चक्रवाती तूफ़ान फैलिन के बारे में दस तथ्य…

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चक्रवाती तूफ़ान फेलिन तेजी से ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों की तरफ बढ़ रहा है. आज शाम छह बजे इस चक्रवाती तूफ़ान के ओडिशा और आंध्र प्रदेश के समुद्री तटों से टकराने की संभावना है. क्या आप जानते हैं इसे यह नाम किसने दिया और इसका मतलब क्या होता है. आइए आपको बताते हैं फेलिन के बारे में दस बातें जो आप नहीं जानते.phailin1

1. इसे थाईलैंड ने साइक्लोन फेलिन नाम दिया है.

2. फेलिन नाम उसे एक कीमती पत्थर ‘सफायर’ के नाम पर मिला है जिसे हिंदी में नीलम कहते हैं.

3. 4 अक्टूबर 2013 को जापानी मैट्रोलॉजिकल एजेंसी की नज़र सबसे पहले इस पर पड़ी. थाईलैंड की खाड़ी में हो ची मिन्ह सिटी से लगभग 400 किमी दूर यह ट्रॉपिकल डिप्रेशन नजर आया.

4. कुछ ही दिनों के भीतर यह अंडमान सागर पर देखा गया. इंडियन मैट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट ने 8 अक्टूबर से इस पर नजर रखनी शुरू की और नाम दिया डिप्रेशन बीओबी 04.

5. युनाइटेड स्टेट्स ज्वाइंट टायफून वार्निंग सेंटर ने इसे अगले कुछ दिनों के भीतर मजबूत होता देखकर इसका दर्जा बढ़ा दिया और नाम दिया ट्रॉपिकल साइक्लो्न 0बी. साथ ही उसने एडवाइजरी भी जारी कर दी.

6. बंगाल की खाड़ी में एंट्री से पहले यह थोड़ा कमजोर हुआ और अंडमान आईलैंड स्थित मायाबंदर के पास से गुजरा.

7. बंगाल की खाड़ी में पहुंचने के बाद इसने खुद को रिऑर्गनाइज किया. इस पर नजर रख रहे इंडियन मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट ने सूचना दी कि अब यह एक साइक्लोनिक स्टॉर्म (चक्रवाती तूफान) का रूप ले चुका है और इसका फेलिन होने की घोषणा की.

8. नाम मिलने के कुछ घंटे के भीतर ही 10 अक्टूबर को सफीर-सिंपसन स्केल हरीकेन विंड स्केल पर इसे कैटेगरी 1 हरीकेन होने का दर्जा भी मिल गया.

9. 11 अक्टूबर को फेलिन की तीव्रता इस स्केल पर कैटेगरी 4 हरीकेन मापी गई. इतना ही नहीं हवाओं ने भी आंख के आकार का रूप ले लिया.

10. इसके 12 अक्टूबर की शाम को भारत के पूर्वी समुद्री तटों को छूने की आशंका है. ओडिशा और आंध्र प्रदेश में इस तूफान की वजह से होने वाली तबाही की आशंका के चलते बचाव और राहत एजेंसियों को अलर्ट रहने के आदेश दिए गए हैं.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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