आज खजाने और शोभन सरकार का सच सामने आ सकता है…

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तो क्या आज खजाने और शोभन सरकार का सच सामने आ सकता है? यह एक मौजू सवाल है, क्योंकि संत शोभन सरकार का दावा है कि 15 फीट के बाद खजाना मिलेगा. अब तक सोलह फीट तक खुदाई हो चुकी है. इसलिए आज मंगलवार को खुदाई का काम सबसे अहम होगा. हलांकि, अब तक एएसआइ व प्रशासन को खजाना मिलने का कोई प्रमाण हासिल नहीं हो सका. इसलिए अब सभी की निगाहें आज मंगलवार की खुदाई पर लगी हैं.109676

वहीं, सोमवार को संत शोभन सरकार के शिष्य स्वामी ओम जी ने कहा कि प्रशासन को काम में अब पारदर्शिता बरतनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अंदर जो सीसी कैमरे लगाए गए हैं. उनसे जोड़कर बाहर एलसीडी लगा दी जाये. जिससे लोग यह देख लें कि अंदर क्या चल रहा है.

राष्ट्रपति हस्तक्षेप कर निकलवाएं खजाना: शोभन सरकार

संत शोभन सरकार ने एक बार फिर अपील जारी की है. इसमें उन्होंने राष्ट्रपति से तत्काल हस्तक्षेप कर खजाना निकलवाने की मांग की गई. संत सरकार ने सोमवार को मीडिया को जो पत्र जारी किया उसमें हस्ताक्षर ओमबाबा के हैं. शोभन सरकार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह अपील इसलिए जारी करनी पड़ी क्योंकि अब बहुत सवाल उठने लगे हैं. उन्होंने दोहराया कि एएसआइ के मानक पर खोदाई करके समय और पैसा व्यर्थ में बरबाद किया जा रहा है. सेना लगाकर इस पूरे आपरेशन को 8 से 10 घंटे में पूरा किया जा सकता है. अपील में केंद्र व प्रदेश सरकार की नीयत पर भी सवाल उठाए गए हैं. उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं धनतेरस से पहले देश मालामाल हो जाये पर केंद्र व प्रदेश सरकार ऐसा नहीं चाह रहीं.

15 फीट तक पहुंची खोदाई :

खजाने की खोज में राजा राव रामबक्स सिंह के किले की खोदाई के दसवें दिन सोमवार को मिट्टी की सतह और टूटे खिलौनों के कुछ टुकड़े मिले. सोमवार को 1.45 मीटर खोदाई की गई. इस तरह अब तक कुल 4.8 मीटर तक खोदाई की जा चुकी है.

एसडीएम विजय शंकर दुबे ने काम बंद होने के बाद बताया कि आज 1.45 मीटर तक खोदाई का काम हुआ. कोई अवशेष नहीं मिल रहे. सामान्य जमीन वाली मिट्टी निकल रही है. वहीं संत शोभन सरकार ने सोमवार को किले के पास गंगा के अंदर करीब आधे घंटे तक पूजन अर्चन किया.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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