सीबीआई को असंवैधानिक करार देने के फैंसले पर सुप्रीम कोर्ट की रोक..

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नई दिल्ली. सीबीआई को असंवैधानिक करार देने के गुवाहाटी हाईकोर्ट के फैसले को केंद्र सरकार ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देकर तत्काल फैसले पर रोक लगाने की मांग की है. सरकार की इस याचिका की आज शाम  मुख्य न्यायाधीश ने अपने घर पर सुनवाई करते हुए गुवाहाटी उच्च न्यायालय के फैंसले पर अमल पर रोक लगा कर फौरी तौर पर राहत दे दी है. अगली सुनवाई छह दिसंबर  को होगी.sc-435

गौरतलब है कि गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 6 नवंबर को अपने एक फैसले में कहा था कि दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (डीएसपीई) अधिनियम 1946 के तहत गठित सीबीआई पुलिस बल नहीं है और यह अधिनियम का न तो एक अवयव है और न ही हिस्सा. इसीलिए डीएसपीई अधिनियम 1946 के तहत गठित सीबीआई को पुलिस बल नहीं माना जा सकता.

हाईकोर्ट ने सीबीआई गठित करने के गृह मंत्रालय के 1 अप्रैल 1963 के प्रस्ताव को खारिज कर दिया. एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पीपी मल्होत्रा ने सीबीआई के गठन से जुड़े 1963 के प्रस्ताव को खारिज करने के अभूतपूर्व फैसले को स्पष्ट रूप से गलत ठहराया है.

केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष गुहार की कि गुवाहाटी उच्च न्यायालय से सरकार के समक्ष संकट खड़ा हो गया है और इस फैंसले से करीब दस हज़ार मामले प्रभावित हो सकते हैं. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई छह दिसम्बर पर टालते हुए गुवाहाटी उच्च न्यायालय के फैंसले पर रोक लगा दी.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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