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अनदेखी के कारण विमान संचालन नहीं.. 80 करोड़ की लागत से बना था एयरपोर्ट… 

-सिकंदर शैख़||

पर्यटकों और उद्योगपतियों को आकर्षित करने के लिए जैसलमेर में 80 करोड़ की लागत से बनाया गया एयरपोर्ट पिछले 6 माह से ताले में बंद है. यहां से न तो किसी फ्लाइट का संचालन हो रहा है, न ही इस दिशा में सरकार गंभीर दिख रही है.jaisal_port8713

जैसलमेर में सिविल एअरपोर्ट पिछले छः महीने से बनकर तैयार पड़ा है मगर अब तक इसका विधिवत शुभारम्भ नहीं हो पाया है. जिससे जैसलमेर के पर्यटन सीजन को नए पंख लगाने की योजना हवाई सपने सिद्ध हो रही है क्योंकि जुलाई माह से ही जैसलमेर में पर्यटन सीजन का आगाज़ हो चुका है.  चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इसी साल मार्च में तैयार हो गए इस एयरपोर्ट को लेकर सिविल एविएशन के डायरेक्टर को जानकारी तक नहीं है कि यहां इसी सितंबर से विमान संचालन होना था.

यह हाल तो तब है, जब राज्य सरकार के आग्रह पर ही एयरपोर्ट अथॉरिटी ने इसका निर्माण किया है. एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के मुताबिक जैसलमेर एयरपोर्ट का निर्माण कर दिया है. यह निर्माण केंद्रीय मंत्रालय और राज्य सरकार के बीच हुई कई बैठकों के बाद हुआ है, लेकिन राज्य सरकार ने वहां फ्लाइटों के संचालन के लिए कोई पहल नहीं की है. और सूना पड़ा है जैसलमेर एयरपोर्ट.

गौरतलब है की यदि जैसलमेर का एअरपोर्ट शुरू हो जाता है और मुंबई से आने वाले पर्यटकों को सीढ़ी विमान सेवा मिले से यहाँ पर पर्यटकों की संख्या में भारी इजाफा होने की संभावना है जिससे यहाँ के पर्यटन को बढ़ावा भी मिलेगा साथ ही साथ पर्यटन से जुड़ें लोगों को भी रोजगार में काफी फायदा भी होगा.

प्रदेश में अभी इंटर स्टेट फ्लाइट कनेक्टिविटी नहीं है. इसके लिए नई उड़ानें शुरू कराने का काम राज्य सरकार का है, क्योंकि विमानन कंपनियां घाटे की आशंका के कारण नई जगह से ऐसा नहीं करती. सरकार उड़ानों की कुछ सीटें रिजर्व करती है ताकि कंपनियां फ्लाइटें संचालित कर सकें. सरकार ने यह पहल नहीं की.

प्रदेश में फ्यूल पर 20% टैक्स है, जबकि 2008 में यह 4 प्रतिशत था. पांच साल पहले हुई इस बढ़ोतरी के कारण प्रदेश में फ्लाइटों की संख्या घटकर 36 से 23 रह गई. अगर प्रदेश सरकार इस तरफ ध्यान देंगी तो बड़े निवेशक भी प्रदेश में निवेश के लिए आगे आयेंगे और विमान सेवा बढ़ने से यहाँ पर पर्यटकों का भी इजाफा होगा जिसे रेवन्यू भी बढेगा. जिला कलेक्ट्र जैसलमेर नारायण लाल मीना कहते हैं की ” शुभारम्भ की वार्ता चल रही है और जैसे ही तारीख तय होगी तब जैसा की विमान ऑथोरिटी ने बताया है शुरू हो जाएगा और उनके हिसाब से विमान कम्पनियों से भी बात चल रही है जैसे ही कोई तैयार होगा तो शुरू हो पायेगा एअरपोर्ट.

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By admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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