गाजी फ़क़ीर परिवार के वर्चस्व को मिलेगी चुनौती…

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-भाटी चन्दन सिंह||

सरहदी जिले जैसलमेर के पोकरण विधानसभा का गठन 2008 के चुनावों से पूर्व परिसीमन के दौरान हुआ. स्वतंत्र रूप से पहला चुनाव 2008 में हुआ. जिसमे कांग्रेस के उम्मीदवार सालेह मोहम्मद ने भाजपा प्रत्याशी शैतान सिंह को कुछ सौ मतों से पराजित कर पोकरण के प्रथम विधायक बनने का सुख हासिल किया. मतगणना के अंतिम राउंड में सालेह मोहम्मद ने भाजपा के शैतानसिंह को पोकरण निर्वाचन क्षेत्र में मात्र 339 मतों से हराकर जिले में पहली बार एक मुस्लिम विधायक बनने का गौरव हासिल किया. इस बार चुनावी रंगत में बदलाव नज़र आ रहा है. भाजपा और कांग्रेस अपने शक्तिशाली नेताओ के चुनाव प्रचार के लिए प्रारंभिक सभाएं कर चुके है, कांग्रेस के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और भाजपा के लिए वसुंधरा राजे चुनावी बिगुल की शुरुआत कर चुकी है.Pokaran

संसदीय चुनावों में पोकरण विधानसभा को जोधपुर संसदीय क्षेत्र का हिस्सा बनाने से लोगो को परेशानी हो रही है. परिसीमन के बाद पोकरण विधानसभा जैसलमेर बाड़मेर संसदीय क्षेत्र से हटा कर इसे जोधपुर में शामिल किया गया.

जातिगत समीकरण पोकरण विधानसभा में सेंतीस हज़ार राजपूत ,उनचालीस हज़ार मुस्लिम ,उनीस हज़ार अनुसूचित जाती बारह हज़ार अनुसूचित जन जाती तेरह हज़ार जाट विश्नोई चार चार हज़ार बाकी अन्य जातीय के वोट है. वैसे देखा जाये तो जातिगत आंकड़े कांग्रेस के पक्ष में है. मुस्लिम एस सी एस टी और जाट विश्नोई कांग्रेस के परम्परागत वोट रहे है.

गत जीत. . गत चुनावों में साले मोहम्मद कांग्रेस के गढ़ में महक तीन सौ उनचालीस मतों से ही चुनाव जीते ,इसका सीधा अर्थ है कांग्रेस के परंपरागत मतों में सेंधमारी हुई थी.

इस बार विधानसभा चुनावों में कांग्रेस भाजपा आमने सामने होगी. कांग्रेस सालेह मोहम्मद या अब्दुला फ़क़ीर को तो भाजपा शैतान सिंह को चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी में है

पिछले छह माह से बाड़मेर जिले के तारातरा मठ के स्वामी प्रताप पूरी पोकरण में सभाएं कर माहौल गर्माने में जुटे है. पहले उनके मन में कही पोकरण से चुनाव लड़ने का इरादा साफ़ नज़र आ रहा था, मगर उनके चुनाव लड़ने से पोकरण में हिन्दू मुस्लिम कार्ड चलना तय था, पोकरण राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का गढ़ है, शैतान सिंह संघ की पहली पसंद थे. जिसे भाजपा ने भी स्वीकार किया. गत चुनावों में भाजपा के धुरंधर नेताओ ने ही भाजपा को जीतने से रोका था. मगर अब पोकरण की गणित वसुंधरा राजे को समझ आ गयी, उन्होंने भाजपा के भीतरघात करने वाले धुरंधरो को हडकाते हुए पहले से ही चेता दिया. भाजपा के संभावित प्रत्याशी शैतान सिंह की साफ़ छवि उनके लिए सहायक सिद्ध हो सकती है, हार के बावजूद पांच साल लोगो के बीच रहे. उन पर गुटबाजी का भी कोई आरोप नहीं है.

भाजपा पोकरण सीट जीतने के लिए विशेष प्रयास कर रही है. अल्पसंख्यक वर्ग में कायाम्दीन कोटवाल भाजपा के लिए सारथि साबित हो सकते है.

कांग्रेस गाजी फ़क़ीर प्रकरण से परेशां. … पोकरण विधायक सालेह मोहम्मद पर जिला पुलिस राष्ट्र द्रोह के संगीन आरोप जड़ चुके हैं. जिसमे पाकिस्तान नागरिक को विधायक द्वारा पनाह देना, पुलिस कर्मियों के साथ मारपीट के आलावा उनके पिता गाजी फ़क़ीर की बंद हिस्ट्रीशीट वापस खुलना घातक साबित हो सकता है. इस प्रकरण से विधायक परिवार को नुकसान होता है या फायदा मिलता है, देखने वाली बात है. हाल ही में गाजी प्रकरण की जांच पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने रिपोर्ट तलब की है. फ़क़ीर परिवार के सबसे छोटे पुत्र के भ्रष्टाचार के कारनामों की गूंज राष्ट्रीय चैनलों तक जा पहुंची है. जैसलमेर और पोकरण की सरकारी योजनाओ के सारे काम इनके या या इनके समर्थको की फार्म को दिए गए है. सरकारी योजनाओ के काम गाँवों में हो नहीं रहे मगर फर्जी उपयोगिता प्रमाण पत्रों के जरिये करोडो रुपयों का फर्जी भुगतान उठाया गया है. यह सब पोकरण की जनता की जेहन में है.

पांच साल की उपलब्धिया. .
साले मोहम्मद के पांच साल के कार्यकाल की पोकरण के लिए कोई खास उपलब्धि नहीं रही उनका सारा ध्यान जैसलमेर विधानसभा में रहा. विधायक कोष का पैसा जरुर पोकरण में लगा. मगर योजनाओं की जिस कदर वर्ग विशेष के खास लोगो में बंदरबांट की गयी उससे जनता जरुर खफा है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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