लालू की ज़मानत याचिका खारिज…

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जेल में बंद बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के मुखिया लालू प्रसाद की चारा घोटाला से जुड़े एक मामले में जमानत याचिका आज झारखंड उच्च न्यायालय ने खारिज कर दी जिसके चलते उनके राजनीतिक भविष्य और उनकी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल की राजनीति पर लगा ग्रहण गहरा गया है.Lalu (1)

झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश आर आर प्रसाद की एकल पीठ ने आज जब लालू प्रसाद की जमानत याचिका खारिज की तो लालू के वकील और न्यायालय में उपस्थित उनके समर्थक अवाक रह गये.

इससे पूर्व इस मामले में कल अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो का और लालू प्रसाद के वकील सुरेन्द्र सिंह का पक्ष सुना था. न्यायालय ने इस मामले में लालू की जमानत याचिका पर फैसला सुनाने के लिए आज की तिथि निर्धारित की थी.की सजा यहां बिरसा मुंडा जेल में काट रहे हैं. विशेष सीबीआई न्यायाधीश प्रवास कुमार सिंह की अदालत ने लालू को यह सजा तीन अक्तूबर को सुनायी थी. इससे पूर्व उन्हें इस मामले में अदालत ने 30 सितंबर को ही दोषी करार देने के बाद जेल भेज दिया था.

झारखंड उच्च न्यायालय ने लालू की जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद आज कहा कि मामले में सीबीआई द्वारा जुटाये गये तथ्यों के मद्देनजर वह लालू यादव को फिलहाल जमानत दिये जाने के पक्ष में नहीं हैं.

न्यायालय ने यह भी कहा कि सीबीआई ने चारा घोटाले के इस मामले में लालू यादव के खिलाफ जो तथ्य एकत्रित किये हैं और जो साक्ष्य उनके खिलाफ प्रस्तुत किये गये हैं वह बहुत ही गंभीर और मजबूत हैं जिसे देखते हुए अभी इस मामले में उन्हें जमानत नहीं दी जा सकती है.

इसके अलावा न्यायालय ने जदयू सांसद जगदीश शर्मा के अधिवक्ता द्वारा उनकी सजा के खिलाफ पेश की गयी अपील और जमानत याचिका पर केंद्रीय जांच ब्यूरो को अपना प्रतिवाद (काउंटर एफिडेविट) पेश करने के निर्देश दिये. उनकी जमानत के मामले में सुनवाई के लिए न्यायालय ने 22 नवंबर की तिथि निर्धारित की.

सीबीआई की विशेष अदालत ने इस मामले में 30 सितंबर को कुल 45 लोगों को दोषी ठहराया था और आठ लोगों को तो उसी दिन तीन-तीन वर्ष की कैद की सजा सुना दी थी लेकिन लालू प्रसाद यादव, जगन्नाथ मिश्रा, जगदीश शर्मा और तीन आईएएस अधिकारियों समेत शेष 37 अभियुक्तों को उसने तीन अक्तूबर को चार से पांच वर्ष के सश्रम कारावास और डेढ़ करोड़ रुपये तक के जुर्माने की सजा सुनायी थी.

झारखंड उच्च न्यायालय के आज के फैसले से 66 वर्षीय लालू प्रसाद यादव के राजनीतिक जीवन पर लगा ग्रहण गहरा गया है और अब उनकी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के लिए गहन चिंतन का विषय यह हो गया है कि 2014 के लोकसभा चुनावों को लेकर उनकी पार्टी की तैयारियों का क्या होगा.

निचली अदालत के फैसले के बाद दो सप्ताह पूर्व ही लालू प्रसाद यादव और जदयू सांसद जगदीश शर्मा की संसद सदस्यता भी उच्चतम न्यायालय के जुलाई के उस फैसले के तहत छीन ली गयी है जिसमें उसने दो वर्ष से अधिक की सजा पाने वाले सांसदों और विधायकों की संसद या विधानसभा की सदस्यता तत्काल खत्म कर दिये जाने के आदेश दिये थे.

आज के इस फैसले से लालू प्रसाद यादव एवं उनकी राजद पार्टी को करारा झटका लगा है और अब यदि उन्हें उच्चतम न्यायालय से भी इस मामले में जमानत नहीं मिली तो 2014 के लोकसभा चुनावों में राजद फिलहाल नेतृत्व विहीन हो जायेगी जिसका न सिर्फ बिहार की राजनीति बल्कि देश की राजनीति पर भी दूरगामी प्रभाव पड़ने की आशंका है.

कोर्ट के फैसले के बाद यह तय हो गया है कि इस बार लालू की दीपावली और छठ जेल में ही बितेगी. फैसले के बाद राजद के समर्थकों ने कोर्ट परिसर के बाहर हंगामा शुरू कर दिया. हालांकि कोर्ट परिसर के बाहर इस तरह के हंगामा करने पर रोक है, लेकिन राजद समर्थक ऐसा कर रहे हैं.

चारा घोटाले के सजायाफ्ता पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद की ओर से दायर क्रिमिनल अपील याचिका पर बुधवार को झारखंड हाइकोर्ट में सुनवाई हुई. जस्टिस आरआर प्रसाद की अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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