तो राहुल गाँधी ने नरेन्द्र मोदी की काट निकाल ली…

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-अनुराग मिश्र||

पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस युवराज राहुल गाँधी अपने अनर्गल बयानों के चलते सोशल साइट्स पर चर्चा का विषय बने हुए है. कभी वो फ़ूड सुरक्षा बिल पर अपनी माँ के दर्द को बयान करते है तो कभी अपनी दादी और पिता की शहादत को याद दिलाते है. राहुल गाँधी के इन बयानों का सोशल साइट्स पर जमकर मजाक उड़ाया जा रहा है.rahul-namo

पर यक्ष प्रश्न ये है कि राहुल गाँधी ऐसे बयां सार्वजनिक मंचो से क्यों दे रहे है जिनका मौजूदा राजनैतिक माहौल में कोई विशेष महत्व नहीं है ?  वस्तुतः ऐसे बयान कांग्रेस युवराज की एक विशेष रणनीत का हिस्सा है जिसके तहत वो भाजपा के फायर ब्रांड नेता और पीएम इन वोटिंग नरेन्द्र मोदी के बढ़ते प्रभाव को काम करने में लगे हुए है.

अब सवाल ये उठता है कि आखिर अनर्गल बयानबाजी करके राहुल गाँधी किस तरह भाजपा के फायर ब्रांड नेता और पीएम इन वोटिंग नरेन्द्र मोदी के बढ़ते प्रभाव को कम कर पाएंगे. राहुल गाँधी की इस रणनीत को बेहतर रूप से समझने के लिए हमें नरेन्द्र के आज के दौर में बढ़ते प्रभाव के अतीत में जाना होगा.

नरेन्द्र मोदी जो गुजरात दंगो से पहले एक साधारण नाम था जिसकी राष्ट्रीय फ़लक पर कोई विशेष पहचान नहीं थी वो गुजरात दंगो के बाद एका एक राष्ट्रीय फलक एक नाम बन गया क्यों क्योकि नरेन्द्र मोदी को सोशल साइटों पर जमकर समर्थन मिला. नरेन्द्र मोदी सोशल साइटों पर चर्चा का एक विषय बन गए. नतीजन कुछ उनके पक्ष में तो कुछ उनके विपक्ष में खड़े हुए. पर चर्चा का केंद्र बिंदु नरेन्द्र मोदी ही रहे. जिसका परिणाम ये रहा कि धीरे धीरे ही सही पर नरेन्द्र मोदी ने सोशल साइट्स पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली और इसी के दम पर 2014 के लोकसभा चुनावो के लिए भाजपा में प्रधानमंत्री पद की दावेदारी ठोक दी जिसे भाजपा ने अपने शीर्ष नेतृत्व को नकार कर भी स्वीकार किया.

अब कांग्रेस युवराज राहुल गाँधी भी नरेन्द्र मोदी के ही नक़्शे कदम पर चल रहे है. राहुल इस बात को अच्छी तरीके से समझ रहे है कि अगर नरेन्द्र मोदी के बढ़ते प्रभाव को कम करना है तो सोशल साइट्स पर किसी न किसी रूप चर्चा का विषय बनना होगा.

चूँकि राहुल गाँधी सत्ता में है और सत्ता की ये विशेष कमी होती है कि ये समय के साथ अराजकता और विरोधियों को पैदा करती है, लिहाजा राहुल इस समय अपनी सरकार के कामो की तारीफ के बजाय अनर्गल बयानबाजी करना ज्यादा उचित समझ रहे है. उन्हें पता है कि विरोध के इस माहौल में सरकार की तारीफ करना घातक होगा. वो लगातार ऐसी बयानबाजी कर रहे जिनका राजनीतिक रूप से तो कोई विशेष अर्थ नहीं निकलता पर वो बयान सोशल साइटों पर चर्चा का विषय जरुर बनते है. राहुल जानते है कि अगर नरेन्द्र मोदी के प्रभाव को कम करना है तो सोशल साइटों पर चर्चा का विषय बना पड़ेगा. अपने इस अभियान में राहुल धीरे धीरे ही सही सफल हो रहे है वो लगातार सोशल साइटों पर चर्चा का विषय बन रहे है.

ये बात अलग है कि इस समय सोशल साइटों पर उनकी नकारात्मक छवि ज्यादा चर्चा का विषय है लगातार उनके बयानों के लेकर उनका मजाक उड़ाया जा रहा है. पर कहा जाता है कि कोई भी व्यक्ति प्रसिद्ध दो ही तरीके से पता है या तो नकारात्मक रूप से या सकरात्मक रूप से. पर दोनों ही परिस्थितयों में उसका प्रभाव क्षेत्र बढ़ता रहता है लिहाजा धीरे धीरे ही सही पर राहुल गाँधी नरेन्द्र मोदी की काट निकाल रहे हैं.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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3 thoughts on “तो राहुल गाँधी ने नरेन्द्र मोदी की काट निकाल ली…

  1. rahul gandhi ..yadi ..appni dadi our pita ..ki shadat ka zikra kar ahe he to ise anargal ..kyo kaha ja sakta he….rahul ne appne dard..ko vartman ..me ho rahe prayozit.dango me peedito ke dard se jod ,ker ullekh kiya he……our ha jiske pas ..kahne ko itihass wahi kahega na…….zinke pas itihass hi nahi he woo to ….sardar patell ko hi appni baldiyat bataengena

  2. कोंग्रेस के शासन काल में १९४७ देश विभाजन [भारत] कि हटिया के बाद लगातार लगभग सभी राजियो में डण्डे दन्गे हुए ७०००० केवल हिन्दू मारे गए तब कोई कोंग्रेसी नहीं रोया ४००००० कश्मीरी पंडित मारे गए बांगदेष कि लड़ाई में २०००० हिन्दू ही मारे गए तब कोई कोंग्रेसी नहीं रोया ५०००० से अधिक हिन्दू उत्तराखंड में मारा गया तब कोई कोंग्रेसी नहीं रोया वरुणगांधी के पिता // दादी भी मरी किसी के रोने कि आवाज़ नहीं आये माधब रो जी कि भी हटिया कि गए तो भी कोई नहीं रोया ८००० शिखा मारे गए तो कोई कोंग्रेसी नहीं रोया कइयो कियो कियो नहीं रोया ” केवल रॉयल विन्ची [राहुलगान्दी] कि दादी पापा जी पर ही कियो र्ण आया किया बात है किस ने मारा कइयो मारा ईएस कि जांचा हुयी थी ”रिपोर्ट” कामना है सब के सामने आजाये ईएनई कोंग्रेसियो ने जाँच रिपोर्ट सामने नहीं आने दी राहुल जी ईएस के लिए आप रोते तो ठीक लगत आप जोर से रोईये कि जाँच रिपोर्ट बता यो तो आप का रोना थी क लगेगा

    ke

  3. लेख सीरियस है या सटायर.. तय नहीं कर पा रहा हूँ.. अगर सीरियस है तो लेखक का बौद्धिक स्तर राहुल गाँधी के बराबर ही लग रहा है।

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