राजस्थान कांग्रेस व भाजपा में बजा बगावती बिगुल…

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विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस व भाजपा टिकटों की पहली सूची आने के दो दिन बाद ही बगावत का बिगुल बजना शुरू हो चुका है. चिकित्सा राज्य मंत्री डॉ. राजकुमार शर्मा ने नवलगढ़ से टिकट कटने के बाद कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लडऩे का ऐलान कर दिया है. शर्मा का टिकट कटवाने में झुंझुनूं सांसद शीशराम ओला की अहम भूमिका मानी जा रही है. इसे ओला को चुनौती देना माना जा रहा है. श्रीगंगानगर और दौसा से भी बगावत के सुर सुनाई देने लगे हैं.congress-bjp-india

दौसा में शिक्षा मंत्री बृजकिशोर शर्मा के चचेरे भाई विनोद बिहारी ने बीसूका जिला अध्यक्ष से इस्तीफा दे दिया है. अभी 137 टिकटों की घोषणा होना बाकी है, ऐसे में कांग्रेस में बगावत के सुर और तेज हो सकते हैं. सरकार को समर्थन देने वाले निर्दलीय और बसपा से कांग्रेस में आए जिन विधायकों को टिकट दिए हैं उनके खिलाफ कांग्रेस के दावेदारों ने अभियान शुरू कर दिया है. सरकार को सहारा देने वाले जिन विधायकों को टिकट नहीं मिलेगा अब वे खुद बागी होकर मैदान में उतरेंगे. इसकी शुरुआत राजकुमार शर्मा ने कर दी है.

उधर भाजपा में भी टिकटों की घोषणा के साथ ही बगावत का बिगुल बज गया है. मंगलवार दोपहर टोडाभीम से बत्तीलाल मीणा ने भाजपा उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भर दिया. हालांकि, देर शाम टिकटों की घोषणा में यहां से रामराज मीणा को टिकट दे दिया गया. अब बत्तीलाल मीणा निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लडऩे की बात कह रहे हैं. कुल मिलाकर दोनों ही पार्टियों में बगावती सीजन शुरू हो गया है.
सिविल लाइन्स सीट पर पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डा. अरुण चतुर्वेदी को टिकट देने की घोषणा करते ही भाजपा के पिछले चुनाव में प्रत्याशी रहे अशोक लाहोटी बगावत पर उतर गए है. उनके समर्थन में करीब 9 वार्डों के पदाधिकारियों ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को इस्तीफे फैक्स किए हैं. लाहोटी के बागी होकर चुनाव लडऩे की चर्चा है.
भाजपा ने पहली सूची में ही जयपुर जिले की 19 में से 18 सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं. चाकसू से मौजूदा विधायक प्रोमिला कुंडेरा का टिकट काटा गया है. उनकी जगह पूर्व संसदीय सचिव लक्ष्मीनारायण बैरवा को उम्मीदवार बनाया है. वहीं फुलेरा सीट पर भाजपा के मौजूदा विधायक निर्मल कुमावत का टिकट अटक गया है.

पूर्णत: शहरी 7 सीटों में से 5 पर मौजूदा विधायकों को दुबारा टिकट दिए गए है. यहां सिविल लाइन्स सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार प्रताप सिंह खाचरियावास के सामने भाजपा ने मुकाबले में पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डा.अरुण चतुर्वेदी को प्रत्याशी घोषित किया है. वहीं मालवीय नगर से कालीचरण सराफ, विद्याधर नगर से नरपत सिंह राजवी, किशन पोल से मोहनलाल गुप्ता, आदर्श नगर से अशोक परनामी, सांगानेर से घनश्याम तिवाड़ी को फिर से प्रत्याशी बनाया है. ग्रामीण सीट झोटवाड़ा में राजपाल सिंह शेखावत तमाम विरोध के बावजूद टिकट हासिल करने में सफल रहे. उनके सामने कांग्रेस किसी जाट प्रत्याशी को टिकट दे सकती है.
आमेर से इस बार भाजपा ने संघ पृष्ठभूमि के सतीश पूनिया को चुनावी मैदान में उतारा है. संगठन में लगातार चौथी बार प्रदेश महामंत्री बने सतीश पूनिया को टिकट देकर वसुंधरा राजे ने आरएसएस को महत्व दिया है. हालांकि इस सीट पर भाजपा के टिकट पर दो बार चुनाव हारने वाले नवीन पिलानिया दो दिन पहले ही राजपा में चले गए. उनकी इस बार राजपा से ताल ठोकने की तैयारी है. उधर कांग्रेस आमेर सीट से ब्राह्मण कार्ड खेलकर फिर से यह सीट जीतने की जुगत में है. ऐसे में यहां त्रिकोणीय मुकाबले के आसार है.
बस्सी सीट पर भाजपा से विधायक रह चुके कन्हैयालाल मीणा का पिछले चुनाव में टिकट काटा गया था. इस पर मीणा ने बागी अंदाज़ में निर्दलीय चुनाव लड़ा और भाजपा की जमानत जब्त करा दी, खुद वो दूसरे नंबर पर रहे थे. एसटी के लिए आरक्षित इस सीट पर भाजपा ने इस बार कन्हैयालाल मीणा को ही मैदान में उतारा है. बस्सी और बगरू सीट पर कांग्रेस ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले है. वहीं एससी के लिए सुरक्षित सीट बगरू से भाजपा ने युवा चेहरे कैलाश वर्मा को टिकट दिया है.
भाजपा के वरिष्ठ नेता घनश्याम तिवाड़ी के समर्थन में सांगानेर में तीन दिन पहले हुआ पार्टी पदाधिकारियों का सम्मेलन राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है. तिवाड़ी के घर दिवाली के दिन सांगानेर क्षेत्र से मोटरसाइकिलों, कारों-जीपों आदि वाहनों में भर-भर कर समर्थक जुटे. इन सबके साथ तिवाड़ी ने फोटो सेशन करवाया. यह ठीक उसी समय हो रहा था, जब पार्टी की प्रमुख नेता वसुंधरा राजे पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं के साथ फोटो खिंचवा रही थीं. फोटो सेशन की यह सियासत भाजपा में काफी चर्चित रही. तिवाड़ी खेमा अपने नेता को भावी मुख्यमंत्री से कमतर आंकने को तैयार नहीं है. तिवाड़ी के विरोधी खेमे से जुड़े भाजपा नेता रामचरण बोहरा के लोग भी फोटो सेशन करते रहे. उनका फोकस तिवाड़ी के घर जुटे समर्थकों के चेहरों पर फोकस करना था, ताकि तत्काल ही मैडम को बताया जा सके कि वहां कौन-कौन किस तरह जुटे. क्या पता सियासत में कब क्या हो जाए?

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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