आइये भगत सिंह की राह पर चलें….

admin 1
0 0
Read Time:3 Minute, 22 Second

-राजेंद्र बोड़ा||

सोचा था देश आज़ाद होगा तब हमारी अपनी सरकार होगी और सबकी बेहतरी की राहें आसान हो जाएगी. ज़म्हूरियत में अपनी ज़िंदगी के फैसले हम खुद लेंगे और सैकड़ों बरसों की गुलामी की ज़ंजीरें तोड़ कर अपनी तक़दीरें बदलेंगे. इन्हीं सपनों को हकीकत में बदलने के जज़्बे के साथ भगतसिंह ने कहा था “मेरा देश तो एक जीवित और हसीन हकीकत है तथा मैं इसे मुहब्बत करता हूं.”bhagat-singh

क्या आप भी अपने देश भारत से इतनी ही मुहब्बत करते हैं?

आज जब अपनी ही चुनी ही सरकारें गैर की तरह व्यवहार करने लगी है और हमें बाज़ार की ताकतों के सामने मिमियाने के लिए छोड़ दिया है तब भगत सिंह को याद करना होगा जिन्होंने कहा था कि “यदि बहरों को सुनना है तो आवाज़ को बहुत जोरदार होना होगा”.

आज हमें शोषण, अन्याय, अत्याचार, भूख, गरीबी, असमानता, महामारी, और राज्य की तरफ से हो रही हिंसा के खिलाफ अपनी आवाज़ को जोरदार करना होगा.

भगत सिंह ने यकीन के साथ कहा था कि “कल मैं नहीं भी रहा तब भी मेरे हौसले देश के हौसले बनकर साम्राज्यवादी शोषकों के खात्मे के लिए उनका पीछा करते रहेंगे. मुझको अपने देश के भविष्य पर यकीन है”. उनके इस यकीन को आज पूरा करना हमारा फर्ज़ है.

अगर हम इस देश से उतनी ही मुहब्बत करते हैं जितनी भगत सिंह ने की तो आइये भगत सिंह की राह पर चलें. यह राह आसान नहीं हैं. इस राह पर चलते हुए हमें लोगों की निष्क्रियता की भावना को क्रांतिकारी भावना में बदलने के लिए एकजुट होकर काम करना होगा.

भगत सिंह की राह पर चलने का यह निमंत्रण अन्याय पर टिकी वर्तमान व्यवस्था को बदलने के लिए संघर्ष का निमंत्रण है.

क्या आप इस राह पर चलने को तैयार हैं?

अगर हां तो आइये उस शेर को फिर गुनगुनाते हैं जो भगत सिंह को बड़ा प्यारा लगता था:

उन्हें यह फ़िक्र है हरदम, नयी तर्ज़-ए-ज़फ़ा क्या है?

हमें यह शौक है देखें, सितम की इन्तहा क्या है?

भले ही भगत सिंह को फांसी पर चढ़ा दिया गया हो मगर जैसा कि उस नौजवान क्रांतिकारी ने कहा था “व्यक्तियो को कुचल कर, वे विचारों को नहीं मार सकते”. भगत सिंह जिन विचारों को लेकर जिये और मरे आइये उन्हें हम भी जियें और अन्याय के खिलाफ जनता की आवाज़ बनें.

भगतसिंह की जयंती पर उन्हीं की पंक्तियों को दोहराते हुए कि “ज़िन्दगी तो अपने दम पर ही जी जाती हैं, दूसरों के कन्धों पर तो सिर्फ जनाजे उठाये जाते हैं” आइये हम कुछ कर गुजरने के जज़्बे के साथ कारवां में शामिल हों.

About Post Author

admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleppy
Sleppy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

One thought on “आइये भगत सिंह की राह पर चलें….

  1. hamary das ma sriaf choar hia coar and choaroaka raja bdia duakha kia batahia sochatha sas ajajda hoga loag khusahal hoagy but ahya toa gdara hia subas chandra boas yah thoaroan jan rheatha kia apnya hia loga das ko lutyga jya hiand jya bharat

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Next Post

भारत-पाक रिश्तों पर आतंकी साया...

-श्याम उदय कोरी|| अगर हम देखेंगे तो विश्व के मानचित्र पर भारत व पाक रूपी देशों के चित्र एक ही दिन उकेरे गए साफ़ साफ़ नजर आ जायेंगे, नजर आयें भी क्यूँ नहीं जब दोनों ही मुल्कों का जन्म एक ही दिन हुआ हो, यह बात किसी से छिपी नहीं […]
Facebook
%d bloggers like this: