पूर्व सेनाध्यक्ष वीके सिंह ने अन्ना हजारे के साथ अमेंरिका यात्रा से लौटते ही अन्ना की पीठ में खंज़र भोंक दिया और नरेन्द्र मोदी का दामन थाम लिया. अंदरखाने की ख़बरों के अनुसार वीके सिंह और मोदी में पेक्ट हुआ है कि अगले लोकसभा चुनावों में वीके सिंह और उनके पत्रकार साथी संतोष भारतीय को भाजपा का टिकट देगें तथा मोदी के प्रधानमंत्री बनने की स्थिति में वीके सिंह को रक्षामंत्री बनाया जायेगा.VK Singh with Modi

गौरतलब है कि पत्रकार संतोष भारतीय ही वीके सिंह को अन्ना हजारे के पास ले गए थे. इसके बाद से वीके सिंह और संतोष भारतीय ही अन्ना हजारे के खास म खास सलाहकार बने हुए थे. यहाँ तक कि अमेरिका में हर साल होने वाली इंडियन डे परेड में भी वीके सिंह और संतोष भारतीय अन्ना हजारे के साथ गए थे. इसके बाद कई दिनों की अमेरिका यात्रा के दौरान अन्ना के जनलोकपाल आन्दोलन के नाम पर भी इस जुगलजोड़ी ने गुप-चुप में बहुत सारा चंदा भी इकट्ठा किया और अन्ना को इसकी भनक भी नहीं लगने दी गई.

हालाँकि अन्ना हजारे के कुछ खास समर्थकों को सितम्बर की शुरुआत में ही इस डील की भनक लग गई थी और जनलोकपाल आन्दोलन के प्रमुख कार्यकर्त्ता और अन्ना समर्थक किरण एस पटनायक ने नौ सितम्बर को ही अपनी फेसबुक वाल पर वीके सिंह को चेतावनी दी थी कि “वीके सिंह सहित अन्ना के कोई भी प्रमुख सहयोगी किसी दल या राजनेता के साथ किसी मंच या कार्यक्रम में हिस्सा न लें. वीके सिंह या कोई भी प्रमुख सहयोगी किसी दल या राजनेता के साथ खुले में या गुप्त रूप से सांठगांठ न करें.”

मगर वीके सिंह पर इस चेतावनी का कोई असर नहीं हुआ और वीके सिंह डील के मुताबिक भाजपा द्वारा रेवाड़ी में आयोजित पूर्व सैनिकों की रैली में नरेन्द्र मोदी के साथ मंच साझा करने पहुँच गए और अन्ना हजारे के जनलोकपाल आन्दोलन के ताबूत में आखिरी कील ठोक दी.

अन्ना हजारे समर्थकों में वीके सिंह की इस हरकत को लेकर भारी रोष है. अन्ना के कुछ खास समर्थक तो वीके सिंह को गद्दार और धोखेबाज़ जैसी उपाधियों से अलंकृत कर रहे हैं. किरण एस पटनायक कहते हैं कि निश्छल अन्ना हजारे की पीठ में खंजर भोंकने वाले गद्दार वीके सिंह को जीतने नहीं देगें. वीके सिंह और संतोष भारतीय जहाँ से भी चुनाव लड़ेगें, अन्ना समर्थक उस इलाके में जा कर वहां के मतदाताओं को इन दोनों की असलियत से अवगत करवाएगें.

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By admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

8 thoughts on “पूर्व सेनाध्यक्ष वीके सिंह ने अन्ना हजारे की पीठ में भोंक दिया खंजर…”
  1. किरण पटनाइक भाई आजकल परेशान ज्यादा है , है तो वो माकपा माले के पुराने कार्यकर्ता और नितीश को भी पसंद कराते है लेकिन मोदी के विरोधी है

  2. Revolutionary time comes and goes, it does not wait for any one to use it. Anna's movement for JLPB was at the peak of mass dissatisfaction who wanted to get rid of Congress, BJP and allies, which the latter tried to break by all means including state power, failed and as last effort promised to enact knowing well they will not honour their promise!
    However, it was master stroke of AK to form AAP to use revolutionary tide in favour of JLPB and rout the corrupts and criminals. The traitors, like Agnivesh, VK Singh, Kiran Bedi were part of his movement since beginning.
    Now it falls upon AAP and of course on Anna to lead this movement before it dies down for now!!

  3. मीडिया दरबार एक भ्रष्ट कांग्रेसी और चोर आप का बाप खुजलीवाल का गन्दा सोच वाला पत्र है जो अन्ना को और हरेक इमानदार लोगों को, भ्रष्ट कांग्रेसी पैसे के बल पर भ्रष्ट ही साबित करना चाहता है जिससे कांग्रेस के साथ मिलकर देश को औरभी लुटा जा सके – जनता सब कुछ जानती है

  4. i knew it in the starting, nd he didnt disappoint me,,,,,cheater,,,,dhokhewaj jisne age chhupayi ho bhal desh ka kya khak bhala krega,,,,#AAP is formed to execeute all public ammendments to make india crime n corruption free,,, #Arvind ji is doing gud thing,

  5. जनलोकपाल आंदोलन जारी है। तब तक जारी रहेगा, जब तक जनलोकपाल बन नहीं जाता। उसके साथ-साथ आरटीआई की वापसी, चुनाव सुधार भी अन्ना आंदोलन के एजेंडे में। जनता इसे चला रही और कुछ ईमानदार नेताओं का भी समर्थन है इसे। सो, जनलोकपाल आंदोलन में अंतिम कील ठोंकने वाला पैदा नहीं हुआ। अग्निवेश , वीके जैसे गद्दार आते-जाते रहेंगे। वीके की गद्दारी से अन्ना आंदोलन और मजबूत हुआ है। यकीन न हो तो जागरूक लोगों के बीच सर्वे करवा लें।

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