रामदेव सरकारी खर्च पर कर रहे थे चुनाव प्रचार…

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भारत में आप चाहे जिस राजनेता का या राजनैतिक दल का प्रचार करें आप पर किसी प्रकार की पाबंदी नहीं हैं मगर आप यह चुनावी प्रचार सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाते हुए कर रहे हैं तो यह न केवल अनैतिकता ही है बल्कि इसे चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद भ्रष्ट आचरण भी कहा जायेगा. दूसरों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाले बाबा रामदेव यही कर रहे थे. बीबीसी ने इस पूरे मामले पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है..

सरकारी मेहमान बन सरकारी खर्च पर भाजपा के पीएम इन वेटिंग नरेंद्र मोदी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह का चुनाव प्रचार करना बाबा रामदेव को महंगा पड़ गया है. सबसे पहले तो चुनाव आयोग ने छत्तीसगढ़ में बाबा रामदेव का राजकीय अतिथि का दर्जा छीना. उसके बाद चुनाव आयोग ने राज्य भर के जिलों के कलेक्टरों से बाबा रामदेव की सभाओं की रिपोर्ट मांगी है.ramdev (1)

इसके अलावा बालोद ज़िले में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने बाबा रामदेव के ख़िलाफ़ रिपोर्ट भी दर्ज कराई है. यहां तक कि मंगलवार की शाम छत्तीसगढ़ से दिल्ली वापस लौट रहे बाबा रामदेव को रायपुर एयरपोर्ट पर बड़ी संख्या में लोगों ने काले झंडे दिखाए और उन पर चूड़ियां और बिंदी फेंक कर उनके ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया.

‘चुनाव आयोग का रुख़’

इधर चुनाव आयोग ने कहा है कि अगर बाबा रामदेव की सभा से यह बात प्रमाणित होती है कि उन्होंने चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन किया है और अपनी सभाओं में उन्होंने किसी दल विशेष का प्रचार किया है तो उनके ख़िलाफ़ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

दूसरी ओर कांग्रेस से बेहद नाराज़ बाबा रामदेव ने कहा है कि कांग्रेस उनके ख़िलाफ़ साज़िश कर रही है और वे इससे घबराने वाले नहीं हैं.

उन्होंने कहा, “मैं एक फ़क़ीर हूं और मेरा राजकीय अतिथि का दर्जा वापस लेने से मुझ पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता. नरेंद्र मोदी और रमन सिंह के पक्ष में बोलना अगर अपराध है तो मैं यह अपराध करता रहूंगा.“

बाबा रामदेव पिछले सप्ताह छत्तीसगढ़ में थे. इस दौरान उन्होंने 15 विधानसभाओं में कथित योग दीक्षा के कार्यक्रमों में भाग लिया. लेकिन इन सभी कार्यक्रमों में बाबा रामदेव योग से कहीं अधिक राजनीतिक अभियान में जुटे रहे.

“हमने बाबा रामदेव के भाषण की रिकार्डिंग भी मांगी है. अगर यह साबित हो गया कि रामदेव ने चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन किया है तो हम उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करेंगे.”
मुख्य चुनाव अधिकारी, छत्तीसगढ़

उन्होंने अपनी प्रत्येक सभा में राज्य और केंद्र में भाजपा की सरकार बनाने की अपील की. इसके अलावा उन्होंने कांग्रेस नेताओं की कटु आलोचना भी की.

बाबा रामदेव ने अपनी सभाओं में कहा कि देश में नरेंद्र मोदी से बेहतर कोई प्रधानमंत्री नहीं हो सकता और छत्तीसगढ़ में रमन सिंह से बेहतर मुख्यमंत्री नहीं हो सकता.

रामदेव ने राहुल गांधी के लिए ‘भोंदू’ और ‘पप्पू’ जैसे शब्दों का का इस्तेमाल करते हुए कहा की देश में शाहज़ादे का राज नहीं चलेगा. उन्होंने अपनी सभी सभाओं में कांग्रेस को हराने और भाजपा को वोट देने की भी अपील की.

बाबा रामदेव को नरेंद्र मोदी का प्रचार करना महंगा साबित हो रहा है.
शिकायत

लेकिन विपक्षी दल कांग्रेस, माकपा और छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच ने जब चुनाव आयोग से बाबा रामदेव की इन सभाओं की शिकायत की तो बाबा रामदेव से आनन-फ़ानन में राजकीय अतिथि का दर्जा छीन लिया गया.

राजनीतिक दलों की शिकायत में कहा गया कि रामदेव की सभाओं का ख़र्च भाजपा के चुनाव ख़र्च में जोड़ा जाए.

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी सुनील कुजूर के अनुसार उन्होंने उन सभी ज़िलों के कलेक्टरों से रिपोर्ट मांगी है, जहां रामदेव ने अपनी सभा की थी.

सुनील कुजूर कहते हैं, “रिपोर्ट के अलावा हमने बाबा रामदेव के भाषण की रिकार्डिंग भी मांगी है. अगर यह साबित हो गया कि रामदेव ने चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन किया है तो हम उनके ख़िलाफ़ आवश्यक कार्रवाई करेंगे.”

कांग्रेस ने कहा है कि रामदेव के ख़िलाफ़ उसकी लड़ाई जारी रहेगी और सड़कों के साथ-साथ अदालतों में भी उन्हें जनता के सवालों का जवाब देना होगा.

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला कहते हैं, “रामदेव सभी सभाओं में भारतीय जनता पार्टी और रमन सिंह का यशोगान करते घूम रहे थे. उनकी सभाओं का पूरा ख़र्च भी अघोषित रूप से भारतीय जनता पार्टी ही उठा रही थी. उन्हें स्वीकार करना ही होगा कि वे भाजपा के लिए काम कर रहे हैं.”

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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