बैतूल में बढ़ा फ़र्ज़ी नोटों का कारोबार…

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दस लाख में 17 नकली नोट बैतूल जिले में मिलते है.. जिले के बैंक मैनेजरो की बैठक में आरबीआई को आशंका कहीं यह कोई साजिश का हिस्सा तो नहीं… बांग्लादेशियों पर शक….

-रामकिशोर पंवार||
बैतूल, पूरे देश में नकली नोटो का अनुपात पांच है लेकिन अकेले बैतूल जिले में नकली नोटो का अनुपात सीधे 17 पहुंच गया है. नकली नोटो के प्रचलन से आंशकित रिर्जव बैंक आफ इंडिया की मध्यप्रदेश राज्य शाखा ने सीधे बैतूल जिले के सभी बैंको के मैनजरो की क्लास ली और उन्हे निर्देश दिया कि वे लोगो को प्रेरित करे कि नकली नोटो के फरेब में आने से बचने के लिए केश योजना की जगह चेक से ही भुगतान करे एवं पाए. fake indian currency
आरबीआई के भोपाल जोन महाप्रबंधक द्वारा बुलवाई गई बैठक में हिस्सा लेने आए केनरा बैंक के सहायक महाप्रबंधक कुंवर अजय शाह ने बैतूल में पंजाब केसरी से चर्चा करते हुए आशंका जताई की उन्हे मिली जानकारी के अनुसार देश के आर्थिक ढांचे को चरमराने के लिए यह पाकीस्तान बांग्लादेश और नेपाल की सांझा साजिश का हिस्सा हो सकती है. हालांकि श्री शाह ने कहा कि उनका ननिहाल नेपाल है लेकिन उनका यह कहना था कि सीमा पर चौकसी के अभाव में नकली नोटो का गिरोह भारत में बंग्लादेश एवं नेपाल की सीमा से पश्चिम बंगाल के रास्ते घुसपैठ कर नकली नोटो के प्रचलन को बढ़ावा दे रहे है.
बैतूल जिले में नकली नोटो के बढ़ते प्रचलन पर प्रदेश के अजाक मंत्री कुंवर विजय शाह एवं निर्दलीय विधायक संजय शाह के बड़े भाई कुंवर अजय शाह ने बैतूल में पंजाब केसरी से चर्चा के दौरान स्वीकार किया कि जिस तेजी से केश लेन – देन हो रहा है उससे नकली नोटो का प्रचलन बढ़ा है और इसमें ऐसे लोगो की भागेदारी हो सकती है जिनका सीमावर्ती राज्यों से सम्पर्क है या वहां के रहने वाले है.
कुंवर अजय शाह ने एक बड़ा खुलासा करते हुए यहां तक कहा कि फर्जी चिट फण्ड कंपनी पहले जो नोटो के बदले नोट देती है उनमें अधिकांश नकली नोट होते है. पांच सौ के सबसे अधिक नकली नोटो के प्रचलन पर श्री कुंवर अजय शाह ने कहा कि हालांकि आरबीआई पांच सौ के नोटो की डिजाइन बदलने पर विचार कर रही है लेकिन उससे कुछ नहीं होने वाला क्योकि जब तक नगद लेन देन होगा नकली नोटो का प्रचलन बढ़ता रहेगा. केनरा बैंक आफ इंडिया के मध्यप्रदेश स्थित भोपाल जोन के सहायक महाप्रबंधक कुंवर श्री अजय शाह ने कहा कि गांव से लेकर जिला मुख्यालय तक नकली नोटो का गोरखधंधा सोजी – समझी साजिश का हिस्सा है. गांव के हाट बाजारो में दुकान लेकर बैठा व्यक्ति पांच सौ के असली – नकली नोटो की पहचान करेगा भी तो कैसे……?
श्री शाह ने कहा कि बैंको के एटीएम से भी नकली नोट मिलने की खबरे सामने आ रही है लेकिन तकनीकी भूल की वजह से बैंक उन नोटो को असली – नकली नोट पहचान मशीन से जांच करवाए बिना ही एटीएम मशीन तक पहुंचा देती है. हालांकि श्री शाह ने कहा कि बैंक तक नोट भी केश ट्राजेक्श्र के माध्यम से ही पहुंचते है. उनका यह भी कहना था के पुलिस ने पाथाखेड़ा – सारनी में जिस गिरोह को धन दुगना करने के आरोप में पकड़ा था यदि उससे सीआईडी पुलिस या सीबीआई सख्ती से पुछताछ करे तो और भी बड़ा खुलासा हो सकता है.
कुंवर अजय शाह ने इस बात को स्वीकार किया कि पश्चिम बंगाल की शारदा कंपनी ने भी नकली नोटो के प्रचलन का काम किया था लेकिन कंपनी की पोल जल्दी खुल गई क्योकि वहां पर जागरूकता का प्रतिशत बैतूल जिले से अधिक है.
एक सवाल के जवाब में श्री शाह ने बताया के बैठक में पाथाखेड़ा से लेकर सभी नगरीय क्षेत्रो के अधिकांश बैंको के शाखा प्रबंधको ने भाग लिया. बैतूल जिले की सीमा से लगी अग्रेंजी हुकुमत के जमाने की बहुचर्चित मकड़ई रियासत के राजकुमारो में से एक कुंवर अजय शाह ने कहा कि बैतूल जिले में साक्षरता का प्रतिशत भी कम है तथा आदिवासी बाहुल्य होने के साथ – साथ महाराष्ट्र का सीमावर्ती जिला भी है जिसके चलते मुम्बई के माध्यम से भी नकली नोटो का गोरखधंधा इस जिले तक पहुंच सकता है.
बैतूल जिले में अनुपात से अधिक नकली नोटो के प्रचलन को गंभीर अपराध बताते हुए श्री शाह ने इस बात पर चिंता जतलाई. आपने पूरी जागरूकता के लिए मीडिया से अपील की वे नकली – असली के गोरखधंधे में बैंक और उपभोक्ता के बीच समन्वय स्थापित कर लोगो को प्रेरित करे कि वे अधिकांश लेन – देन चेक एवं ई पेमंट के माध्यम से करे एवं ले भी ताकि नकली नोटो का गोरखधंधा बंद हो सके.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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