संसद ने बिल भेजा स्टैंडिंग कमेटी को, अन्ना ने कहा, ”सुबह तोड़ेंगे अनशन, लेकिन जीत है आधी”

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जनलोकपाल के लिए रामलीला मैदान में अनशन कर रहे अन्ना हजारे ने संसद द्वारा उनके तीन प्रमुख प्रस्तावों पर सहमति दिये जाने के बाद रात सवा नौ बजे ऐलान किया कि वे रविवार की सुबह 10 बजे अपना अनशन तोड़ देंगे। अन्ना हजारे ने यह ऐलान प्रधानमंत्री के उस पत्र को पाने के बाद किया जिसे लेकर केन्द्रीय मंत्री विलासराव देशमुख रामलीला मैदान पहुंचे थे। प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में अन्ना हजारे को संबोधित करते हुए लिखा था कि आपके द्वारा सुझाए गये तीनों बिन्दु स्टैंडिग कमेटी के विचारार्थ भेजे जा रहे हैं जिसके बाद आप अनशन तोड़ने पर विचार करें।

प्रधानमंत्री का पत्र पढ़ने के बाद खुद विलासराव देशमुख ने वह पत्र अन्ना हजारे को सौंपा. पत्र पाने के बाद अन्ना हजारे संसद में हुई चर्चा के लिए सभी संसद सदस्यों को बधाई दिया और कहा कि “आधी जीत हुई है, अभी पूरी जीत होना बाकी है।” अन्ना हजारे ने कहा कि आधी जीत जो हुई है उसमें पूरे देश के लोग शामिल हैं इसलिए यह जीत उनकी जीत है। अन्ना ने कहा कि रात दिन जो देश की जनता खड़ी हुई है यह उनकी जीत है। मीडिया को विशेष धन्यवाद देते हुए कहा कि हमारी जीत के लिए सबसे अधिक योगदान मीडिया है, इसलिए मैं मीडिया को धन्यवाद देता हूं।

अन्ना हजारे ने कहा कि इस पत्र के बाद सबकी सहमति से सुबह दस बजे आप सबकी उपस्थिति में मैं मेरा अनशन छोड़ना चाहता हूं। इस बीच दिनभर संसद में चली बहस के बाद देर शाम राज्यसभा में जवाब देते हुए कहा कि अन्ना हजारे द्वारा लोकपाल में जो मुख्य रूप से तीन सुझाव दिये गये थे उन्हें संसद ने स्वीकार कर लिया है और स्टैंडिग कमेटी के पास भेज दिया। इसके बाद उन्होंने अन्ना हजारे को विनती की कि वे अपना अनशन छोड़ दें।

अन्ना को प्रधानमंत्री का पत्र देकर रामलीला मैदान से बाहर निकले विलासराव देशमुख ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि आगे ऐसी कोई स्थिति नहीं आने दी जाएगी कि अन्ना को फिर से अनशन करना पड़े। पत्रकारों ने उनसे पूछा कि अन्ना इसे आधी जीत कह रहे हैं तो क्या आगे अन्ना को फिर अनशन करना पड़ सकता है? विलासराव देशमुख ने कहा कि सरकार उनकी सारी बातों को लोकपाल में शामिल करेगी और ऐसी स्थिति नहीं आने दी जाएगी।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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