दिखाकर कोर्ट का डर और “लक्ष्मी” धरी जेब के अंदर

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पंचनामा के बाद भी 500 की रसीद देकर वसूले 700.. ट्रैफिक एएसआई की करतूत कैमरे में कैद…

 -प्रतीक चौहान||

रायपुर शहर में बढ़ते ट्रैफिक के दबाव को देखते हुए राजधानी की ट्रैफिक पुलिस नो पार्किंग में खड़ी गाडिय़ों पर सख्ती से कार्रवाई कर रही है. लेकिन ट्रैफिक पुलिस के अधिकारी सख्ती दिखाकर लोगों से अवैध वसूली कर रहे है. पहले तो ये अधिकारी संबंधित गाड़ी की जब्ती बनाते हैं. फिर गाड़ी कोर्ट से छुड़ाने का डर दिखाकर ज्यादा पैसे ले रहे है.madhusudan

शुक्रवार को भी कुछ ऐसा ही हुआ. ट्रैफिक एएसआई मकसूदन पटेल ने शास्त्री चौक के पास नो पार्किंग में खड़ी एक दुपहिया वाहन जिसका नंबर सीजी 04 डीवी 1901 है. पहले तो ट्रैफिक सिपाही ने इस गाड़ी मालिक से 500 रूपए का चालान पटाने के लिए कहा लेकिन जब गाड़ी मालिक ने इतने पैसे न होने की बात कही तो सिपाही भड़क गया. फिर सिपाही ने इसकी शिकायत अपने एएसआई से की. इसके बाद ट्रैफिक अधिकारी ने उस नो पार्किंग में खड़ी उस गाड़ी पर धारा 39/192 लगा दी. यह बिना रजिस्ट्रेशन की धारा है.

ट्रैफिक अधिकारी का कहना है कि चूंकि गाड़ी में नंबर गलत ढंग से लिखा था इस लिए उन्होंने ये धारा लगाई. यहां तक तो सब ठीक था. लेकिन थोड़ी देर बाद जब गाड़ी मालिक ने 500 रूपए न होने की बात कही तो ट्रैफिक अधिकारी ने उस गाड़ी की जब्ती बनाई और गाड़ी मालिक को पंचनामा बनाकर थमा दिया और कहा अब लगाते रहो कोर्ट के चक्कर और मजिस्ट्रेट के पास ही जमा करना फाइन. इसके बाद गाड़ी मालिक ने अधिकारी से काफी निवेदन किया कि वो पैसे अपने दोस्त से मंगवा रहा है और वो पंचनामा न बनाए लेकिन उस अधिकारी ने बड़े अधिकारियों के आदेश का पालन करने की बात कह कर गाड़ी को पुलिस मुख्यालय भेज दिया.

ऐसा अधिकारी ने उस पंचनामे में लिखा है. जबकि गाड़ी अधिकारी ने ट्रैफिक थाने में भेज दी. फिर कुछ घंटों बाद जब गाड़ी मालिक ने 500 रूपए फाइन पटाने के लिए हामी भर दी और कहा कि सर मेरे दोस्त ने पैसे ला दिए है आप 500 का चालान काट दीजिए  तब ट्रैफिक एएसआई श्री पटेल का कहना था कि अब 500 नहीं 700 का चालान कटेगा. और ये पूरे पैसे शासन के खाते में जमा होंगे. ऐसे में गाड़ी मालिक ने पूरे 700 रूपए फाइन पटाने में हामी भर दी. फिर अधिकारी ने गाड़ी मालिक से पूरे 700 रूपए ले लिए. और अपने आरक्षक दिनेश साहू से चालान बनाने को कहा. आरक्षक ने चालान तो बनाया लेकिन 500 रूपए का. फिर आरक्षक और एएसआई ने गाड़ी मालिक से उस रसीद बुक में हस्ताक्षर भी करवा लिए.

1234लेकिन उस एएसआई को ये पता नहीं था कि उनकी ये करतूत खुफिया कैमरे में कैद हो रही है. चूकि गाड़ी मालिक की गाड़ी 6 घंटे से थाने में जमा थी इस लिए गाड़ी मालिक ने भी उक्त अधिकारी से ज्यादा बहस नहीं की और उस रसीद बुक पर अपने हस्ताक्षर कर दिया. गाड़ी थाने से छूटने के बाद जब गाड़ी मालिक ने उस अधिकारी के पास और उनसे पूछा कि आपने पहले तो कहा कि 700 की रसीद काटेंगे इस लिए मैने आपको पूरे पैसे दिए लेकिन आपने तो 500 रूपए की ही रसीद काटी. इस पर एएसआई भड़क गए और उलटा चोर कोतवाल को डांटे की कहावत को सच साबित करते हुए गाड़ी मालिक से कहने लगे कि क्या सबूत है आपके पास कि मैने 700 रूपए लिए मैने तो 500 रूपए ही लिए और आपने हस्ताक्षर भी किए है.

– यदि ज्यादा पैसे लेकर किसी भी अधिकारी ने कम की रसीद काटी है तो ये गलत है. शिकायत मिलने पर ऐसे अधिकारी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.

बलराम हिरवानी  (एएसपी ट्रैफिक रायपुर)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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2 thoughts on “दिखाकर कोर्ट का डर और “लक्ष्मी” धरी जेब के अंदर

  1. देखिये आज के डाकू बड़े कंजूस हो गए है पहले दान्कू आते थे तो बड़ी बड़ी बंदूके लाते थे मुह पर कपड़ा भी बाँध लेते थे मुह धक्लेते थे सायद उनेह शर्म लगाती होंगी की किसी को लूट रहे है तो मुह धक् लेते थे आज देश ने तर्र्क्की कर ली है मुह खुला रहा ता है बर्दी बन व ली है टोपी भी लगाने लेंगे है तारे सितारे भी कन्धो पर लगा लेते है रासिद कट्टा ले कर ही चले आते है बड़ी कंजूसी करते है बन्दुक नहीं लाते तलवार भी नहीं लाते बाद बेशर्म की तरह खुले मुह ही सामने आजाते है ओउर्र लूट ते भी है ते हमारे देश की उन्नति का कारण एसा हो रहा है आप लोग अपने बच्चो को डाकू लूटेर के बारे में अगर बताने की कोश्सिश करे तो जरुर बताना किचोर डाकू कैसे होते है वो कैसे लुटे है किताबो में भी एसा ही लिखाण जिस से बच्चे सावधान रह सके
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  2. jab hamare yanha chor douket aate hai to bandook talwar le kar aate hai fier loote the muh dhak ke aate hai saayad uneh thodi sharm lagat hongi ki bo kisi ko loot rahe hai muh dhak ke kaam kar lo aaj thode tarrikki kar li ienih longo ne bardi pahan li hai taatre sitarre laga liye hai kanndho par topi bhi pahan li hai rasid kataa bhi ban wa liya hai lekin ham longo vo banduk nahi dikhate talwar nahi dikhate bas free mai hi sidhe lootane ki koshishs karte hai bina talwar banduk ke hi loota lete hai bade kanjus log hai.

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