लखनऊ में 27 से सजेगा पुस्तकों का संसार

admin
0 0
Read Time:6 Minute, 44 Second

महिला सशक्तीकरण को समर्पित होगा ग्यारहवां राष्ट्रीय पुस्तक मेला..डॉ. कलाम करेगें उद्घाटन.. नई-पुरानी प्रेमकथाओं पर बहस करेंगे रचनाकार..27 सितम्बर से 6 अक्टूबर तक चलेगा मेला..

 

-आशीष वशिष्ठ||

लखनऊ, मशीनीकृत होते जीवन में किताबों का महत्व बढ़ा है. पुस्तकें न केवल सबका ज्ञानवर्धन करती हैं बल्कि, हमेशा से व्यक्ति और समाज के मूलभूत विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती आ रही हैं. राष्ट्रीय पुस्तक मेला आयोजन समिति के सचिव मनोज सिंह चंदेल ने पत्रकार वार्ता में अपने विचार रखे. उन्होंने बताया कि  दि फेडरेशन ऑफ पब्लिशर्स एण्ड बुकसेलर्स एसोसिएशन्स इन इण्डिया, नई दिल्ली के सहयोग से नॉलेज ट्री फाउंडेशन द्वारा राजधानी लखनऊ में आागामी 27 सिंतबर को ग्यारहवां राष्ट्रीय पुस्तक मेले का आयोजन किया जा रहा है. ये पुस्तक मेला महिला सशक्तीकरण को समर्पित होगा.national_book_fair

श्री मनोज ने बताया कि पुस्तक मेले का उद्घाटन पूर्व राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम 27 सितम्बर को सायं चार बजे मोतीमहल लॉन राणा प्रताप मार्ग में करेगें. पुस्तक मेले में सौ से अधिक स्टाल सजेंगे. जिसमें 60 देष के प्रतिष्ठित प्रकाशक और विभिन्न सामाजिक व समाजसेवी संस्थाओं के स्टाल होंगे. उन्होंने बताया कि गत वर्श पुस्तक मेले में लगभग 3 करोड़ 10 लाख रूप्ये की किताबों की बिक्री हुई थी, इस बार 10 से 15 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान है. लखनऊ में प्रतिवर्श लगने वाला मेला  मात्र 11 वर्षों में ही देश के 5 प्रतिष्ठित पुस्तक मेलों में शुमार हो गया है. इस बार मेले में पहली बार सिंधी व क्रिषिचयन पुस्तकों का स्टाल लगेगा. एक सवाल के जबाव में श्री चन्देल ने बताया कि पिछले 11 वर्श से पंजाबी अकादमी से पुस्तक मेले में आने के लिए आग्रह किया जा रहा है लेकिन वो इसमें दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं लेकिन हमारा प्रयास है कि अगले वर्ष पंजाबी पुस्तकों का स्टाल या फिर क्षेत्रीय भाषाओं का स्टाल लगाने का प्रयास करेंगे.

नॉलेज ट्री फाउन्डेशन के उपाध्यक्ष उमेश ढल ने बताया कि मेले में इस बार मॉरीशस की भागीदारी टिन्ट्री इम्प्रेशन्स संस्था के मार्फत हो रही है. इसके अलावा चिल्ड्रन बुक ट्रस्ट, ललित कला अकादमी, नियोगी बुक्स, सरस्वती ग्रुप, ऑरेन्ज एजूकेशन, न्यू एज इंटरनेशनल, लक्ष्मी पब्लिकेशन्स, किड्स विला, सभी नई दिल्ली, नील कमल पब्लिकेशन्स हैदराबाद, संगीत कार्यालय हाथरस इत्यादि कई नये प्रकाशन संस्थान इस बार मेले में शामिल हो रहे हैं. बढ़ती मांग की बदौलत इस बार 180 स्टालों की व्यवस्था की गई उसके बाद भी स्टालों की मांग बराबर बनी हुई है. हमें खेद है कि 20 से अधिक प्रमुख प्रकाशन संस्थाओं को निराश होना पड़ रहा है.

महिला सशक्तीकरण को समर्पित इस पुस्तक मेले के बारे में नॉलेज ट्री फाउन्डेशन के अध्यक्ष देवराज अरोड़ा ने जानकारी दी कि पुस्तक मेले में अभिषेक रस्तोगी की पुस्तक डायरी आफ अ दलाल स्ट्रीट ट्रेडर जैसी सेन्सैक्स पर आधारित पुस्तकों का विमोचन हो रहा है, तो भानगढ़ राजस्थान पर केन्द्रित माया सरीखी पुस्तकों के रचनाकार-साहित्यकार भी अपनी पुस्तकों के विमोचन को लेकर उत्साह दिखा रहे हैं. मेले के साहित्यिक आयोजनों में इस बार भारतीय पौराणिक व साहित्यिक प्रेमकथाओं पर पैनल डिस्कशन की कोशिशें चल रही हैं. अब यह पुस्तक मेला लखनऊ के प्रतिष्ठित वार्षिक उत्सव के रूप में स्थापित हो चुका है. समापन व पुरस्कार वितरण समारोह में छह अक्टूबर को लखनऊ के महापौर डा. दिनेश शर्मा मुख्य अतिथि होंगे.

आयोजन समिति के संरक्षक मुरलीधर आहूजा ने बताया कि, इस वर्ष भी स्थानीय लेखकों के लिए एक निःशुल्क स्टाल की व्यवस्था की गई है, जहां वे अपनी पुस्तकें प्रदर्शन व बिक्री के लिए रखवा सकते हैं. इसके साथ ही शाम को लेखक से मिलिये कार्यक्रम, दिन में प्रतिदिन दो बजे से बच्चों के लिए फैंसी ड्रेस, डांस, पेण्टिंग, कार्टून मेकिंग, निबंध लेखन, वाद-विवाद व गायन आदि की विभिन्न् प्रतियोगिताएं व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा. 28 सिंतबर को नित्य प्रकाष के अंग्रेजी उपन्यास माया का लोकार्पण होगा और लेेखक से मिलिये कार्यक्रम में वन्दना मिश्र, डा. रजनी गुप्त एवं लता कादम्बरी उपस्थित होंगी और सांस्कृतिक कार्य में सरबजीत सिंह मारवा तथा सहयोगियों द्वारा सूफीयाना गायन होगा. पत्रकार वार्ता में राजकुमार छाबड़ा और विजय अरोड़ा ने भी अपने विचार व्यक्त किये.

About Post Author

admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleppy
Sleppy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Next Post

कपड़े खोलकर दिखाओ, कहां हुआ है रेप...

उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार के पुलिस वाले असंवेदनशीलता की सारी हदें पार कर चुके हैं. इसकी ताज़ी बानगी मिली है कुशीनगर में हुए एल दुष्कर्म मामले में. पुलिस ने इस दुष्कर्म मामले में रेप केस में कोई कार्रवाई करने की बजाय दुष्कर्म पीडि़ता का ही मजाक बनाने की कोशिश […]
Facebook
%d bloggers like this: