हिमाचल में भी आसाराम के आश्रम – कुल्लू आश्रम पर अब ताला…

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-अरविन्द शर्मा||

हिमाचल यों तो देव भूमि है और यहाँ पर्वत पर्वत घाटी घाटी देवताओं का निवास है, परन्तु खुद को आज के भगवान् मानने वाले संतों महात्माओं ने भी इस भूमि पर दूर दूर तक अपने पाँव पसारे हुए है. इस दुनिया से अलविदा कह चुके भगवान् ओसो और पुथापूर्ति केसाईं राम ने भी इस प्रदेश की भूमि पर अपने पावं पसारे थे. आज भी कई संत महात्मा अपने अपने आश्रम हिमाचल की शांत एवं स्वच्छ भूमि पर बना रहे हैं अथवा ऐसी ही योजनायें रखते हैं. किन्तु अब हिमाचल के लोग और सरकार आसानी से उन ढोंगियों  को धरम के नाम  पर प्रदेश में पैर फैलाने नहीं देंगें जो जनता के विश्वास को ठेस पहुंचाते हैं.Asaram-under custody

आसाराम के सैक्स स्कैंडल में फंसने से बाबाओं की विश्वसनियता संदेह के घेरे में है. आसाराम  ने का काम ही कुछ ऐसा किया है की उनका नाम आज देश के  हर एक व्यक्ति की जुबान पर है. आसाराम की असलियत सामने पर  उनके अनुयायी इसे किस तरह से ले रहे हैं, यह अलग बात है, मगर आज देश के लोगों में गुस्सा धर्म की आड़ में जनता को धोखा दे रहे सभी बाबाओं पर हैं.

आसाराम की बात करें तो हिमाचल प्रदेश से भी उसका नाता है. हिमाचल प्रदेश में भी बड़ी संख्या में उसके अनुयायी मौजूद हैं. वह अक्सर यहाँ आते रहतें हैं. आसाराम ने बाकायदा यहां पर अपने आश्रम भी बना रखे हैं. बताया जाता है कि कुल्लू जिले के पतलीकूहल के साथ लगते बड़ाग्राम में आसाराम ने योग वेदांत समिति के नाम से करीबन डेढ़ बीघा जमीन ले रखी है, जहां पर आलीशान आश्रम बना रखा है. इस आश्रम की देखरेख का जिम्मा उनके पुत्र नारायण साई का है, जो हर साल यहां आता हैं. कुल्लू जिले में यह आश्रम बनने के बाद खुद आसाराम भी यहां पर दो दफा आ चुके हैं. यहां उन्होंने अनुयायियों के लिए सत्संग भी किया है. बताया जाता है कि जबसे आसाराम के खिलाफ दुष्कर्म का मामला सामने आया है, तभी से के इस आश्रम में भी ताला लटका हुआ है. आसाराम ने बिलासपुर में भी एक छोटा सा आश्रम बना रखा है, जहां पर सरकारी जमीन हथियाने का आरोप भी उन पर लगा है. बड़ाग्राम में भी आश्रम है .

श्रीश्री रविशंकर ने करीब पांच साल पहले कुल्लू के दियार गांव को गोद लेने का ऐलान तो किया है परन्तु इसे लेकर दियार के बाशिदों में गुस्सा है. उधर रामदेव से वह जमीन वापस ले ली गयी है, जो 96 बीघा जमीन भाजपा सरकार ने 2010 में योगगुरु की पतंजलि योगपीठ की शाखा स्थापित करने के लिए दी थी. जिले चंबा में किसी भी संत या बाबा का आश्रम नहीं है. हालांकि जिले के मुगला, उदयपुर, मोती टिब्बा में निरंकारी और राधा स्वामी सत्संग के केंद्र हैं.

सोलन जिले में करीब 1500 बीघा जमीन धार्मिक संस्थाओं के नाम है. राधा स्वामी सत्संग और पतंजलि योगपीठ के अतिरिक्त डगशाई में विश्वास फाउंडेशन के पास भी करीब 100 बीघा जमीन है. जबकि मौजूदा समय में बलात्कार के आरोपों में चर्चा में आए बाबा आसाराम का भी सोलन स्थित सलोगड़ा में एक बीघा भूमि पर आश्रम स्थापित किया गया है. साध्वी ऋतंभरा, बाबा राम भगत, स्वामी देव ऋषि के आश्रम भी यहाँ स्थापित किया है.

कांगड़ा जिले  में भी संतों के दर्जनों निवास या केंद्र हैं, जहां गंभीर साधना और योग आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है. जबकि कुछ स्थान मात्र आस्था का केंद्र ही हैं. जिले में राधा स्वामी सत्संग केंद्र, ब्रह्म कुमारी केंद्र, निरंकारी मिशन, ब्रह्म कुमारी आश्रम, गंभीर साधना के आध्यात्मिक केंद्र, महात्मा शेषराम आश्रम, विदेशी महिला बेटली की देखरेख में महात्मा विशुद्धानंद का आध्यात्मिक केंद्र, बंगाली महात्मा का घटाटोप आश्रम, कंडबाड़ी में बाबा अमर ज्योति महावतार मेडिटेशन सेंटर, लंघा माता मंदिर आश्रम, नगरी में डेरा सच्चा सौदा आश्रम, डाढ में स्वामी रामगुरूमत मिशन, नगरी में आसाराम का केंद्र, कुठमां में भी आसाराम की आश्रम बनाने की योजना, सिद्धबाड़ी स्थित चिन्मय तपोवन आश्रम, शिल्ला रोड पर संत निरंकारी मिशन केंद्र व रामनगर में इकजोत आश्रम प्रमुख हैं. मंडी के हर कस्बे में आश्रम और छोटी काशी की हर पंचायत-कस्बे में संत बाबाओं के आश्रम विराजमान हैं. जिले में सुंदरनगर में सुंधाशु जी महाराज, मंडी शहर में ब्रह्म कुमारी और निरकांरी मिशन, सुंधाशु महाराज का आश्रम है. सिरमौर में भी करीब आधा दर्जन आश्रम व भवन ऐसे हैं, जिनमें विभिन्न धार्मिक संस्थाओं के प्रवचन व सत्संग आदि होते हैं. इनमें सबसे बहुचर्चित संत बाबा आसाराम का आश्रम पांवटा साहिब के पातलियों में है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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