महुआ टीवी के मीडियाकर्मी संघर्ष की राह पर, कल बारह बजे अन्य साथी भी उनके साथ…

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नोएडा फिल्म सिटी एक ऐतिहासिक संघर्ष का गवाह बना हुआ है. तीन महीने से सेलरी के बिना काम कर रहे महुआ न्यूज के कर्मियों ने कल शाम से बेमियादी हड़ताल कर रखा है और पूरे आफिस पर कब्जा कर लिया है. इनकी मांग है कि तीन महीने की बकाया सेलरी दो और दो महीने की एडवांस सेलरी. इसके बाद महुआ न्यूज बंद कर दो. प्रबंधन इन हड़ताली कर्मियों के बीच फूट डालने की पूरी कोशिश कर रहा है और इन्हें हतोत्साहित करने के लिए कई हथकंडे अपना रहा है. लेकिन सारे महुआ न्यूज कर्मी एकजुट हैं और आरपार की लड़ाई लड़ने का माद्दा अपने भीतर इकट्ठा किए हुए हैं.halla bol
इन हड़ताली मीडियाकर्मियों के समर्थन में सैकड़ों मीडियाकर्मियों और मीडिया संगठनों ने कल बारह बजे महुआ न्यूज का आफिस घेर लेने का ऐलान कर दिया है. इस घेराव का मकसद महुआ न्यूज के अंदर संगठित होकर लड़ रहे साथियों को नैतिक समर्थन देना है और प्रबंधन को ये चेतावनी की अगर जल्द से जल्द मांगें नहीं मानी गई तो महुआ न्यूज के बाहर हजारों लोग न सिर्फ आमरण अनशन पर बैठेंगे बल्कि महुआ के सिक्योरिटी गार्डों को हटाकर खुद पूरे आफिस पर नियंत्रण कर लेंगे और मैनेजमेंट के लोगों को भी आफिस में आने से रोक देंगे.

उल्लेखनीय है कि आईबीएन7, सीएनएन-आईबीएन समेत कई चैनलों में एकमुश्त छंटनी के खिलाफ भी सैकड़ों पत्रकारों ने फिल्म सिटी में प्रदर्शन कर यह संदेश दे दिया था कि प्रबंधन की मनमानी अब पत्रकार नहीं सहने वाले और अन्याय के खिलाफ अब सड़कों पर लड़ाई लड़ी जाएगी. हालांकि पिछले प्रदर्शन में छंटनी के शिकार पत्रकारों में से कुछ एक ही आए थे, इसलिए आंदोलन लंबा नहीं चल सका. लेकिन इस बार तो सारे पीड़ित पत्रकार खुद पूरे आफिस पर कब्जा करके अपने जज्बे और जुनून का प्रदर्शन कर चुके हैं. ऐसे में आप सभी पढ़े-लिखे, संवेदनशील, पत्रकार, गैर-पत्रकार लोगों से अपील है कि वो कल यानि एक नवंबर को दिन में बारह बजे नोएडा फिल्म सिटी स्थित महुआ न्यूज के आफिस के सामने पहुंचें और एक ऐतिहासिक संघर्ष को समर्थन देने का अपना नैतिक कर्तव्य पूरा करें.

भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह जो कल रात लगातार महुआ न्यूज के आफिस के सामने मौजूद रहे और आंदोलनकारी कर्मियों से मिलकर उन्हें अपना समर्थन दिया, ने एक बयान में कहा है कि कल बारह बजे भड़ास की पूरी टीम और समर्थकों की फौज महुआ न्यूज के सामने पहुंच रही है. उन्होंने कहा- ”आप सभी न्यू मीडिया, वेब, ब्लाग, सोशल मीडिया के साथियों समेत पूरे मीडिया जगत और आम लोगों से अपील है कि इस ऐतिहासिक मौके पर जरूर पहुंचें ताकि मीडियाकर्मियों का संघर्ष आगे बढ़ सके और प्रबंधन को घुटने टेकने के लिए मजबूर किया जा सके. कल बारह बजे महुआ न्यूज को घेरने का आंदोलन किसी एक संगठन या किसी एक पोर्टल या किसी एक पत्रकार की तरफ से नहीं बल्कि सवा सौ हड़ताली महुआ मीडियाकर्मियों के समर्थन में स्वतःस्फूत उपजा आंदोलन है जिसे आगे भी चलाया जाता रहेगा.”

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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