चौदह वर्षीया नाबालिग की अस्मत का मूल्य पांच लाख, चुकायेगें किश्तों में…

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मुजफ्फरनगर, अपने तालिबानी  फरमानों के लिए बदनाम पश्चिमी उत्तरप्रदेश की धरती एक बार फिर कलंकित हुई है. एक 14 वर्षीय छात्रा को हवस का शिकार बनाने वाले पांच आरोपियों पर पांच लाख रुपये आर्थिक दंड लगाकर खांप पंचायत ने अपना ‘फर्ज’ पूरा कर लिया. अस्मत को पैसे की तराजू में तोलने का यह नाटक हुआ चरथावल क्षेत्र के एक गांव में. पुलिस ने भी पूरा खेल दिखाते हुए इस मामले में हिरासत में लिए दो आरोपी छोड़ दिए. दबंगों की ‘अदालत’ का यह फैसला पीड़ित परिवार ने चाहे जैसे स्वीकारा हो, लेकिन उनकी आत्मा पर इस ‘सौदे’ का बोझ ताउम्र रहेगा.दुष्कर्म

थाना क्षेत्र के एक गांव में कक्षा आठ में पढ़ने वाली 14 वर्षीय छात्रा ने पांच युवकों पर दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए सनसनी फैला दी थी. छात्रा की तरफ से थाने में तहरीर दी गई थी. तहरीर के आधार पर पुलिस ने दो युवकों को गुरुवार को ही हिरासत में ले लिया था, लेकिन बाद में इन्हें छोड़ दिया गया. बात आगे बढ़ने लगी तो गुरुवार देर रात तक इस मामले को लेकर गांव में पंचायत चली. शुक्रवार को भी इसे लेकर गहमागहमी का माहौल बना रहा. पंचायत में आरोपियों को तरह-तरह से दंडित करने के लिए व्याख्यान दिए गये. पंचों ने पीड़ित परिवार को तमाम ऊंच-नीच का वास्ता देते हुए आरोपियों को बचाने के लिए हर हथकंडा अपनाया.

आरोपी नहीं पहुंचे पंचायत में

पंचायत में एक भी आरोपी नहीं पहुंचा. इसके बाद पंचायत में मौजूद लोगों ने आरोपियों को आर्थिक दंड के रुप में पांच लाख रुपये किशोरी पक्ष को देने का फैसला सुनाया.

इज्जत की ‘किश्तें’

पंचायत इज्जत की ‘किश्तें’ करने से भी नहीं चूकी. पंचायत के इस फैसले से हालांकि आरोपियों के परिजन खुश नहीं थे, लेकिन बाद में इस बात पर सहमति बनी कि प्रत्येक आरोपी के परिवार वाले 20-20 हजार रुपये अब देंगे और बाकी रकम बाद में इंतजाम करके अदा करनी होगी. हालांकि कुछ ग्रामीण भी पंचायत के इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं. यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है.

सीओ बोले, जानकारी नहीं

घटना की जानकारी सीओ सदर कर्मवीर सिंह को नहीं है. सीओ बताते हैं कि हत्या की जांच करने के कारण जानकारी नहीं है.

पुलिस ने तो नहीं कर दिया खेल

लगता है इस मामले में पुलिस ने खेल कर दिया. ग्रामीण कहते हैं कि दो आरोपियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था. इसके बाद ही पंचायत हुई. पंचायत के बाद ही पुलिस का सुर बदल गया. पुलिस की मिलीभगत से इज्जत का सौदा सहज हो गया.

सूचना पर पुलिस भेज दी गई थी, लेकिन बाद में मामूली झगड़ा होने की जानकारी मिली. उन्हें किसी ने घटना की तहरीर नहीं दी है.

कमल सिंह यादव, थाना प्रभारी निरीक्षक, चरथावल

ऐसी किसी भी घटना की जानकारी नहीं है. जब तहरीर ही नहीं आएगी तो कार्रवाई कैसे होगी. तहरीर आते ही सख्त कार्रवाई होगी.

-हरिनारायण सिंह, एसएसपी मुजफ्फरनगर.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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