पुलिस क्वॉर्टर में नाबालिग़ से दुष्कर्म करने के प्रयास में दो पुलिसकर्मी बर्खास्त…

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महानगरी दिल्ली को रेप नगरी बनाने में पुलिस वाले भी पीछे नहीं है. अब दो पुलिस वालों द्वारा पुलिस क्वॉर्टर में नाबालिग लड़की से रेप की कोशिश करने का मामला सामने आया है. लड़की के रोने की आवाज सुनकर दूसरे कमरे में मौजूद उसकी दो सहेलियों ने बचाने के लिए शोर मचा दिया. पड़ोसियों से सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों सिपाहियों को अरेस्ट कर लिया है. दोनों को बर्खास्त कर दिया गया है.rape1

स्पेशल कमिश्नर दीपक मिश्रा ने बताया कि यह वारदात शनिवार शाम की है. दिल्ली पुलिस की तीसरी बटालियन में तैनात कॉन्स्टेबल अमित तोमर ड्यूटी पर था. शाम को उसे विकासपुरी पुलिस लाइंस के नजदीक 13-14 साल की तीन लड़कियां घूमती नजर आईं. तीनों सड़क पर कचरा बीन रही थीं. आरोप है कि अमित ने एक लड़की से बात कर उससे कहा कि अगर वह उसके साथ चले तो वह उसे पैसे देगा. लड़कियां तैयार हो गईं.

अमित तीनों लड़कियों को गाड़ी में बिठाकर नॉर्थ दिल्ली में किंग्स्वे कैम्प ले आया. यहां पुलिस कॉलोनी में उसका दोस्त गुरजिंदर सिंह का सरकारी घर है. गुरजिंदर भी अमित के साथ दिल्ली पुलिस की तीसरी बटालियन में तैनात है. दोनों ने 13-13 साल की दो लड़कियों एक कमरे में बंद कर दिया और 14 साल की लड़की को दूसरे कमरे में ले गए. दोनों जब जबर्दस्ती करने लगे तो लड़की रोने लगी. उसका शोर सुनकर उसकी दोनों सहेलियों ने शोर मचा दिया. लड़कियों की आवाजें एक पडोसी ने सुन ली. उसने 100 नंबर पर कॉल कर दी. पुलिस ने आकर दोनों सिपाहियों को दबोच लिया.

स्पेशल कमिश्नर मिश्रा ने बताया कि दोनों सिपाहियों के खिलाफ आईपीसी के सेक्शन 354बी और पोक्सो के तहत केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. दोनों को नौकरी से डिसमिस कर दिया गया है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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