आसाराम और गद्दाफी सेक्स के लिए एक ही तरीके से चुनते थे लड़कियां…

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नाबालिग लड़की से दुष्कर्म करने के आरोप में गिरफ्तार आसाराम के बारे में हर दिन नया राज फाश हो रहा है. उनके निजी सचिव ने आरोप लगाया है कि आसाराम सत्संग के दौरान टॉर्च की रोशनी मारकर और या फल फेंक कर लड़कियों और महिलाओं का चुनाव करते थे. वह हमेशा 15 से 35 साल उम्र की लड़कियों और महिलाओं को शिकार बनाते थे. भारत के आसाराम की तरह ही लीबिया का तानाशाह भी लड़कियों को ऐसे ही चुनता था.gaddafi

यह दावा फ्रेंच पत्रकार एनिक कोजिन ने अपनी किताब ‘प्रे: इन गद्दाफीज हरम’ में किया है. इस किताब में गद्दाफी की सेक्स लाइफ से जुड़े कुछ अनछुए पहलुओं को उजागर किया गया है. अपनी ही जनता द्वारा मारा गया लीबिया का तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी सेक्स का भूखा भेड़िया था. वह नाबालिग लड़कियों के अलावा 13 साल से कम उम्र के लड़कों को भी अपनी हवस शिकार का बनाता था.

एक लड़की के हवाले से कोजिन लिखती हैं कि कैसे 15 वर्षीय लड़की सोराया (काल्पनिक नाम) को स्कूल से उठाकर गद्दाफी के बिस्तर तक पहुंचा दिया गया. सोराया ने बताया कि साल 2004 में गद्दाफी किसी कार्यक्रम में शिरकत करने उसके स्कूल आया था.

उसके स्वागत के लिए लड़की ने फूलों का गुलदस्ता भेंट किया. उसके गुलदस्ता देने से पहले ही पूर्व तानाशाह ने उसके सिर पर हाथ रख दिया, मानो वह किसी को इशारा कर रहा हो कि ‘मुझे यह लड़की चाहिए.’

लड़की ने बताया कि उसके अगले दिन यूनीफॉर्म पहने एक महिला उसकी मां के हेयर सैलून में आई और गद्दाफी के आदेश पर मुझे किसी रेगिस्तान की ओर ले गई. वहां महिला ने जांच के लिए उसके खून का नमूना और स्तन का माप लिया. इसके कुछ देर बाद लड़की नग्न अवस्था में लीबियाई तानाशाह कर्नल गद्दाफी के बेडरूम में थी. गद्दाफी ने उसका हाथ पकड़ा और उसे बगल में बैठने को कहा.

सोराया ने बताया कि उस समय मुझे उसकी ओर देखने में भी डर लग रहा था. गद्दाफी ने लड़की से कहा कि वह उससे बिल्कुल न डरे, वह उसके पापा जैसा ही है. अगर वह चाहे तो वह उसका भाई या प्रेमी भी बन सकता है, क्योंकि अब उसे जिंदगीभर यहीं रहना है.

शुरू में जब लड़की ने गद्दाफी की बातें नहीं मानी तो उसने एक महिला को उसे सुपुर्द करते हुए कहा कि पहले इसे कुछ सिखाओ, तब मेरे पास लेकर आना.

gaddafi1सोराया ने बताया कि वह पांच साल तक उसके यहां एक बलि के मेमने की तरह तड़पती थी. वह बार-बार उसका रेप करता,उसे मारता और कभी उस पर पेशाब तक कर देता था. कभी दूसरी लड़कियां भी वहां आ जाती थीं और गद्दाफी के साथ ओरल सेक्स में भागीदारी निभाती थी. इस बात पर वह सोराया को दूसरी लड़कियों से ये सब बातें सीखने की हिदायत देता था. उस पर पोर्न फिल्में देखने का दबाव भी बनाया जाता था.

एक फ्रेंच न्यूजपेपर को दिए इंटरव्यू में कोजिन ने कहा कि इस किताब के लिए जानकारियां एकत्रित करना उनके लिए बड़ा कष्टदायक रहा है. उन्होंने कहा कि गद्दाफी बलात्कार को एक हथियार की तरह इस्तेमाल करता था. इससे वह महिलाओं पर आसानी से शासन कर सके और उन मर्दों पर भी, जिनके संरक्षण में महिलाएं रहती हैं.

एक तरफ जहां दुनिया के सबसे प्रभावशाली लोग अपनी सुरक्षा के लिए खतरनाक सुरक्षा गार्डों को तैनात करते थे, लीबिया का तानाशाह गद्दाफी अपनी सुरक्षा के लिए महिला बॉडीगार्ड्स पर भरोसा करता था. इन्हें अमेजोनियन गर्ल्स तो कभी रिवोल्यूशनरी नन कह कर भी बुलाया जाता था. यह सभी महिला बॉडी गार्ड्स वर्जिन होती थीं. इन्हें ओहदा देने से पहले इनका कौमार्य परीक्षण किया जाता था.body gaurds of gaddafi

महिलाओं के हाथ में अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी देना वाला गद्दाफी हमेशा कहता था कि ऐसा करके वह महिलाओं पर सशक्त बना रहा है. बकौल गद्दाफी, सभी लड़कियों को लड़ाई की ट्रेनिंग लेनी चाहिए. इससे दुश्मन उन्हें कमजोर समझने की भूल नहीं करेगा. सभी महिला गार्ड्स को पेशेवर हत्या करने की ट्रेनिंग दी जाती थी. सभी का चुनाव तानाशाह खुद करता था. ड्यूटी के दौरान सभी को लिपस्टिक, नेल पॉलिश, ज्वैलरी और हाई हील सैंडल पहनना अनिवार्य था. सभी लड़कियों को भगवान की कसम खिलाई जाती थी कि वे गद्दाफी के लिए जान दे देंगी. चाहे दिन हो रात, वे तानाशाह का साथ कभी नहीं छोड़ेंगी.

1998 में गद्दाफी के काफिले पर इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा घात लगाकर किए गए एक हमले में एक महिला अंगरक्षक की मौत हो गई और सात बुरी तरह घायल हो गई. कहा जाता है कि मरी हुई बॉडीगार्ड को तानाशाह सबसे ज्यादा चाहते थे, क्योंकि उसने गद्दाफी को पीछे धकेलते हुए सारी गोलियां अपने शरीर पर झेल ली थी.

42 साल के गद्दाफी के शासनकाल में न जाने कितनी बॉडीगार्ड्स आईं और गई. सभी को एक ही कसम दिलाई जाती थी कि उन्हें गद्दाफी के लिए मरना है. आप इसे महिलाओं के लिए दुनिया की सबसे खतरनाक नौकरी मान सकते हैं, जिसमें खूबसूरती के लिए बॉडीगार्ड्स का चुनाव नहीं किया जाता था.

गौरतलब है कि लीबिया का तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी 11 महीने पहले विद्रोहियों के हाथों मारा गया था.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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