मास्टर माइण्ड मोदी छुआछूत के शिकार…

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-मदन मोदी||
वाह! कितने आश्चर्य, दुःख और गम्भीरता की बात है कि भाजपा (जिसे आमतौर पर अगड़ों-तगड़ों, सवर्णों, पूंजीपतियों की पार्टी माना जाता है) की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार और गुजरात के बारह वर्षों से मुख्यमंत्री होते हुए भी नरेन्द्रभाई मोदी छुआछूत के शिकार हैं! क्या वे दलित और दमित समाज से आए हैं? क्या वे ऐसी जाति से हैं, जो सामाजिक रूप से छुआछूत की शिकार रही है? यदि ऐसा होता तो उस जमाने में क्या वे वाकई लोगों को चाय बेच पाते, जिसका आज देश में हल्ला मचा है?Modi2952

हमारे देश में खासकर राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश आदि में आदिवासी शोषण का शिकार अवश्य हुए हैं, विकास की मुख्य धारा से वे कटे रहे हैं, लेकिन उनसे ‘छुआछूत’ तो कभी नहीं हुआ है. यहां छुआछूत हुआ है हरिजनों, मेघवालों आदि से, जो मेला ढोने और मृत पशुओं को उठाने व उनका चमडा उतारने आदि का काम करते थे. यदि नरेन्द्रभाई मोदी वाकई ऐसी जाति से हैं तो उनका कथन बहुत गम्भीरता से लिया जाना चाहिए और जिस सहानुभूति को बटोरने के लिए मास्टर माइण्ड मोदी ने अपना यह राग अलापा है, उन्हें सहानुभूति मिलनी चाहिए. न केवल सहानुभूति और समर्थन मिलना चाहिए, बल्कि अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निरोधक कानून के तहत मुकदमा दर्ज कर छुआछूत करने वालों को जेल में बिठाना चाहिए और कम से कम लोकसभा चुनावों तक तो छुआछूत करने वालों की किसी भी कोर्ट से जमानत भी नहीं होनी चाहिए.

मास्टर माइण्ड मोदीजी ने आरोप लगाया है कि उनके साथ राजनीतिक छुआछूत किया जा रहा है तो यह छुआछूत तो दो ही वर्ग कर सकते हैं, एक उन्हीं की पार्टी भाजपा और दूसरे विपक्षी दल जो उन्हें देश का प्रधानमंत्री बनने से रोकना चाहते हैं. ऐसी छुआछूत के शिकार तो राहुल गांधी भी हैं, क्योंकि उनका दोष सिर्फ इतना है कि वे ऐसे परिवार में पैदा हुए हैं, जो देश की सत्ता के केन्द्र में रहा है. स्वयं नरेन्द्रभाई उन्हें हमेशा ताना मार-मार कर कोसते रहे हैं और मां-बेटों को कटाक्ष के जहरीले तीर चला-चलाकर छलनी करते रहे हैं. जहां तक मास्टर माइण्ड मोदी के साथ भाजपा में छुआछूत है तो वह किनके द्वारा और क्यों? क्या जातीय कारणों से? क्या लालकृष्ण आडवाणी, मुरलीमनोहर जोशी आदि अगडों द्वारा यह छुआछूत हो रहा है? उन्हें खुलकर खुलासा करना चाहिए. जहां तक अन्य दलों द्वारा उन्हें प्रधानमंत्री बनने से रोकने के लिए आवाज उठाने का सवाल है, उसके पीछे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और उनकी साम्प्रदायिक छवि कारण हैं, न कि किसी प्रकार का छुआछूत.

दलितों की सहानुभूति और समर्थन बटोरने के लिए मास्टर माइण्ड मोदी यदि छुआछूत की बात करते हैं तो यह उनका सबसे बडा झूठ और दलितों के साथ मजाक है.
अब एक खुलासा- मैं स्वयं मोदी हूं. ‘मोदी’ यह जाति नहीं है, बल्कि एक उपाधि है. मोदी जैनियों में भी हैं, अग्रवालों और माहेश्वरियों में भी और अन्य पिछडा वर्ग (तेली) समाज में भी. जो लोग राजा-महाराजाओं के समय मोदीखाने यानी सेना आदि को राशन की सप्लाई का काम संभालते थे, वे मोदी कहलाए. ऐसे लोग छुआछूत के शिकार कैसे हो सकते हैं? वक्त की मार से या अन्य कारणों से आर्थिक रूप से पिछडने पर तो एक जैनी का बेटा भी होटल में कप-प्लेट धो सकता है, इसका मतलब वह दलित और दमित या छुआछूत का शिकार नहीं हो गया.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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3 thoughts on “मास्टर माइण्ड मोदी छुआछूत के शिकार…

  1. MODI SAMPRADAYIK KAISE HO SAKTE HAI?JAB GUJRAT ME DANGE BHADKE TO MAHARASTRA AUR M.P. AUR RAJSTHAN ME CONGRESS KI SARKAR THI-NARENDRA MODI NE TURANT MAHARASTRA AUR ANYA PADOSI RAJYON SE APNI POLICE BHEJNE KA ANURODH KIYA LEKIN WAHAN KI SARKARON NE POLICE BHEJNE SE INKAR KAR DIYA TURANT SENA KO BULAYA GAYA ,POLICE NE LATHI CHARJE KIYA ,TEAR GASS CHHODI ,BULLET CHALAYE JISME 300 KE KARIB DONO SAMPRADAY KE LOG MARE GAYE .AUR KYA KAR SAKTE THE MODI KYA UNKO KHUD A.K.47 APNE HATH ME LE KAR SADAK PAR AA JANA CHAHIYE THA ?

  2. श्रीमान , मोदी ने राजनितिक अछूत की बात की है न कि सामाजिक अछूत की नहीं हालाँकि मेरा किसी पार्टी से कोई लेनदेन नहीं पर मात्र एक लेख लिखने के लिए गलत बात को आधार बनाना भी उचित नहीं.

  3. श्रीमान , मोदी ने राजनितिक अछूत की बात की है न कि सामाजिक अछूत की नहीं हालाँकि मेरा किसी पार्टी से कोई लेनदेन नहीं पर मात्र एक लेख लिखने के लिए गलत बात को आधार बनाना भी उचित नहीं.

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