रेलवे में 17000 करोड़ के घोटाले का राज़फाश…

admin

-जोजी जोसेफ||

नई दिल्ली.. पहले से ही कई घोटालों के आरोपों में घिरी यूपीए सरकार एक और घोटाले में फंसती दिख रही है. नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) ने अपनी एक ताजा ऑडिट रिर्पोट में कहा है कि रेलवे की ट्रांसपोर्टेशन नीतियों के चलते सरकार को 17000 करोड़ के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है.goods train

कैग द्वारा लौह अयस्कों के ट्रांसपोर्टेशन के लिए अपनाई गई रेलवे की दोहरी पॉलिसी के ऑडिट के बाद उन आशंकाओं की पुष्टि हो गई है, जिसमें निर्यातकों द्वारा इस पॉलिसी के दुरुपयोग होने की आशंका जताई जा रही थी. सीबीआई पहले ही ऐसे कुछ मामलों की जांच रही है.

इस स्कैंडल की शुरुआत वर्ष 2008 में तब हुई जब लौह अयस्कों के निर्यात के लिए रेलवे ने दोहरे मू्ल्य की पॉलिसी शुरू की. इस पॉलिसी के तहत घरेलू उपयोग के लिए लौह अयस्कों का ट्रांसपोर्ट करने वाले ट्रांसपोर्टरों को इसका निर्यात करने वालों की अपेक्षा सस्ती दरों पर ट्रांसपोर्ट करने की सुविधा दी गई. निर्यात के लिए लौह अयस्कों के ट्रांसपोर्टेशन का खर्चा घरेलू उपयोग के लिए किए जाने वाले ट्रांसपोर्टेशन की तुलना में तीन गुना ज्यादा था.

कैग ने रेलवे मंत्रालय को भेजे गए अपने एक ड्राफ्ट नें कहा है कि सरकार को बकाया राशियों से लगभग 17000 हजार करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ है. यह आंकड़ा 75 लोडिंग पॉइंट्स में से सिर्फ 26 और 41 अनलोडिंग पॉइंट्स में से 10 की ऑडिट पर आधारित है.

कैग की यह रिर्पोट रेलवे के उन तीन जोनों की ऑडिट पर आधारित है, जहां लौह अयस्कों की सबसे ज्यादा लोडिंग की जाती है. इन जोनों में दक्षिण पूर्वी, दक्षिण पश्चिम और पूर्व की सीमा शामिल है. इस गणना में मई 2008 से मार्च 2012 के बीच किए गए ट्रांसपोर्टेशन की गणना शामिल है.

कैग को ऐसे कई तथ्य मिले हैं जिससे पता चलता है कि कैसे निर्यातकों ने इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया. घरेलू दरों पर ट्रांसपोर्टेशन की सुविधा के लिए शपथ पत्र और क्षतिपूर्ति नोट आदि जैसे कई दस्तावेज प्रस्तुत करना आवश्यक था. ऑडिट में पाया गया कि 126 पार्टियां ऐसी थीं जिन्होंने मई 2008 से 31 मार्च 2012 के बीच लौह अयस्कों के ट्रांसपोर्टेशन के लिए 386 रैक की बुकिंग के पहले इनमें से आवश्यक दस्तावेज में से एक भी पेश जमा नहीं किया.

कैग के अनुसार,’रेलवे प्रशासन ने यह जानते हुए भी कि इन पार्टियों को घरेलू दरों पर ट्रांसपोर्टेशन की सुविधा दे दी कि इन पार्टियों ने आवश्यक दस्तावेजों में से एक भी प्रस्तुत नहीं किया था.’ इससे रेलवे को 258.38 करोड़ का नुकसान हुआ. कैग के अनुसार, ‘यह दिखाता है कि रेलवे के प्रशासनिक कर्मचारियों और उन पार्टियों के बाच सांठगांठ थी.’

ऑडिट में उन 290 और पार्टियों का उल्लेख किय़ा गया है जिन्हें घरेलू दरों की सुविधा बिना जरूरी दस्तावेजों के पूरे किए ही दे दी गई. रेलवे के इस कदम से सिर्फ दक्षिण पूर्वी रेलवे को ही 2090.15 करोड़ रुपय़े के राजस्व का नुकसान हुआ. जबकि दस्तावेजों की आंशिक प्रस्तुति के कारण कुल 2228.30 करोड़ रुपये राजस्व का नुकसान हुआ.

कैग के अनुसार,’दस्तावेजों के न भरने/दस्तावेजों की आंशिक प्रस्तुति के कारण कुल 2343.53 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ.’ कैग ने अपनी जांच में पाया कि अक्टूबर 2012 से मार्च 2013 के बीच 153 पार्टियां ऐसी थी जिन्होंने कोई दस्तावेज जमा नहीं किया जबकि 290 पार्टियां सभी जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने में नाकाम रही थीं. यह दिखाता है कि इन पार्टियों ने जानबूझकर घरेलू दरों की परिस्थितयों के बारे में धोखाधड़ी की और इसलिए इन पर जुर्माना लगाया जाना चाहिए.

(सौ: एनबीटी)

Facebook Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Next Post

मुजफ्फरनगर में हिंसा, सेना तैनात...

मुजफ्फरनगर में पिछले सात दिनों से हो रही छिटपुट हिंसक घटनाओं व बने तनाव का माहौल शनिवार को सांप्रदायिक टकराव के रूप बदल गया. हिंसा की लपटों में पड़ोसी जिले मेरठ के हस्तिनापुर और रामराज कस्बे भी झुलस गए. जिले में अलग-अलग स्थानों पर दो संप्रदायों के बीच हुई मारपीट, […]
Facebook
escort eskişehir - lidyabet - macbook servis - kabak koyu
%d bloggers like this: