फर्ज़ी शिक्षा बोर्ड के ज़रिये स्कूलों को बेच रहे थे मान्यता…

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संभल. यूपी एसटीएफ ने एक ऐसे गिरोह को पकड़ा है जो बाकायदा फर्जी बोर्ड चला रहा था. ये नेटवर्क देश के लगभग सभी राज्यों में फैला हुआ था. यूपी एसटीएफ ने यूपी के संभल में फर्जी बोर्ड के मास्टरमाइंड के घर छापेमारी करके इस मामले का खुलासा किया.20-oct-farji

पुलिस के मुताबिक आरोपी स्कूलों को समानांतर बोर्ड की मान्यता बांटते थे और फिर छात्रों को दसवीं और 12वीं की परीक्षा दिलवाते थे. हालांकि इस गिरोह का मास्टर माइंड विपिन पुलिस की गिरफ्त से बच निकलने में कामयाब रहा. उसके भाई को गिरफ्तार कर लिया गया है जो इस धंधे में शामिल था. पुलिस ने इस मामले में कुल 15 लोगों को गिरफ्तार किया है और इन लोगों की निशानदेही पर देश भर में छापेमारी जारी है.

छापे में पुलिस को पता चला कि सौ से ज्यादा स्कूलों को इन्होंने मान्यता दे रखी थी और यूपी, एमपी, उत्तराखंड सहित 22 राज्यों में इनका नेटवर्क फैला हुआ था. यह गिरोह लाखों छात्र-छात्राओं से मोटी रकम लेकर 10वीं और 12वीं की फर्जी मार्कशीट और प्रमाणपत्र बनाता था.

एसटीएफ के सूत्रों ने बताया कि मिल रही सूचनाओं के आधार पर कासगंज में छह, संभल में तीन और गाजियाबाद में छह लोगों को गिरफ्तार किया है. यह गिरोह माध्यमिक शिक्षा परिषद, मध्य भारत, ग्वालियर, मध्य प्रदेश के नाम से फर्जी शिक्षा बोर्ड गठित करके मार्कशीट और प्रमाणपत्र के नाम पर लाखों छात्र-छात्राओं को ठग चुका है.

तफ्तीश के दौरान इस बोर्ड के बारे में जानकारी मिली कि कासगंज में गंगादयाल शाक्य, गाजियाबाद में डॉक्टर महेश चंद्रवंशी और संभल में विपिन शर्मा नामक व्यक्ति यह गिरोह चला रहे हैं और उनका मुख्यालय मध्य प्रदेश के ग्वालियर में है, जबकि कथित बोर्ड का संचालन कासगंज से किया जा रहा है. इनमें से विपिन शर्मा अपने नए बोर्ड के गठन की तैयारी कर रहा है.

सूत्रों के मुताबिक एसटीएफ ने शाक्य, चंद्रवंशी और शर्मा समेत गिरोह के 15 लोगों को गिरफ्तार करके उनके कब्जे से ढ़ाई हजार, सैकड़ों जाली प्रमाणपत्र, जाली दस्तावेज बनाने वाले उपकरणों का जखीरा, मुहरें, विभिन्न संस्थानों के जाली गजट, अखिल भारतीय चिकित्सा परिषद और विवेकानंद मिशन यूनिवर्सिटी के मेडिकल कोर्स के प्रमाणपत्र इत्यादि बरामद किए हैं.

उन्होंने बताया कि इस गिरोह में देश के 22 राज्यों में सैकड़ों स्कूलों को फर्जी तरीके से मान्यता प्रदान करके भी करोड़ों की कमाई की. उनके खिलाफ गैंगेस्टर कानून के तहत कार्रवाई और पूछताछ की जा रही है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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