भगदड़ के दौरान पुलिस वाले लूट रहे थे गहने…

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रतनगढ़ मंदिर के निकट भगदड़ के मामले में मध्य प्रदेश सरकार ने देर रात दतिया के जिलाधिकारी के अलावा तीन वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया.

इस हादसे में 116 श्रद्धालुओं की जान गई है और बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए हैं. यह निर्णय चुनाव आयोग की मंजूरी लेने के बाद लिया गया है क्योंकि राज्य में विधानसभा चुनावों की घोषणा के बाद से ही आचार संहिता लागू है. INDIA-ACCIDENT-STAMPEDE

दतिया के जिलाधिकारी संकेत भोंदवें, पुलिस अधीक्षक सीएस सोलंकी, एसडीएम महिप तेजस्वी और एसडीओपी बीएन बसावे को निलंबित किया गया है.

राज्य सरकार ने आज दिन में राज्य चुनाव आयोग से सिफारिश की थी कि वह दतिया के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, सब डिविजनल मजिस्ट्रेट, सब डिविजनल पुलिस अधिकारी और सेवधा पुलिस थाने के पूरे स्टाफ को इस घटना के संबंध में निलंबित कर दे.

चूंकि जिलाधिकारी जिला निर्वाचन अधिकारी भी हैं इसलिए राज्य सरकार मध्यप्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के साथ संपर्क में थी. उसने दूसरे अधिकारी का नाम सुझाया था और चुनाव आयोग ने रघुराज के नाम को मंजूरी दे दी है. चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया कि आरके मराठे दतिया के नए पुलिस अधीक्षक होंगे.

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और अन्य अधिकारियों को निलंबित करने का निर्णय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के दतिया दौरे के बाद लिया गया. मुख्यमंत्री कल हुए इस हादसे का जायजा लेने के लिए दतिया गए थे.

मुख्यमंत्री ने स्थिति का जायजा लेने के बाद इस भगदड़ के लिए प्राथमिक रुप से इन अधिकारियों को जिम्मेदार पाया. राज्य में अगले महीने विधानसभा चुनाव होने हैं.

इस घटना की जांच के लिए एक जाँच आयोग बना दिया है जिसकी रिपोर्ट करीब दो महीने में आनी है और उसके 15 दिन बाद कार्रवाई की जानी है. चौहान घटनास्थल पर जाना चाहते थे लेकिन चुनाव आयोग की अनुमति नहीं मिलने के कारण वह वहां नहीं जा सके.

वहीँ, लोगों ने कहा है कि खाकी कपड़े पहने हुए लोगों ने (पुलिस?) जीवित घायलों और मृतकों के जेवर और अन्य मूल्यवान सामान आदि छीन लिए, महिलाओं की बालियाँ, पायल, मंगलसूत्र उतार लिए, जीवितों को पुल से उठा कर नदी में फेंक दिया था जिनमें बच्चे भी थे.

केंद्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी सोमवार को रतनगढ़ का दौरा किया और पीड़ितों से मुलाकात की. उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का नाम लिए बगैर कहा है कि भगवान के नाम पर राजनीति करने वालों ने ही 300 लोगों को भगवान के पास पहुंचा दिया है, जबकि प्रशासन ने सिर्फ 109 लोगों की ही मौत का आंकड़ा दिया है.

राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हादसे के दूसरे दिन मंगलवार को दतिया जिला चिकित्सालय पहुंचकर रतनगढ़ मरीजों का हाल जाना. उन्होंने संवाददाताओं से चर्चा करते हुए कहा कि सरकार पीड़ितों के साथ है. चुनाव आचार संहिता के चलते अपनी लाचारी का हवाला देते हुए कहा कि मृतकों के परिजनों को निर्वाचन आयोग की अनुमति से प्राकृतिक आपदा प्रभावितों की तरह ही डेढ़ लाख का मुआवजा दिया गया है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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2 thoughts on “भगदड़ के दौरान पुलिस वाले लूट रहे थे गहने…

  1. pahli bat yah hia kia pulias ma achha buary sbhia hia bdia apsoas kia bat hia kia koiy mar rha hia koia luat rha hia yah kysa loga hia kia biana biachary kam krtya hia loagoa ka bary miy nhia sochty sriaf apnya bary ma sochaty hia loag esliy prya san hia sbhia loga

  2. सिंधिया जी के सामान्य ज्ञान के लिए …नास्तिक धर्मनिरपेक्षता के कारण कांग्रेस और उसकी उत्तराखंड सरकार ने ३००० लोगो को भगवान के पास भेज दिया वो भी जनता को बता दिया होता……एक केन्द्रीय मंत्री द्वारा मानवीय त्रासदी पर राजनीती की घोर निंदा की जानी चाहिए.

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