वीडियो क्लिप में पत्नी को ग्रुप सेक्स करते देख हत्या…

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मुंबई क्राइम ब्रांच की पुलिस ने एक 25 वर्षीय युवक संतोष राजपूत को अपनी पत्नी की हत्या करने के आरोप में गिफ्तार किया है. गिरफ्तार युवक ने पुलिस को बताया कि उसने अपनी पत्नी की ग्रुप सेक्स की वीडियो क्लिप उसके सेल फोन में देखने के बाद उसकी हत्या कर दी.Clipart Illustration of Three Passionate Black And Red Silhouett

पुलिस को दिए बयान में संतोष ने बताया कि ग्रुप सेक्स की बात जब उसने अपने दोस्तों से बताई तो उन लोगों ने उसकी हत्या करने के लिए कहा और हत्या में उसकी मदद भी की. पुलिस ने बताया कि संतोष राजपूत उर्फ बच्चा ने अपनी 23 वर्षीया पत्नी दिव्या की हत्या करके उसकी लाश को थाने जिले के मालसेज घाट के पास फेंक दिया था. दिव्या के पास एक चार साल का बेटा भी है जो देखभाल के उसके संतोष के मांता-पिता के वाशी में है.

मुंबई पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम मालसेज घाट पर डेरा डाले हुई है, परंतु, अभी तक दिव्या के लाश के बारे में कोई पता नहीं चला है. क्राइम ब्रांच के सूत्रों के मुताबिक शादी के बाद जब दिव्या को संतोष के आपराधिक पृष्ठभूमि के बारे में पता चला तो वह उससे अलग होने की कोशिश की. वह उसके मां-बाप के पास वाशी गई, फिर वह ग्वालियर भी गई थी.

अगस्त मे दिव्या और संतोष टिटवाला मंदिर गए और वहीं पर रास्ते में संतोष ने दिव्या के मोबाइल में एक वीडियो क्लिप देखा. जिसमें वह कुछ लोगों के साथ सेक्स करते हुए दिखाई दे रही थी. सूत्रों के मुताबिक संतोष पहले उसकी हत्या करने में हिचकिचा रहा था और वीडियो क्लिप देखने के बाद पहले कार में ही खूब रोया भी था. लेकिन उसके साथ जो दोस्त गए थे, उन लोगों ने उसे कहा कि उसे बदनामी से बचने के लिए इसकी हत्या कर देनी चाहिए. दोस्तों के उकसावे में आकर संतोष ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी.  गौरतलब है कि दिव्या के माता-पिताजी ने जिन्हें उसके जीवित होने के बारे में पूरा भरोसा था, उन्होंने वाशी पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी. उन्हें एक महिला की लाश की पहचान करने के लिए भंडारा भी भेजा गया था. इसबीच क्राइम ब्रांच ने राजपूत को एक पिस्टल और कुछ जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार कर लिया. फिलहाल वह पुलिस पुलिस हिरासत में है और उसके पहले भी संतोष के ऊपर चोरी-लूट के कई मामले चल रहे हैं.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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