पाकिस्तान के समक्ष निरंतर घुटने टेक रही भारत सरकार…

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 पिछले दिनों पाकिस्तान के सन्दर्भ में दो घटनाएं हुई, इन घटनाओं के विषय में भारतीय जनमानस ठीक वैसी ही अपेक्षा कर रहा था जिस रूप में ये घटनाएं हुई है. घटना न. एक हमारें भारतीय प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंग न्यूयार्क में पाकिस्तानी प्रधानमन्त्री नवाज शरीफ से मिलनें की तैयारी कर रहे थे और बाद में मिलें भी और घटना न. दो सदा की तरह धोखा और फरेब करते हुए पाकिस्तानी सेना ने भारतीय क्षेत्र में सैन्य अभियान चलाते हुए केरन सेक्टर में घुसपैठ की और भारतीय इलाकों पर कब्जें का प्रयास किया. हमारें भारतीय मानस को तो लगता है कि पाकिस्तान की नियत पर कोई शंका रह ही नहीं गई है और वह इन घटनाओं के हो जानें पर बिलकुल भी हैरान नहीं होता है किन्तु परेशान अवश्य होता है.cross-border-firing

भारतीय जनमानस परेशान होनें के साथ साथ दुखी भी अवश्य होता है क्योंकि जिस प्रकार पाकिस्तानी नेतृत्व सतत-निरंतर हमारें शासनाध्यक्षों को अपनें हसींन किंतु पैने और खंजरदार पैतरों में उलझा कर वार कर देता है उससे एक राष्ट्र के रूप में हमारी प्रतिष्ठा, संपत्ति और नागरिक जीवन तीनों की ही हानि होती है और तब हम बिना कोई प्रतिकार या प्रतिशोध किये हुए चुप ही रहते हैं. अब पाकिस्तान के विरुद्ध एक सार्वभौम राष्ट्र के रूप में हमारें सशक्त, मुखर और क्रियाशील मोर्चे का अभाव और अधिक खल रहा है जबकि हमारें थल सेनाध्यक्ष विक्रम सिंह ने स्पष्ट बयान दे दिया है कि पाकिस्तानी सेना की मदद से पाकिस्तानी भू-भाग में ४२ आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर चलाये जानें के पुख्ता प्रमाण उनकें पास हैं. जनरल सिंह ने यह भी कहा है कि पाकिस्तानी शासन और सेना की भाषा अलग अलग है और पाकिस्तानी सेना की जवाबदेही उनकें अपनें देश के शासन के प्रति कुछ कम और संवाद विहीन नजर आती है. पाक सेना और शासन के बीच के इस बारीक अंतर का पाक समय समय पर लाभ भी लेता रहा है और तब भी हमारी चुप्पी और देख लेंगे का घटक आचरण ही हमें नुक्सान पहुंचाता रहा है.

केरन के हमलें के बाद तो हद ही हो गई जब पाकिस्तान ने पिछले सप्ताह एक दिन में तीसरी बार संघर्ष विराम का उल्लंघन करते हुए जम्मू कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा पर मोर्टार दागे और गोलीबारी करके अपनी खुर्राट विदेश नीति का परिचय हथियारों से दिया और पाकिस्तानी सैनिकों ने पुंछ में नियंत्रण रेखा के पास मेंढर एवं भीमभेरगली-बालकोट सब सेक्टर में आतंक फैला दिया. पाकिस्तानी सेना के इन अकारण हमलों की घटनाओं की निरंतरता बढ़ते जाना पुरे देश के लिए दुःख और चिंता का विषय है किन्तु केंद्र की सप्रंग सरकार का इन घटनाओं पर मौन रखना या यथोचित, समयोचित और वीरोचित जवाब न दिया जाना समझ से परे है. इस साल जम्मू कश्मीर में पाकिस्तानी सैनिकों ने नियंत्रण रेखा के पास 127 बार संघर्षविराम का उल्लंघन किया, जो पिछले आठ साल में सबसे अधिक है और भारत में किसी भी केंद्र सरकार का इतना चुप और सहन शील होना भी इतिहास में पहली बार ही देखनें में आ रहा है.

पिछलें वर्ष भर में पाकिस्तानी सेना द्वारा भारतीय सेना के साथ निरंतर किये गए धोखे और फरेब की घटनाओं और हमारें पांच सैनिकों को रात्रि समय में गश्त के दौरान मारनें और हमारें दो सैनिकों के गले काटकर उनके शव बिना सर भारत भेजनें आदि घटनाओं के बाद हमारें भारत की केंद्र सरकार कोई भी पुख्ता, ठोस और परिस्थिति जन्य जवाब नहीं दे पाई थी और देश में हमारी केंद्र सरकार की इस बात को ललकार आलोचना हो रही थी तब न्यूयार्क में अन्तराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान भारतीय प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंग और पाकिस्तानी प्रधानमन्त्री नवाज शरीफ मिलेंगे भी या नहीं इस बात पर विचार विमर्श हो रहा था. स्वाभाविक ही था कि भारतीय विदेश बिभाग के राजनयिक इस बात की समीक्षा करते कि पाकिस्तान द्वारा निरंतर पीठ में छुरे भोकने की घटनाओं के बाद अब हमारी रणनीति क्या होना चाहिए? किन्तु जैसी कि आशा थी वैसा ही हुआ और भारतीय प्रधानमन्त्री बिना किसी अंतर्राष्ट्रीय मान मनौवल या पाकिस्तानी आग्रह के पाकिस्तानी प्रधानमन्त्री से मिलनें को तैयार हो गए और चर्चा में किसी भी प्रकार से पाकिस्तान पर हावी नहीं हो पाए. आशा के विपरीत हमारें मनमोहन सिंग पिछले एक वर्ष में पाकिस्तान द्वारा लगातार भारत के विरुद्ध की गई दस गलतियों और धृष्टता के विषय में न तो कोई विरोध जन्य वातावरण नहीं बना पाए और न ही अन्तराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष अपनी चिंताओं को व्यवस्थित शब्द और भाषा दे पाए.

इस लुंज पुंज और टाल मटोल वालें नेतृत्व का ही परिणाम है कि एक बार फिर भारतीय सेना को 24 सितंबर को केरन सेक्टर के शालभाटी गांव में पाकिस्तानी घुसपैठ के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाना पड़ा. यह अभियान इस बात की जानकारी के बाद शुरू किया गया कि 30 से 40 आतंकवादियों का एक समूह घाटी में घुसपैठ करने का प्रयास कर रहा है.
यह अभियान नियंत्रण रेखा के करीब व्यापक क्षेत्र में चलाया गया. इस अभियान में सेना ने कहा था कि शालभाटी गांव में 10-12 आतंकवादियों के मारे जाने की संभावना है लेकिन उनके शव बरामद नहीं हो पाए हैं, क्योंकि बचे हुए आतंकवादियों के खिलाफ अभियान जारी है, गोलीबारी में पांच सैनिक घायल हुए हैं. इस अभियान के दौरान उड़ी इस खबर को भी सेना ने गलत बताया है कि घुसपैठियों ने हमारी कुछ चौकियों पर कब्जा कर लिया है; उसने कहा कि अभियान पूरी तरह से सेना के नियंत्रण में है. जम्मू-कश्मीर के केरन सेक्टर में पाकिस्तान की तरफ से हुई घुसपैठ पर भारतीय सेना ने पूरी तरह काबू कर लिया है.

जनरल बिक्रम सिंह ने इस समाप्त हो चुके अभियान के विषय में कहा कि केरन में चल रहा सेना का ऑपरेशन अब खत्म हो चुका है, इस ऑपरेशन में उन्होंने सेना को पूरी तरह कामयाब बताया. घुसपैठ की इस कोशिश में पाकिस्तान के हाथ होने के बारे में उन्होंने कहा, ‘नियंत्रण रेखा पर दोनों सेनाएं बिल्कुल आमने-सामने हैं. आतंकवादियों के लिए यहां पाकिस्तानी सेना की जानकारी के बिना कोई गतिविधि करना नामुमकिन है और यह घुसपैठ निश्चित ही पाकिस्तानी सेना की देखरेख और सरंक्षण में ही हो रही थी. उन्होंने यह भी बताया कि केरन के रास्तें घुसपैठियों को दाखिल करवाने के लिए पाकिस्तानी सेना ने कवर फायरिंग भी की थी.

भारत पाकिस्तान सीमा का गांव है शाला-भाटा. यह आधा गांव पाकिस्तान में है और आधा भारत में. सेना के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में उंचाई पर मौजूद शाला भाटा गांव में 23 सितंबर को करीब 50 की संख्या में पाकिस्तानी सेना की बैट के जवान और आतंकवादी शाला-भाटा गांव में घुसे. इस गांव में कुल 77 घर हैं जिसमें से 40 घर पाकिस्तान की सीमा में आते हैं; जबकि 37 घर भारतीय सीमा में. इस गाँव के घरों में पाकिस्तानी घुसपैठिये घुसे और घरों को ही अपनी बैरक बना लिया था. पाकिस्तानियों ने इलाके की गुफाओं और जमीन में गड्ढे बनाकर बंकर भी बना लिये थे और वहीं से भारतीय सेना से मुकाबला कर रहे थे.

लगातार पंद्रह दिनों तक चले इस सैन्य अभियान में 268 और 68 माउंटेन ब्रिगेड लगी हुई थी और  यूएवी से लगातार सर्विलांस कर इसमें हेलीकॉप्टर बेड़े की भी मदद ली गई थी. हर बार की विपरीत इस बार पाकिस्तानी 50 घुसपैठियों ने शाला भाटागाँव में पक्की मोर्चेबंदी भी कर ली थी भारतीय सेना का स्पष्ट मानना है कि पाकिस्तानी सेना की सक्रिय भूमिका के बिना इतने बड़े पैमाने में बिना पाकिस्तानी फौज की मदद के घुसपैठ हो ही सकती थी!! हालांकि पाकिस्तानी फौज ने घुसपैठ में अपना हाथ होने से इंकार किया है, लेकिन सेना ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि घुसपैठ में पाकिस्तान की बार्डर एक्शन टीम शामिल है और  इसलिए इसे करगिल-2 की तैयारी भी माना जा सकता है. पाकिस्तान ने यह वातावरण तब बनाया जब कि ये वो समय था जब न्यूयार्क में पाकिस्तानी नवाज और भारतीय प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंग के मिलनें और चर्चा के विषय तय हो रहे थे. स्पष्ट है कि पाकिस्तानी नियत में शुरू से खोट रहा है और वह आज भी है किन्तु लाख टके का सवाल यह है कि हम इस नियत को पहचान कर भी हर बार ठगे क्यों जाते हैं??

भारतीय सरकार पाकिस्तान के इन लगातार हमलों, घुसपैठों और आतंकी हमलों के विरूद्ध जिस प्रकार चुप्पी का वातावरण बनायें हुए है और बार बार के हमलों के बाद केवल बोलकर चुप रह जानें का अभ्यास करती रह रही है उससे न केवल भारतीय सेना के हौसलें कमजोर पड़ रहें हैं बल्कि भारतीय जनमानस भी अपनें आपको आहत, दुखी और परेशान महसूस कर रहा है.

 

 

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praveen gugnani

म.प्र. के आदिवासी बहुल जिले बैतुल में निवास. "दैनिक मत" समाचार पत्र के प्रधान संपादक. समसामयिक विषयों पर निरंतर लेखन. प्रयोगधर्मी कविता लेखन में सक्रिय .
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  1. मोदी को विदेश निति का ज्ञान न होने का तगमा देने वाली सरकार की यह सशक्त विदेश निति की बानगी है हम रोजाना पाक से मुहं की खा रहे हैं,सरकार प्रतिदिन वार्ता की बात कह देश की मुश्किलें बाधा रही है, गत दिनों शाला भाता में पंद्रह दिन तक हुए लड़ाई इस बात का सबूत है की यदि कभी लड़ाई हुई तो भारत को बहुत महँगी पड़ेगी.

  2. मोदी को विदेश निति का ज्ञान न होने का तगमा देने वाली सरकार की यह सशक्त विदेश निति की बानगी है हम रोजाना पाक से मुहं की खा रहे हैं,सरकार प्रतिदिन वार्ता की बात कह देश की मुश्किलें बाधा रही है, गत दिनों शाला भाता में पंद्रह दिन तक हुए लड़ाई इस बात का सबूत है की यदि कभी लड़ाई हुई तो भारत को बहुत महँगी पड़ेगी.

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