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मैं शक्ति पुत्र हूँ…

आशीष सागर  दीक्षित||

बाँदा – मध्य प्रदेश के जिला शहडोल, ब्योहारी स्थित भगवती मानव कल्याण संगठन, आश्रम एवं ट्रस्ट के अधिपति परमहंस योगीराज शक्ति पुत्र महाराज यूँ तो स्वयं को इसी नाम से संबोधित कर रहे है. लेकिन इनके महिमा मंडन की विशाल लीला का दर्शन आप इनकी संस्था वेबसाइट www.siddhashramdhaam.com और इनके माध्यम से संचालित अध्यात्मिक पत्रिका की वेबसाइट www.siddhashrampatrika.com लिंक पर जाकर विस्तार से जान व समझ सकते है.Shri Shaktiputra Ji Maharaj,13

बुंदेलखंड के जिला बाँदा में आने वाले 7 से 8 दिसंबर  2013 को डिग्री कालेज मैदान (सदर) में एक महाकाय पंडाल के नीचे संपन्न होने जा रहा है योगीराज का जलसा! कहने में अतिश्योक्ति नही है कि देश में आस्था और धर्म के नाम पर विभिन्न प्रदेशो के अति निम्नतम वर्ग मसलन खासकर गांवों में बसने वाले व्यथित लोगो को अपने आकर्षण में मन्त्र मुग्ध कर ये सारे संत, कथित स्वामी और बाबा अपना मतलब साध रहे है. इसी कड़ी में देश के अन्य प्रान्तों से होता हुआ खुद को माँ दुर्गा का शक्ति पुत्र घोषित करने वाले स्वयंभू परमहंस का काफिला मध्य प्रदेश से आने वाली 6 दिसंबर बाँदा आ रहा है.

उल्लेखनीय है कि न माँ दुर्गा के उपासक शक्तिपुत्र के शिष्य और साधक उत्तर प्रदेश के कानपुर, फतेहपुर, पूर्वांचल के जनपदों से निकलकर लुधियाना, पंजाब तक जा पंहुचे हैं. बड़ी बात है करीब 4 सैकड़ा इनके साधक लुधियाना से आकर बुंदेलखंड के बाँदा में 24 नवम्बर से जोर शोर की तैयारी में रात दिन एक किये है. स्वामी जी की निजी दो वेबसाइट में अध्यात्म के वो सारे मसाले उपलब्ध है जो अन्य आस्था के व्यापारी वर्गों की एक लम्बी जमात के अस्त्र – शस्त्र होते है. योगीराज की धार्मिक दुकान में आपको सब कुछ मिलेगा! दुर्गा चालीसा, हवन सामग्री, ऑनलाइन पत्रिका अध्ययन, यज्ञ विधि के सारे उपक्रम से सुसज्जित शक्ति पुत्र की दुर्गा महिमा बड़ी ही व्यापक है. उनके ही शब्दों में “मुझे माँ दुर्गा ने स्वयं दर्शन दिए है और ये शक्ति पुत्र नाम उन्ही का दिया है! उनका आदेश है कि सारे विश्व में नशा मुक्ति अभियान चलाकर लोककल्यान कार्य करो! इन गेरुआ वस्त्र धारी योगीराज की शिष्य इस संवाददाता की ममेरी बहिन भी है जो खुद अपने परिवार के साथ जिला कानपुर से आ रही है. सैकड़ो अंध भक्तो का जमावड़ा बाँदा में हो चुका है और प्रशासनिक अमला, नगर पालिका अपने सफाई कर्मी के साथ आयोजन स्थल पर तैनात है. जल निगम के अधिकारी को दो दिवस के पेयजल आपूर्ति की कमान दी जा चुकी है. वैसे तो पारदर्शिता पूर्वक योगीराज ने अपने सत्य परीक्षण और अपने अध्यात्म जीवन का विवरण अपनी आश्रम की वेबसाइट में दे रखा है मगर फिर भी जिस तरह से रोजमर्रा की घटनाओ के बीच एक नए बाबा आस्था, संस्कार, अध्यात्म न्यूज़ चैनल में उत्पन्न हो रहे है उनसे अब भारतीय जनमानस के मध्य तीखी प्रतिक्रिया भी पैदा हो रही है.

सवाल यहाँ ये भी उठता है कि एक योगीराज, सन्यासी और गेरुआ रंगधारी व्यक्ति को संगठन, संस्था, ट्रस्ट बनाने की क्या आवश्यकता आन पड़ी? क्यों उनके माध्यम से राजनितिक पार्टियों की तरह प्रांतीय अध्यक्ष, प्रभारी बनाये जा रहे है? इसके पीछे निहित उद्देश्य का सामने आना भी नितांत ज़रूरी है. आरोप – प्रत्यारोप के प्रलाप में नही पड़कर मै सिर्फ ये ही कहना चाहूँगा कि जो ज्ञान योगीराज अपने साधको और भक्तो को आयोजन या भगवती जागरण के जरिये से दे रहे है क्या यह सब वे अपने निज गृह धाम में नही प्राप्त कर सकते है? कोई एक ऐसी अनोखी उपासना जो आमजन से दूर हो उसकी बात तो समझ आती है मगर इनके शिष्यों के बीच बैठ कर ऐसा कुछ भी ज्ञान अर्जन नही हुआ जिससे मै इन्हे परमहंस योगीराज श्री शक्ति पुत्र की कथित उपाधि से अलंकारित कर सकूं.

यहाँ ये भी बतलाना लाजमी है कि इन संत के माता – पिता समेत पूरा परिवार ही माँ दुर्गा का स्वयं को अखंड अवतारी उपासक बतला रहा है जो खुद इनकी वेबसाइट का हिस्सा है.

शेष 7 से 8 दिसंबर के आयोजन बाद …..

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