हर दल में हावी हैं दागी और अपराधिक छवि वाले नेता…

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नेशनल इलेक्शन वॉच ने किया सर्वे की रिपोर्ट में खुलासा..कांग्रेस के 31, भाजपा के 22 एवं बसपा के 21 प्रतिशत नेताओं के नाम…

-डा.लक्ष्मीनारायण वैष्णव||

भोपाल, देश के पांच राज्यों में चुनावी समर के लिये बिगुल अब प्रत्यक्ष रूप से फुंक चुका है और “उपरोक्त में से कोई नहीं का अधिकार” मतदाताओं को मिलने के कारण राजनैतिक दलों की नींदे उडी हुई हैं. क्योंकि मत का अधिकार जो एक हथियार के रूप में मतदाता करता है, अगर मतदाताओं ने इस शक्ति का सही ढंग से प्रयोग कर दिया तो जो परिणाम सामने आयेंगे वह निश्चित रूप से चौंकाने वाले हो सकते हैं.criminal-leaders

गौरतलब है कि आने वाले महिनों में देश के पांच राज्यों मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ, दिल्ली, राजस्थान और मिजोरम में विधान सभा चुनाव होने जा रहे हैं. इन चुनावों में दागी और अपराधिक छवि वाले नेताओं को भी भारी मुश्किल का सामना करना पड सकता है. इनकी संख्या भी कुछ कम नहीं बतलायी जाती है. प्राप्त जानकारी के अनुसार चुनाव सुधार के लिये कार्य कर रही एक गैर शासकीय और राजनैतिक संस्था नेशनल इलेक्शन वॉच द्वारा अपने स्तर पर कराये गये सर्वे और जानकारी के हिसाब से एैसे नेताओं की संख्या को सामने रखते हुये समस्त राजनैतिक दलों के शीर्ष पर बैठे नेताओं से एैसे लोगों को उम्मीदवार नहीं बनाये जाने के संबध में लिखा है.

मध्यप्रदेश के ही गत तेरहरवीं विधान सभा में चुने गये नेताओं पर नजर डालें तो  नेशनल इलेक्शन वॉच की प्रदेश इकाई ने मौजूदा तेरहवीं विधानसभा में निर्वाचित होकर विधायक बने 230 में से 219 विधायकों की जानकारी एकत्रित की. संस्था के सामने सर्वे के दौरान जो तथ्य उभरकर सामने आये वह निश्चित रूप से चौंकाने वाले थे. प्राप्त जानकारी के अनुसार 219 विधायकों में से 55 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज पाये गये हैं. इनमें से कांग्रेस के 62 में से 21, भाजपा के 142 में से 28 और बसपा के सात में से तीन विधायकों के नाम बतलाये जाते हैं. वैसे इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि अनेक मामलों में एक दूसरे के प्रति राजनैतिक द्वेष भावना के तहत मुकद्दमें दर्ज कराने के मामले प्रकाश में आते रहते हैं. लेकिन अगर गंभीर और अन्य तरह के अपराधी सदन में पहुंचते हैं तो निश्चित रूप से चिंता का विषय हो सकते हैं.

सूत्रों की माने तो सर्वे करने वाली संस्था का मत भी कुछ इसी प्रकार का बतलाया जाता है. सर्वे रिपोर्ट पर नजर डालें तो 2965 उम्मीदवारों में से 447 यानि 15 प्रतिशत के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज थे. इसमें कांग्रेस के 217 में से 68, भारतीय जनता पार्टी के 216 में से 48, बहुजन समाज पार्टी के 207 में से 41 की संख्या सामने आयी थी. अगर प्रतिशत के हिसाब से देखें तो कांग्रेस के 31 प्रतिशत, भाजपा के 22 प्रतिशत. एवं बसपा के 41 प्रतिशत की संख्या रही. प्राप्त जानकारी के अनुसार  2008 के पिछले विधानसभा चुनाव में खड़े हुए 3179 उम्मीदवारों में से 2965 उम्मीदवारों द्वारा दाखिल हलफनामे का विश्लेषण संस्था द्वारा किया गया है. संस्था से प्राप्त जानकारी के अनुसार हलफनामे में दिए गए आपराधिक मामलों में से न्यायालय द्वारा कितने मामलों में अपना फैसला सुना दिया है इस जानकारी अभी नहीं मिली है. वहीं  विश्लेषण में यह जरूर सामने आ गया है कि 2965  उम्मीदवारों में से 257 यानि 9 प्रतिशत के खिलाफ हत्या, अपहरण, डकैती, फिरौती वसूलने और बलात्कार जैसे गंभीर आपराधिक मामले पंजीबद्ध थे. बावजूद इसके कांग्रेस ने ऐसे 33 उम्मीदवारों यानि 15 प्रतिशत को, भाजपा ने 22 यानि 10 प्रतिशत और बसपा ने 26 यानि 13 प्रतिशत को अपना उम्मीदवार बनाते हुये मैदान में उतारा था.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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