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-संगीता शर्मा||

जोधपुर, नाबालिग लड़की से दुराचार करने के आरोपी विवादास्पद आसाराम को चौदह दिन की न्यायिक हिरासत पर भेज दिया गया है. दो दिन पुलिस की कस्टडी में रहे आसाराम को शाम को जोधपुर  स्थित सेंट्रल जेल में भेज दिया गया. वहां उन्हें आम कैदियों की तरह नहीं बलिक हार्इ प्रोफाइल संत के रूप में ही इज्जत बख्शी जा रही है. उन्हें बहुचर्चित भंवरी कांड के मुख्य आरोपी विधायक महिपाल मदेरणा और मलखान की तरह बैरक में नहीं बल्कि जेल में अस्पताल के एयर कूल्ड वार्ड में ही एकांत में रखा गया है. वहां उनको मिनरल वाटर से लेकर जूस व फल भी परोसे गए. जेल के जेलर से लेकर नंबरदार जेल भी उनकी सेवा कर रहे है. बापू के लिए अस्पताल के बेड पर आश्रम से आए बिस्तर व चद्दर बिछाए गए है. उन्होने अस्पताल वार्ड में पहुंचते ही वहां जेल अधिकारियों का उनसे मिलने का सिलसिला चल पड़ा. उन्हें वहां  वीआर्इपी ट्रीटमेंट दिया जा रहा है.Asaram-Jodhpur-Jail

कडे सुरक्षा बंदोबस्त के बीच जेल में आसाराम के पहुंचते ही जेल अधीक्षक के कक्ष में ही उनका मेडिकल मुआयना करवाया गया. वहां पहुंचते ही दो दिन पुलिस पूछताछ से उकता चुके आसाराम के चेहरे तनाव की लकीरे स्पष्ट  नजर आर्इ, लेकिन कुछ देर में जेल अधिकारियों से मिले वीआर्इपी ट्रीटमेंट से वे रिलेक्स हो गए. वे वहां मौजूद अपने वकील से लेकर मौजूद पुलिस व जेल अधिकारियों से बतियाने लगे. उन्होने अपने बेटे से भी फोन पर बात की. चेकअप करने वाले डाक्टर ने उन्हें फिट बताया, लेकिन आसाराम को आम कैदियों की तरह बैरक में ले जाने की बजाए उन्हें सीधे अस्पताल के वार्ड में रखा गया.

उनके वहां पहुंचने से पहले आश्रम से मंगवाए गए चद्दर और बिस्तर उनके लिए बेड नंबर दो पर लग चुके थे. उनके जेल के मुख्य द्वार से भीतर जेल अधीक्षक देवेन्द्रसिंह खुद उन्हें ले गए. उनके गेट से अस्पताल पहुंचने तक जेलर और बंदियों का पैर छूने का सिलसिला चलता रहा. मानों आसाराम दुराचार के आरोप में नहीं बल्कि जेल में प्रवचन देने आए हो और उनके आने से जेल परिसर निहाल हो गया. एसी वाले वार्ड में पहुंचते ही नबंरदार ने आसाराम को हाथ मूंह घुलवाए और वे पलंग पर बैठ गए. एक नंबरदार उनके पैर दबाने लगा और आसाराम ने वहां अधिकारियों को प्रवचन देना शुरू कर दिया. इस बीच जेल में अन्य नंबरदार और जेल वार्डन वगैरह सब उनकी हाजरी में खड़े हो गए. बाद में आसाराम को जूस और फल परोसे गए. उन्होने जूस पीया और फल बाद में खाने की बात कही. बाद मे आसाराम पलंग पर लेट गए.

वहां वे कभी बैचेन होकर राम राम करते हुए बैठ जाते तो कभी करवटे बदलते हुए जोर से जोर चिल्लाते हुए अपने को बेकूसर बताते हुए सबको देख लेने की भी बात कहने लगते.  हालांकि जेल प्रशासन ने उन्हें आम कैदियों की तरह बैरक में अकेले रखने की बात कही है लेकिन उन्हे एसी वाले वार्ड में उनकी पूरी सार संभाल की जा रही है. गौरतलब है कि फिल्म अभिनेता सलमान को भी अलग बैरक में कैदी महेश के साथ रखा गया था और उन्हें तमाम सुविधाए देने के साथ लजीज खाना परोसा गया था. बीते एक साल से जोधपुर जेल में रहे विधायक महिपाल मदेरणा और मलखान विश्नोई को भी अस्पताल के वार्ड में रखा गया था. उन्हें भी वहां वीआर्इपी ट्रीटमेंट दिया गया थ. अब उन दोनों को वहां से शिफ्ट कर दिया गया है. सबसे सुरक्षित माने जाने वाले जोधपुर जेल में अभी 28 आतंकवादी  बंद है और यहां पूर्व में खालिस्तान  समर्थक और कश्मीर अलगाववादी नेताओं को भी रखा गया था. जोधपुर जेल कुख्यात आतंकवादी अलताफ अंसारी के  अपने एक सहयोगी को छुड़ाने के लिए जेल पर हमला बोलने की शाजिश का खुलासा होने पर सुर्खियों में आर्इ थी. तब से जेल में आरएसी लगाने से लेकर तमाम कड़े सुरक्षा बंदोबस्त किए गए है.

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By admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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