तरुण तेजपाल अदालत की शरण में जा सकते हैं…

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तहलका के संपादक तरुण तेजपाल के खिलाफ लगे यौन उत्पीड़न के आरोप की जांच कर रही गोवा पुलिस की टीम रविवार को तहलका के तीन कर्मियों से पूछताछ के बाद गोवा लौट गई. पुलिस ने तीनों कर्मियों से इसलिए पूछताछ की क्योंकि घटना के बाद पीड़िता ने उन्हीं से पूरी बात बताई थी. पुलिस तीनों कर्मियों से पूछताछ कर पीड़िता के बायान और उनके बयान में मेल देखना चाहती थी. जांच टीम अपने साथ एक हार्ड डिस्क और कुछ दस्तावेज भी ले गई.tarunandshoma

अटकलें लगाई जा रही थीं कि तीन सदस्यीय पुलिस टीम तरूण तेजपाल से पूछताछ कर सकती है और हो सकता है कि उन्हें गिरफ्तार भी करे. हालांकि, पुलिस टीम तेजपाल से पूछताछ किए बिना ही वापस गोवा चली गई. पुलिस ने कल शाम 4:45 मिनट से लेकर तड़के 2:00 बजे तक करीब नौ घंटे तहलका की प्रबंध संपादक शोमा चौधरी से पूछताछ की थी. दक्षिण दिल्ली के ग्रेटर कैलाश-2 स्थित तहलका के दफ्तर में शोमा से पूछताछ हुई थी.

जांच टीम अपने साथ एक सीपीयू और कुछ दस्तावेजों के अलावा वे ई-मेल भी ले गई जिनका आदान-प्रदान शोमा, पीड़ित पत्रकार और तेजपाल के बीच हुआ था. इसके अलावा, पुलिस ने शोमा के मोबाइल फोन, एक आई-पैड और उनके लैपटॉप को भी खंगाला. यह जानकारी सूत्रों ने दी.

शोमा ने कहा कि कल तहलका के दफ्तर में गोवा पुलिस ने मुझसे नौ घंटे तक बयान लिए. यह एक अलग अनुभव था. मैंने पूरा सहयोग किया. मैंने सभी प्रासंगिक दस्तावेज और वे ई-मेल दिखाए जिनका आदान-प्रदान मेरे सहकर्मियों और प्रबंधन के बीच हुआ था. यह अच्छा अनुभव था. मैं उम्मीद करती हूं कि इससे पूरे मामले में स्पष्टता आएगी और यह न्याय दिलाने में मददगार साबित होगा.

इस बीच, समझा जाता है कि तेजपाल इस मामले में अदालत का रुख कर सकते हैं. मीडिया की खबरों में तेजपाल के हवाले से कहा गया था कि पीड़िता झूठ बोल रही है और उन्हें फंसाया गया है. तेजपाल ने यह आरोप भी लगाया था कि राजनीतिक ताकतें इस मामले को हवा दे रही हैं.

दूसरी ओर, राष्ट्रीय महिला आयोग ने मुंबई पुलिस से कहा है कि वह पीड़िता को सुरक्षा मुहैया कराए. आयोग ने यह भी कहा कि महिला पत्रकार को आगे आकर अपना मामला पुख्ता तरीके से पेश करना चाहिए. इससे पहले, पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) सैमी टैवरेस की अगुवाई वाली गोवा अपराध शाखा की टीम ने पीड़िता के उन तीन सहकर्मियों से पूछताछ की जिनसे पीड़िता ने गोवा के एक होटल में हुई घटना के बाद संपर्क किया था. पीड़िता ने अपने उन सहकर्मियों को वह ई-मेल भी भेजा था जिसमें उन्होंने शोमा चौधरी से तेजपाल की हरकत की शिकायत की थी.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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