

राष्ट्रीय महिला आयोग भी रिटायर्ड जज गांगुली को नोटिस भेजने की तैयारी कर रहा है. एनसीडब्‍ल्यू अध्यक्ष ममता शर्मा ने कहा, “मैं सोचती हूं कि उनके खिलाफ कार्रवाई हानी चाहिए.”

तृणमूल कांग्रेस के नेता सुखेंदु राय का कहना है कि भले तकनीकी कारणों की वजह से पैनल की वजह से आगे नहीं बढ़ सकते, लेकिन गुनाह साबित होने पर उन्हें नैतिकता के आधार पर कुर्सी छोड़ देनी चाहिए.

जेडीयू नेता अली अनवर के मुताबिक रिटायर्ड जज को अब पद नहीं रहना चाहिए और साथ ही उस लड़को भी सामने आना चाहिए, जिसने यह खुलासा किया है.

भाजपा नेता मेनका गांधी ने साफगोई से कहा कि रिटायर्ड जज गांगुली को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए और इस मामले में जीरो टोलरेंस की रणनीति अपनानी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की समिति ने रिटायर्ड जज अशोक कुमार गांगुली पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों को प्रथम दृष्ट्या सही माना है.

एफआईआर दर्ज करने की मांग तेज

समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि लॉ इंटर्न के बयानों और अन्य साक्ष्यों से जाहिर होता है कि पूर्व जज ने अवांछित आचरण किया, जो यौन दुर्व्यवहार के दायरे में आता है.

हालांकि चीफ रिटायर्ड जज पी सदाशिवम ने यह भी साफ किया है कि सुप्रीम कोर्ट अपने स्तर से रिटायर्ड जज गांगुली के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगा, क्योंकि पिछले साल 24 दिसंबर को हुई घटना के दिन रिटायर्ड जज गांगुली सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हो चुके थे और युवती भी इंटर्न के तौर पर सुप्रीम कोर्ट के रोल पर नहीं थी.

लेकिन सुप्रीम कोर्ट की समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद रिटायर्ड जज गांगुली के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग तेज हो गई है. दिल्ली पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई करने को लेकर कानूनी सलाह मांग रही है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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