राजस्थान में समाचार प्लस ईटीवी से हथिया सकता है नम्बर एक स्थान…

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हाल ही में राजस्थान के लिए लांच हुए रीजनल न्यूज चैनल ‘समाचार प्लस’ ने बरसों से राजस्थान में नम्बर एक पर बने हुए ईटीवी को पछाड़ने की दौड़ में टीआरपी के मामले में इस सप्ताह बड़ी बढ़त हासिल कर ली है. लगभग दुगुनी की छलांग लगाकर समाचार प्लस ने नंबर दो की स्थिति अपनी और ज्यादा मजबूत कर लिया है और नंबर एक ईटीवी राजस्थान के गर्दन की तरफ खुद को बढ़ा लिया है. यदि समाचार प्लस इसी रफ्तार से आगे बढ़ता रहा तो वह दिन दूर नहीं कि अपनी तमाम जुगाड़ों के बावजूद समाचार प्लस से पिछड़ जायेगा.sptrpraj

राजस्थान में बाकी चैनलों की क्या स्थिति है, यह जानने के लिए उपरोक्त चार्ट देखें… उधर, यूपी-उत्तराखंड में भी समाचार प्लस का प्रदर्शन जोरदार है. नंबर चार की पोजीशन में इस चैनल ने इस 43वें हफ्ते काफी अच्छी बढ़त हासिल की है. यूपी-उत्तराखंड में ईटीवी नंबर वन की पोजीशन में है. यूपी-उत्तराखंड में बाकी चैनलों की क्या स्थिति है, यह जानने के लिए चार्ट देखें.

कुछ पत्रकारों का मानना है कि समाचार प्लस राजस्थान की तरह यूपी में भी तेज़ी से आगे बढ़ सकता है. मगर इसके लिए समाचार प्लस को अपने कैमरामैन रखने होंगे.

एक पत्रकार का कहना है कि  इसके पीछे का सच शायद समाचार प्लस के मालिकान को पता नहीं है. जी हां इसके पीछे का सच यह है कि यूपी में अधिकतर जिलों में ईटीवी व समाचार प्लस का कैमरामैन एक ही है. दोनों ने मिलकर एक कैमरा मैन रख लिया और एक ही खबर दोनों चैनलों पर चली गयी. फ़िर कोई कम्पिटीशन तो रहा नहीं. इसलिये जो आगे है वो आगे ही रहेगा. कुछ जगह पर जहाँ दोनों के कैमरा मैन अलग अलग हैं लेकिन समाचार एक ही छत के नीचे से जाता है.

समाचार प्लस, राजस्थान से जुड़े जय प्रकाश शर्मा अपने फेसबुक वॉल पर लिखते हैं: ”मित्रों, समाचार प्लस पर दर्शकों के विश्वास की निरंतरता बनी हुई है. इस विश्वास और अपनेपन के लिए हम राजस्थान के सुधि दर्शकों के प्रति कृतज्ञ हैं. शुरुआत के साथ ही प्रदेश के दर्शकों ने चैनल को जो अपनापन दिया है, वो अभिभूत करने वाला है. रेटिंग्स में इतनी जल्दी और इतनी तेजी से समाचार प्लस का आगे बढ़ना किसी कीर्तिमान से कम नहीं है. आप सभी मित्रों से मिलने वाले सुझाव हमारे लिए पथ प्रदर्शक रहे हैं. हमारे एडिटर इन चीफ उमेश कुमार जी और एक्जीक्यूटिव एडिटर प्रवीण साहनी जी के कुशल निर्देशन में हम निरंतर परिश्रमरत हैं. आपका स्नेह हमारी पूंजी है.”

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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