मायावती ने दलित नेतृत्व पनपने नहीं दिया…

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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी दलितों को दिए एक बयान के चलते एक बार फिर सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बन गए हैं.

राजधानी दिल्ली में दलितों के सशक्तिकरण पर एक के बाद एक दो कार्यक्रमों में शामिल हुए राहुल गांधी का कहना था कि देश के दलित समुदाय को आगे ले जाने के लिए उन्हें ‘ब्रहस्पति ग्रह की एस्केप वेलॉसिटी’ चाहिए.rahul_dalit_congress

विज्ञान भवन में मौजूद लोगों को एस्केप वेलॉसिटी के बारे में समझाते हुए राहुल ने कहा कि यह वह रफ़्तार है जिसे हासिल करने के बाद ही कोई चीज़ किसी ग्रह या चांद के गुरुत्वाकर्षण से आज़ाद हो सकती है.

लेकिन इस बयान के बाद ‘एस्केप वेलॉसिटी’ ट्विटर में भारत में सबसे ऊपर ट्रेंड कर रहा है.

दक्षिणपंथी विचारधारा रखने वाले कई लोगों ने जहाँ राहुल का इस बयान के बाद मज़ाक उड़ाया है तो वहीं ट्विटर पर कांग्रेस का बचाव करने वालों ने कहा है कि उनके बयान को सही संदर्भ में समझने की ज़रूरत है.

विज्ञान भवन में अनुसूचित जातियों के सशक्तीकरण पर राष्ट्रीय जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया था.

राहुल का कहना था, ”बीआर अंबेडकर पहले दलित थे जिन्होंने एस्केप वेलॉसिटी हासिल की और उनके बाद कांशीराम ने इस ताक़त को सही दिशा में मोड़ा, मगर ‘यह ऊर्जा उन्हें आरक्षण की बदौलत मिली थी’ और उन्होंने बहुत से दलितों को एस्केप वेलॉसिटी हासिल करने में मदद की.”

राहुल का कहना था कि बहुजन समाज पार्टी नेता और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने दलित नेतृत्व पर क़ब्ज़ा जमा लिया और दूसरों को उठने का मौका नहीं दे रही हैं.

उनका कहना था कि अगर एस्केप वेलॉसिटी के आंदोलन को आगे बढ़ाया जाता तो इसमें लाखों दलितों की भागीदारी हो सकती थी.

राहुल ने बताया कि उन्होंने कांग्रेस में मौजूद प्रमुख दलित नेताओं को कहा है कि वे ‘पंचायत, विधायक, सांसद और नीतिगत स्तर’ पर उनका नेतृत्व तैयार करें.

तालकटोरा स्टेडियम में दलित अधिकार दिवस पर एक कार्यक्रम में राहुल ने दलितों को कांग्रेस की ‘रीढ़ की हड्डी’ करार दिया.

राहुल का कहना था, “चाहे उन्हें कांग्रेस में जितना प्रतिनिधित्व मिले, वह भी कम है. ये लोग कांग्रेस पार्टी की रीढ़ की हड्डी हैं और हमें उनके लिए और बहुत करना है.”

इस दौरान जमकर नारेबाज़ी भी हुई. राहुल ने आश्वासन दिया कि कांग्रेस दलितों के लिए जो मुमकिन होगा, करेगी.

स्टेडियम में मौजूद वाल्मीकि समुदाय के युवाओं को लक्ष्य कर उन्होंने कहा, “ये चेहरे विधानसभाओं और लोकसभाओं में दिखने चाहिए.”

“कांग्रेस ग़रीबों की पार्टी है. हमारा विपक्ष ग़रीबों की समस्याएं नहीं समझता. वे उनके घर नहीं जाते और न ही उनकी समस्याएं समझने के लिए कभी उनसे मिलते हैं. इसके बाद वे इंडिया शाइनिंग की बात करते हैं और फिर चुनाव हारते हैं. वे 2004 में हारे थे, फिर 2009 में हारे और फिर 2014 में हारेंगे.”

इस कार्यक्रम का आयोजन भगवान वाल्मीकि फ़ाउंडेशन ने किया था. राहुल ने यूपीए के शिक्षा का अधिकार, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना और आरटीआई जैसे विधेयकों का ज़िक्र भी किया.

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी दलितों को दिए एक बयान के चलते एक बार फिर सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बन गए हैं.

राजधानी दिल्ली में दलितों के सशक्तिकरण पर एक के बाद एक दो कार्यक्रमों में शामिल हुए राहुल गांधी का कहना था कि देश के दलित समुदाय को आगे ले जाने के लिए उन्हें ‘ब्रहस्पति ग्रह की एस्केप वेलॉसिटी’ चाहिए.

विज्ञान भवन में मौजूद लोगों को एस्केप वेलॉसिटी के बारे में समझाते हुए राहुल ने कहा कि यह वह रफ़्तार है जिसे हासिल करने के बाद ही कोई चीज़ किसी ग्रह या चांद के गुरुत्वाकर्षण से आज़ाद हो सकती है.

लेकिन इस बयान के बाद ‘एस्केप वेलॉसिटी’ ट्विटर में भारत में सबसे ऊपर ट्रेंड कर रहा है.

दक्षिणपंथी विचारधारा रखने वाले कई लोगों ने जहाँ राहुल का इस बयान के बाद मज़ाक उड़ाया है तो वहीं ट्विटर पर कांग्रेस का बचाव करने वालों ने कहा है कि उनके बयान को सही संदर्भ में समझने की ज़रूरत है.

विज्ञान भवन में अनुसूचित जातियों के सशक्तीकरण पर राष्ट्रीय जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया था.

राहुल का कहना था, ”बीआर अंबेडकर पहले दलित थे जिन्होंने एस्केप वेलॉसिटी हासिल की और उनके बाद कांशीराम ने इस ताक़त को सही दिशा में मोड़ा, मगर ‘यह ऊर्जा उन्हें आरक्षण की बदौलत मिली थी’ और उन्होंने बहुत से दलितों को एस्केप वेलॉसिटी हासिल करने में मदद की.”

राहुल का कहना था कि बहुजन समाज पार्टी नेता और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने दलित नेतृत्व पर क़ब्ज़ा जमा लिया और दूसरों को उठने का मौका नहीं दे रही हैं.

उनका कहना था कि अगर एस्केप वेलॉसिटी के आंदोलन को आगे बढ़ाया जाता तो इसमें लाखों दलितों की भागीदारी हो सकती थी.

राहुल ने बताया कि उन्होंने कांग्रेस में मौजूद प्रमुख दलित नेताओं को कहा है कि वे ‘पंचायत, विधायक, सांसद और नीतिगत स्तर’ पर उनका नेतृत्व तैयार करें.

तालकटोरा स्टेडियम में दलित अधिकार दिवस पर एक कार्यक्रम में राहुल ने दलितों को कांग्रेस की ‘रीढ़ की हड्डी’ करार दिया.

राहुल का कहना था, “चाहे उन्हें कांग्रेस में जितना प्रतिनिधित्व मिले, वह भी कम है. ये लोग कांग्रेस पार्टी की रीढ़ की हड्डी हैं और हमें उनके लिए और बहुत करना है.”

इस दौरान जमकर नारेबाज़ी भी हुई. राहुल ने आश्वासन दिया कि कांग्रेस दलितों के लिए जो मुमकिन होगा, करेगी.

स्टेडियम में मौजूद वाल्मीकि समुदाय के युवाओं को लक्ष्य कर उन्होंने कहा, “ये चेहरे विधानसभाओं और लोकसभाओं में दिखने चाहिए.”

“कांग्रेस ग़रीबों की पार्टी है. हमारा विपक्ष ग़रीबों की समस्याएं नहीं समझता. वे उनके घर नहीं जाते और न ही उनकी समस्याएं समझने के लिए कभी उनसे मिलते हैं. इसके बाद वे इंडिया शाइनिंग की बात करते हैं और फिर चुनाव हारते हैं. वे 2004 में हारे थे, फिर 2009 में हारे और फिर 2014 में हारेंगे.”

इस कार्यक्रम का आयोजन भगवान वाल्मीकि फ़ाउंडेशन ने किया था. राहुल ने यूपीए के शिक्षा का अधिकार, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना और आरटीआई जैसे विधेयकों का ज़िक्र भी किया.

(बीबीसी)

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2 thoughts on “मायावती ने दलित नेतृत्व पनपने नहीं दिया…

  1. यह हमारी कम समझी है या नादानी कि लोग राहुल के बयानों को समझ नहीं पाते.उनके दिए बयानों को कांग्रेसी ऐसा ले कर उड़ते हैं,कि कई बार उन्हें स्वयं बाद में कमरे में घुस मुहं छिपाना पड़ता है, या रोना.चाहे वे पी ऍम पद के दावेदार हो या कांग्रेस अध्यक्ष के,शायद अभी भी उम्मेन राजनितिक परिपक्वता कि कमी है,वे अभी भी फीड बेक लेकर चलते बोलते हैं और जहाँ इसका अभाव होता है वे लडखडाती जुबान से ऐसे स्टेटमेंट दे देते हैं जो बाद में उनकी ही छवि को एक अलग स्वरुप में प्रस्तुत करता है .कभी कभी ऐसा लगता है कि उनमें अभी भी राजनितिक सहस कि कमी है , व अनुभव की भी.और विपक्षी घाघ नेताओं के समक्ष उनका कद बोना लगने लगता है. यह बयां भी कुछ ऐसी ही हालत को प्रदर्शित करता है.

  2. यह हमारी कम समझी है या नादानी कि लोग राहुल के बयानों को समझ नहीं पाते.उनके दिए बयानों को कांग्रेसी ऐसा ले कर उड़ते हैं,कि कई बार उन्हें स्वयं बाद में कमरे में घुस मुहं छिपाना पड़ता है, या रोना.चाहे वे पी ऍम पद के दावेदार हो या कांग्रेस अध्यक्ष के,शायद अभी भी उम्मेन राजनितिक परिपक्वता कि कमी है,वे अभी भी फीड बेक लेकर चलते बोलते हैं और जहाँ इसका अभाव होता है वे लडखडाती जुबान से ऐसे स्टेटमेंट दे देते हैं जो बाद में उनकी ही छवि को एक अलग स्वरुप में प्रस्तुत करता है .कभी कभी ऐसा लगता है कि उनमें अभी भी राजनितिक सहस कि कमी है , व अनुभव की भी.और विपक्षी घाघ नेताओं के समक्ष उनका कद बोना लगने लगता है. यह बयां भी कुछ ऐसी ही हालत को प्रदर्शित करता है.

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