बुंदेलखंड के बालू के धंधे में माफियागीरी का बोलबाला सैफई राजवंश के लिये अपनों से चुनौती का सबब बन गया है. इसका नजारा जालौन जिले में देखने को मिला. जहां सैफई राजवंश के बालू सिंडीकेट के खिलाफ पार्टी के ही एक पूर्व सांसद ने पत्रकारों पर धन खर्च कर खबरें छपवानी शुरू कर दी हैं. जिले के अधिकारी इस द्वंद से परेशान नजर आ रहे हैं.86036

जालौन जिले में बालू के धंधे को सोना उगलने वाला माना जाता है. इस कारण इस धंधे पर यहां सैफई राजवंश तक की गिद्ध दृष्टि जम गयी है. पिछले पौने दो वर्षों के अखिलेश शासन में इसे लेकर सैफई राजवंश में आपस में ही यादवी गिद्ध की नौबत आ चुकी है. पारिवारिक सुलह के बाद दो माह पहले ही पूरे जिले में बालू खनन की बागडोर परिवार के एक सदस्य को सर्वसम्मति से सौंप दी गयी. इससे पूर्व सांसद का परिवार खार खा बैठा है. जो झांसी मंडल को अपनी जागीर समझता है. यह परिवार पहले से कई घाटों पर अवैध खनन करा रहा था जब इस पर दबाव डाला गया कि वह भी सिंडीकेट में समर्पण कर जाये तो उसे गवारा नहीं हुआ.

जंग बढऩे पर उक्त परिवार का दुस्साहस सैफई राजवंश के हितों पर अखबारी हमले करवाने के रूप में सामने आया है. पिछले दो दिन से यहां सिंडीकेट के भंडारण परमिट के आधार पर हो रहे अवैध खनन की खबरें छप रही हैं. जालौन के जिलाधिकारी ने अपने पर मुसीबत टूटती देखकर नेपथ्य से संचालित उक्त षड्यन्त्र की असलियत ऊपर बता दी. इससे सैफई राजवंश की भृकुटियां तन गयी हैं. इसका पहला निशाना झांसी के डीआईजी एसएसपी व हमीरपुर के एसपी बने जिन्हें पूर्व सांसद के इशारे पर नाचने की वजह से आज पद से हटाकर लूप लाइन में डाल दिया गया.

(एक पत्रकार के मेल पर आधारित)

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By admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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