चुनावी रणभेरी शिव विधानसभा क्षेत्र, तब से अब तक..

admin
0 0
Read Time:9 Minute, 36 Second

लगातार दूसरी बार अमिन खान कभी नहीं जीते, दस चुनावों में एक मात्र महिला उतरी मैदान में..छह बार कांग्रेस तो चार बार गैर कांग्रेस जीती..

-भाटी चन्दन सिंह||

बाड़मेर सरहदी जिले बाड़मेर कि शिव विधानसभा क्षेत्र में अब तक दिलचस्प मुकाबले हुए. ज़िसमे कांग्रेस छह बार तो भाजपा दो बार, जनता पार्टी दो बार जीती. शिव विधानसभा क्षेत्र विषम परिस्थितियों में बसा है. एक तरफ उण्डू कश्मीर, दूसरी तरफ हरसाणी गिराब, तीसरी तरफ रामसर गागरिया, चौथी तरफ गड़रा रोड सुन्दर तो छठी तरफ बिजराड और गफणो के गाँव शुमार है. संसाधनविहीन इन गाँवों में मतदान करना किसी चुनौती से कम नहीं है. कहने को शिव सर्वाधिक महत्वपूर्ण विधान सभा क्षेत्र है, यह वो क्षेत्र है जहाँ से कभी प्रत्याशी चुनाव लड़ने को तैयार नहीं होते थे. उन्हें जोर जबर्दस्ती घरो से उठाकर पर्चे भराये जाते थे.Slide3

जातिगत आंकड़े शिव विधानसभा क्षेत्र में इस बार करीब डॉ  पांच हज़ार या इससे अधिक मतदाता होंगे. नाम जुड़ने कि प्रक्रिया चल रही है. शिव में मुसलमान 53000, राजपूत रवाना राजपूत इकतालीस हज़ार, अनुसूचित जाती चौंतीस हज़ार जाट  तीस हज़ार, प्रजापत आठ हज़ार चरण छह हज़ार, पुरोहित चार हज़ार.  यह है जातिगत आंकड़े जिससे राजनितिक खेल फिट होते है.

शिव निरीक्षक मंडल. .

विधान सभा क्षेत्र में आर आई सर्किल शिव के 11, भींयाड कि दस, हरसाणी कि 11 गडरा रोड कि दस, रामसर कि सात, खड़ीं कि छह गागरिया कि आठ तथा बिजराड के 11 पतवार मंडल शामिल है जिसमें 470 गाँव 74 ग्राम पंचायते आठ राजस्व मंडल 74 पतवार मंडल शामिल है.

सबसे कम अंतर की जीत. .

शिव विधानसभा क्षेत्र में दूसरे विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के हुकम सिंह मात्र नौ मतों से जीते उन्होंने स्वतंत्र पार्टी के कान सिंह को नौ मतों से हराया वहीँ, सर्वाधिक मतों से गत चुनावों में कांग्रेस के अमिन खान उन्तीस हज़ार से अधिक मतों से विजयी रहे.

शिव विधानसभा सन 1967 में पहली बार स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में आया. प्रथम चुनावों में शिव विधानसभा के 58752 मतदाताओ में से 21888 मतदाताओ ने वोट डाले, जिसमें कांग्रेस के हुकम सिंह को 11564 स्वतंत्र पार्टी के कान सिंह को 9335 वोट मिले प्रथम विधायक बनाने का गौरव हुकम सिंह को मिला.

दूसरा चुनाव 1972 शिव विधानसभा क्षेत्र का दूसरा चुनाव 1972 में हुआ, जिसमें शिव के 61444 मतदाताओं में से 29089 वोटरो ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया. इन चुनावों में कांग्रेस ने फिर हुकम सिंह को मैदान में उतरा जिन्हे 9376 मत मिले तो स्वतंत्र पार्टी के कान सिंह को 9367, केवल चंद को 6953 तेजूराम को 2413 मत मिले. हुकम सिंह मात्र नौ मतों से विजयी घोषित हुए.

तीसरा चुनाव 1977 तीसरे चुनावों में शिव विधानसभा क्षेत्र के 72169 मतदाताओं में से 39495 मतदाताओ ने 97 मतदान केन्द्रो पर वोट डाले जिसमें जनता पार्टी के कान सिंह को 12680 कांग्रेस के तगाराम चौधरी को 12155 शोभ सिंह को 3136, केवल चंद को 2560 सवाई सिंह को 1847 शांकतरदान को 1605 मदन लाल 1573  लाल चंद को 1350 भीखाराम को 1293 जोगराज सिंह को 346 मत मिले. पहली बार जनता पार्टी के कान सिंह 525 मतों से विजयी हुए.

चौथा चुनाव 1980 शिव के चौथे चुनाव में शिव के 94449 मतदाताओ में से 43619 मतदाताओं ने 116 मतदान केन्द्रो पर वोट डाले जिसमें कांग्रेस के अमिन खान को 16700 निर्दलीय शोभ सिंह को 11731 सवाई सिंह जनता पार्टी को 9141 सोमी उर्फ़ शोभ को 3532 गणपत सिंह को 1105 कण सिंह को 450 सोहन सिंह को 215 मत मिले. इस बार अमिन खान 4969 मतों से विजयी हुए.

पांचवा चुनाव 1985 शिव के पांचवे और राज्य विधानसभा के आठवे विधान सभा चुनावों में शिव विधानसभा के 112787 मतों में से 70220 मतदाताओ ने 155 मतदान केन्द्रो पर वोट डाले जिसमेंजनता पार्टी के रावत उम्मेद सिंह को 40002 कांग्रेस के अमिन खान को 28865 और निम्बाराम को 459 मत मिले. बाड़मेर के रावल उम्मेद सिंह ने 11137 मतों से शानदार जीत हासिल की.

छठा चुनाव 1990 छठा चुनाव शिव का सताईस फरवरी को सम्पन हुआ जिसमें 155 मतदान केन्द्रो पर 127854 मतदाताओ में से 77362 मतदाताओ ने वोट डाले जिसमें कांग्रेस के अमिन खान को 38576 जनता दल के हरी सिंह को 34169 कन्हैयालाल को 2055 शोभ सिंह को 375 गोमती देवी को 340 अन्य चार उम्मीदवारो को डॉ सौ और उससे कम मत मिले. इस बार पुनः अमिन खान 4587 मतों से विजयी होकर दूसरी बार विधानसभा पहुंचे.

सातवा चुनाव 1993 सातवा चुनाव शिव में 145151 मतदाताओ में से 98098 मतदाताओं ने १५५ मतदान केन्द्रो पर वोट डाले जिसमें भाजपा के हरी सिंह सोढ़ा को 47881 कांग्रेस के अमिन खान को 41739 पृथ्वी राज को 2232 गफूर को 1255 अर्जुनदान को 805 अन्य पांच को पांच सौ या कम मत मिले. शिव में पहली बार हरी सिंह ने कमल खिलाया भाजपा ने यह सीट 6142 वोटो से जीती.

आठवां चुनाव 1998 आठवे चुनाव में शिव के 162087 मतदाताओं में से 115051 मतदाताओ ने 350 मतदान केन्द्रो पर वोट डाले. जिसमें अमिन खान को 64552 भाजपा के हरी सिंह को 45235 बसपा के मूल चंद तंवर को 3396 मत पड़े. अमिन खान ने हरी सिंह को 19317 मतों से अंतर से जीत विधायक बने.

नौवां चुनाव शिव में नौवां चुनाव बेहद दिलचस्प रहा. इन चुनावों में 192409 मतदाताओ में से 146143 मतदाताओ ने 405 मतदान केन्द्रो पर वोट डाले जिसमर भाजपा के डॉ जालम सिंह रावलोत को 72526 अमिन खान कांग्रेस को 61529, इनेलो के मंगलाराम सुथार को 5412 अली मोहम्मद को 2715 सोनाराम को 2553 हरकलहाराम को 1354 वोट मिले. भाजपा के डॉ जालम सिंह ने यह सीट 10997 मतों से जीत कर भाजपा कि झोली में डाली

दसवां चुनाव 2008 तेहरवीं विधानसभा के लिए परिसीमन के बाद हुआ. जैसलमेर जिले के बसिया क्षेत्र कि 13 पंचायते इस क्षेत्र से अलग हो गयी. वहीँ, चौहटन के बिजराड क्षेत्र कि पंचायते जुड़ने से राजपूत वोट कम हो गए. शिव में हुए चुनावों में शिव के 197153 मतदाताओ में से 143659 मतदाताओ ने 516 मतदान केन्द्रो पर वोट डाले जिसमें कांग्रेस के अमिन खान को 75787 जालम सिंह रावलोत को 45927,  कुन्दनदान को 6657 नीम्ब सिंह को 6157 अचलाराम को 3914 गोर्धन सिंह को 3126 जान मोहम्मद को 2297 पदमाराम को 2232 मत मिले, अमिन खान पुनः इस सीट पर सर्वाधिक 29861 मतों से विजयी हुए.

खासियत. शिव क्षेत्र के चुनावों में अमिन खान लगातार दो चुनाव जीतने में कब्व्ही सफल नहीं हुए. एक चुनाव जीतने के बाद दूसरा चुनाव हारे अमिन खान. शिव के चुनावों के इतिहास में एक मात्र महिला उम्मीदवार गोमती देवी ही चुनाव लड़ी और करीब साढे तीन सौ मत ही मिल सके.

About Post Author

admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleppy
Sleppy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Next Post

इंदिरा-भिंडरावाला, सत्ता, सियासत, मज़हब, मोहरे और सवाल...

वो दोनों ख़ुदा बनना चाहते थे…. -मयंक सक्सेना|| 24 अक्टूबर 1984 को ही देश भर में दीवाली मनाई गई थी, लेकिन धमाकों का माहौल जून के महीने से ही शुरु हो चुका था। पंजाब में श्री हरमंदिर साहब में जरनैल सिंह भिडरावाला के नेतृत्व में इकट्ठा हो चुके चरमपंथियों और […]
Facebook
%d bloggers like this: