हत्या और सामूहिक दुष्कर्म में शामिल किशोर अपराधियों पर सख्ती होगी..

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पिछले वर्ष 16 दिसंबर के निर्भया दुष्कर्म कांड में दोषी किशोर अपराधी पर बालिग जैसा मुकदमा चलाने संबंधी देशव्यापी मांग रंग लाती नजर आ रही है. करीब एक साल बाद सरकार भी अब इस मुद्दे पर सख्त हो गई है. वह यह मानने के मूड में है कि हत्या, सामूहिक दुष्कर्म सरीखे संगीन मामलों में शामिल नाबालिग अपराधियों से बालिग जैसा बर्ताव हो. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने प्रस्ताव किया है कि 16 वर्ष से अधिक उम्र के शातिर नाबालिग के खिलाफ किशोर न्यायालय की बजाय फौजदारी कोर्ट में मुकदमा चले. उन पर बालिग अपराधियों की तरह भारतीय दंड संहिता की धाराओं में केस दर्ज हो. लेकिन राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) इससे सहमत नहीं है. उसने मंत्रालय की पहल का पुरजोर विरोध किया है.rape2

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार उपरोक्त प्रस्ताव उस विस्तृत मसौदे का हिस्सा है, जिसे मंत्रालय किशोर न्याय कानून में संशोधन के लिए तैयार कर रहा है. मंत्रालय इसे मंजूरी के लिए कैबिनेट के समक्ष पेश करेगा. अधिकारियों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में संशोधन प्रस्ताव को अंतिम रूप दे दिया जाएगा. सूत्र बताते हैं कि प्रस्ताव तैयार करने के क्रम में कानून के कई विशेषज्ञों की राय ली गई है. कई देशों में मौजूद इस तरह के प्रावधानों का अध्ययन किया गया.

जानकारों के अनुसार अगर संशोधन प्रस्ताव को संसद से हरी झंडी मिल जाती है तो 16 से 18 वर्ष के बीच के शातिर नाबालिग अपराधियों को किशोर न्याय अधिनियम के तहत संरक्षण नहीं मिल सकेगा. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब दिल्ली दुष्कर्म कांड की पीड़िता के माता-पिता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. उन्होंने दुष्कर्म कांड में शामिल एकमात्र किशोर अपराधी पर आम अदालत में मुकदमा चलाने की शीर्ष न्यायालय से गुहार लगाई है. ध्यान रहे कि निर्भया कांड के बाद देश भर में यह मांग उठी थी कि संगीन मामलों में नाबालिग अपराधियों की बढ़ती संलिप्तता को देखते हुए किशोर की उम्र सीमा नए सिरे से तय की जाए. उसे मौजूदा 18 वर्ष से घटाकर कम की जाए. हालांकि जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें किशोर वय की सीमा से 18 वर्ष से कम करने की मांग की गई थी. लेकिन हाल में शीर्ष न्यायालय ने माना कि वह किशोर की उम्र सीमा नए सिरे से तय करने के मुद्दे का परीक्षण करेगी.

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है, ‘हत्या, सामूहिक दुष्कर्म जैसे संगीन अपराध में ज्यादा से ज्यादा किशोर लिप्त रहे हैं. वे कठोर से सजा से इसलिए बच जा रहे है कि क्योंकि घटना के समय उनकी उम्र 18 वर्ष नहीं होती है.’

मंत्रालय के इस कदम का विरोध करते हुए एनसीपीसीआर की अध्यक्ष कुशल सिंह ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित बाल उम्र सीमा के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए. उन्होंने इस बारे में महिला एवं बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ को पत्र लिखकर विरोध दर्ज कराया है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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