मन्ना डे के लंबित मेडिकल बिल का भुगतान करेगी कर्नाटक सरकार..

admin
0 0
Read Time:7 Minute, 27 Second

मरने के बाद कोलकाता न आ सके मन्ना डे, तो उनकी सुधि नहीं ली बंगाल ने…

-एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास​||

मन्ना डे का विख्यात गाना मां के मंदिर में थोड़ी सी बैठने की जगह की प्रार्थना है. मृत्योपरांत परलोक में उनको क्या वह जगह मिली या नहीं, जानने का कोई उपाय नहीं है. इहलोक में तो कालीपूजा और दीवाली के मौके पर हर कहीं मन्ना डे के गीत बज रहे हैं. बंगाल में मन्ना डे के भक्तों की कमी नहीं है, जाहिर है. लेकिन हकीकत यह है कि मन्ना डे की बेटी और भतीजों के पारिवारिक विवादों के चलते मन्ना डे बंगाल नहीं आ सके मरने के बाद. बेटी ने तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का अनुरोध भी ठुकरा दिया.हालांकि बेटी ने उनका चिताभस्म बंगाल भेजने की पेशकश की थी, तो नाराज दीदी ने साफ कहा दिया कि जब उनका पार्थिव शरीर का ही दर्शन वंचित है बंगाल तो हम उनकी राख लेकर क्या करेंगे. इसके बाद बंगाल सरकार ने इसकी सुधि नहीं ली कि मन्ना डे के लंबित अस्पताल बिल का क्या हुआ. अब दीदी की सारी पहल को बेमतलब बनाते हुए कर्नाटक सरकार ने दिग्गज पार्श्वगायक मन्ना डे के लंबित मेडिकल बिल का भुगतान करने का निर्णय किया है जिनकी 24 अक्टूबर को यहां एक निजी अस्पताल में मौत हो गई थी. यह बिल 25 लाख रुपये का है.mannadey

उनका अंतिम संस्कार बेंगलुरु में ही हुआ.

आधिकारिक विज्ञप्ति में सिद्धरमैया ने कहा कि यह राज्य सरकार की केवल भावना नहीं है बल्कि महान गायक के प्रति सम्मान है जिन्होंने कन्नड़ फिल्मों में भी गाने गाए. मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि राज्य सरकार मन्ना डे के सम्मान में संगीतमय शाम नाद नमन का आयोजन करेगी.

समझा जाता है कि मन्ना डे के परिवार ने मुख्यमंत्री से उस समय बिलों का भुगतान करने में मदद की अपील की थी जब वे 25 अक्टूबर को श्रद्धांजलि अर्पित करने गए थे. परिवार ने इससे पहले आरोप लगाया था कि डे के कुछ रिश्तेदारों ने 30 लाख रुपये की हेराफेरी कर दी.

मृतक के पार्थिव शरीर पर सत्ता पक्ष का पताका फहराना बंगाल में परंपरा सिद्ध है.इसपर किसी की उंगली उठाने की इजाजत नहीं है.शोक संतप्त परिजनों को हाशिये पर रखकर अंत्येष्टि बेदखल हो जाना आम है. दादा साहेब फाल्के अवार्ड से सम्मानित मन्ना डे के नाम से लोकप्रिय प्रबोधचंद डे का जन्म एक मई 1919 को कोलकाता में हुआ था. मन्ना डे ने अपनी गायिकी के सफर में कई भारतीय भाषाओं में लगभग 3500 से अधिक गाने गाए.लेकिन मरने के बाद मन्ना डे कोलकाता नहीं आ सके.उनके परिवार ने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उनका शव कोलकाता लाकर अंतिम संस्कार करने की अपील ठुकरा दी है. मन्ना का पैतृक घर भी कोलकाता में हैं और उनका जन्म भी इसी शहर में हुआ था.पिछले महीने ही मन्ना डे का 94वां जन्मदिन मनाया गया. इस मौके पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उनसे मुलाकात की थी.

गौरतलब है कि मशहूर गायक मन्ना डे की मौत पर जहां संगीत की दुनिया गमगीन हो गई, वहीं पश्चिम बंगाल सरकार पर इस महान कलाकार की मौत पर भी राजनीति करने का आरोप लगा दिया मन्ना डे के परिवार ने. मन्ना डे के परिवार ने ममता सरकार के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि ‘मन्ना डे जीते जी जब कभी राजनीति का हिस्सा नहीं थे, तो अब मरने के बाद भी हम उन्हें इसका शिकार नहीं होने देंगे.’

जाहिर है दीदी का मिजाज उखड़ने के लिए यह काफी है. ममता सरकार ने मन्ना डे के पार्थिव शरीर को कोलकाता लाने की गुहार लगाई थी, लेकिन डे के परिवार ने इस बात पर गहरी आपत्ति व्यक्त कर दी. डे के दामाद ज्ञानरंजन देव ने मन्ना डे के पार्थिव देह को कोलकाता भेजने से इन्कार कर दिया, लेकिन उन्होंने कहा कि डे की अस्थियों को कोलकाता ले जाया जा सकता है. इस पर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बड़े ही तीखे स्वर में कहा कि उन्हें इन अस्थियों की कोई जरूरत नहीं है. मुख्यमंत्री के इस बयान ने डे के परिवार को आहत किया है.यही नहीं देव ने ममता सरकार पर कई आरोप लगाए हैं. देव ने कहा कि पिछले छह महीने से जब मन्ना डे बेंगलूर के एक अस्पताल में आईसीयू में भर्ती थे और जिंदगी-मौत की जंग लड़ रहे थे, उस वक्त ममता सरकार को छोड़कर दूसरे राज्य सरकार के कई आला अधिकारी उनसे मिलने वहां गए थे, लेकिन ममता बनर्जी ने हाल-चाल जानने की भी जरूरत नहीं समझी थी.

देव ने बताया कि बंगाल पुलिस ने डे के अकाउंट संबधित किसी शिकायत की जानकारी लेने के लिए उन्हें कई बार अस्पताल में फोन भी किए थे, लेकिन जब तक डे के परिवार ने कोर्ट में इस मामले को लेकर अपील नहीं की तब तक पुलिस के फोन आते रहे. लेकिन किसी ने कुछ नहीं किया.

आरोप लग रहा है कि ममता सरकार उनका अंतिम संस्कार कोलकाता में कराके उसे राजनीतिक रंग देना चाहती थी. देव ने कर्नाटक सरकार का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि उन लोगों ने यहां पूरी तैयारियां की थीं. उन्होंने बताया कि जैसे ही मन्ना डे की मौत की खबर बंगाल पहुंची, ममता सरकार के दो आला मंत्री वहां डे के बेटे और बेटी को समझाने पहुंच गए.लेकिन डे की बेटी ने उनका अंतिम संस्कार कोलकाता में करने से साफ इन्कार कर दिया.

About Post Author

admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleppy
Sleppy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Next Post

दंगा राहत शिविर: युवती से गैंग रेप...

उत्तर प्रदेश में मुजफ्फरनगर जिले के एक दंगा राहत शिविर में रह रही युवती के साथ दो युवकों ने खेत में खींचकर गैंगरेप किया. युवती ने परिजनों को घटना की जानकारी दी. मामले की रिपोर्ट दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. मामले को लेकर तनाव व्याप्त […]
Facebook
%d bloggers like this: