शांति भूषण ने ही कहा था, ”प्रशांत कर सकता है जजों को मैनेज” – दिल्ली पुलिस

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पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण की ऑडियो सीडी के रहस्य पर से पर्दा हटता नजर आ रहा है। शांति भूषण और अमर सिंह की ऑडियो सीडी मामले में दिल्ली पुलिस तीस हजारी कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट फाइल की है। रिपोर्ट में सीडी को सही बताया गया है। इस ऑडियो सीडी में शांति भूषण, अमर सिंह और मुलायम सिंह के बीच फोन पर बातचीत की रिकार्डिंग का दावा किया गया है। जिसमें पैसों के लेन देन की चर्चा है।

मुलायम सिंह और शांति भूषण: मैनेज नहीं हुई पुलिस?

क्लोजर रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली की प्राइवेट लैब और सीएफएसएल ने इस सीडी को असली बताया है। पुलिस ने ये क्लोजर रिपोर्ट एक महीने पहले फाइल की है। इससे पहले चंडीगढ़ लैब ने इस सीडी को नकली बताया था। अब तक कुल तीन लैब में इस सीडी की जांच हो चुकी है। सीएफएसएल की दो लैब से सीडी को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट आई थी।

सूत्रों ने बताया कि अमर सिंह ने पुलिस को बताया था कि टेप में उनकी आवाज असली है और इसमें ‘किसी प्रकार की छेड़छाड़’ नहीं की गई है। इस सीडी को अप्रैल में अन्ना हजारे द्वारा सशक्त लोकपाल लाने के लिए अनशन करने के बाद मीडिया में जारी किया गया था। अनशन के बाद भूषण को लोकपाल मसौदा तैयार करने के लिए बनाई गई ड्राफ्टिंग कमिटी का सह-अध्यक्ष बनाया गया था। तब भूषण ने आरोप लगाया था कि समाज में उनको बदनाम करने के लिए इस नकली सीडी को तैयार किया गया है।

गौरतलब है कि सीडी के असली पाए जाने की जानकारी के बाद अन्ना की कोर टीम के एक और सदस्य पर सवालिया निशान लग गया है। वकील और पूर्व केंद्रीय मंत्री शांति भूषण टीम अन्ना के प्रमुख सदस्यों में हैं। वे इंदिरा गांधी के खिलाफ मुकदमा लड़ चुके हैं।

सीडी में शांति भूषण कथित तौर पर मुलायम सिंह और अमर सिंह को बता रहे हैं कि उनका बेटा प्रशांत भूषण ‘जजों को मैनेज’ कर सकता है। अप्रैल में इस मामले के सामने आने के बाद जो लोग शांति भूषण की साझा ड्राफ्टिंग कमिटी से इस्तीफे की मांग कर रहे थे, उन्हें एक बार फिर सवाल उठाने का मौका मिल गया है।

उधर इस बारे में प्रशांत भूषण ने कहा है कि मालूम होता है कि कुछ पुलिस अधिकारी, कुछ फॉरेंसिक एजेंसी के अधिकारी और सरकार के कुछ लोग उनके खिलाफ आपराधिक षडयंत्र कर रहे हैं। उन्होंने सवाल किया, ”चंडीगढ़ स्थित सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लैब (सीएफएसएल) के बारे में वे क्या बोलेंगे?”

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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