रघुनाथपुर ताप विद्युत केंद्र के खिलाफ सिंगुर जैसा आंदोलन संभव…

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-एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास||

बंगाल में फिर सिंगुर जैसे आंदोलन की जमीन बन रही है. पुरुलिया जिले में एशिया में दूसरे बड़े ताप विद्युत केंद्र बनाने की दामोदर वैली कारपोरेशन की प्रगति थम गयी है, जबकि छह हजार करोड़ रुपये के व्यय से छह सौ मेगावट उत्पादन क्षमते के दो इकाइयों का काम भी पूरा हो गया है. अब बाकी दो यूनिटों का काम पूरा किया जाना है, जिनमें 1320 मेगावट बिजली का उत्पादन होना है. इन यूनिटों पर दस हजार करोड़ रुपये खर्च होने हैं. लेकिन जमीन अधिग्रहण को लेकर विवाद हो जाने से परियोजना अधर में लटक गयी है.raghunathpur

मां माटी मानुष की सरकार जबरन जमीन अधिग्रहण के खिलाफ हैं और बिजली संयंत्रो को चालू करने के लिए जरुरी जलापूर्ति के लिेए पाइप लाइन बिछाना ही असंभव हो गया है.

इस परियोजना को पंचेत जलाशय से पाइपलाइन के मार्फत जलापूर्ति होनी है और इसके लिए 51 एकड़ जमीन का अधिग्रहण हो गया. लेकिन अनिच्छुक किसानों ने जमीन के बदले मुआवजे का चेक लेने से ही इंकार कर दिया है.

जाहिर है उस जमीन पर काम शुरु नहीं हो पा रहा है.

रघुनाथपुर के महकमा प्रशासक प्रणव विश्वास के मुताबिक 2007-2008 के दौरान नितुड़िया ब्लाक के हासपाथर, रायबांध, मोनाग्राम, सिधपुर, दुर्गापुर, वीरबलडी, बाथानबाड़ी, भुरकुंडाबाड़ी, शालतोड़ा, गुनियाड़ा समेत ग्यारह गांवों के डेढ़ हजार किसानों के खेतों का अ्धिग्रहण हो गया. लेकिन उन्होंने अभीतक चेक नहीं लिया यानी वे अपना जमीन बेचना नहीं चाहते. अभी 21,22 और 23 अगस्त को रायबांध गांव में शिविर लगाकर चेक बांटने की कोशिश की गयी. लेकिन तीन दिन में सिर्फ तीन किसानों ने चेक लिया बाकी किसानों ने शिविर का बायकाट कर दिया.

raghunathpur1बाकायदा वहां जमीन बचाओ आंदोलन चल रहा है. भूमि रक्षा समिति के सहसभापति निखिल मंडल ने मांग की है कि मुआवजा बाजार भाव के मुताबिक देना होगा. हर परिवार से कम से कम एक व्यक्ति को नौकरी देनी होगी. इलाका का विकास करना होगा. समिति ने इस सिलसिले में ज्ञापन दिया हुआ है. पर मंडल का आरोप है कि उस ज्ञापन पर प्रशासन ने गौर ही नहीं किया है. इसीलिए कोई किसान चेक नहीं लेगा और भूमि रक्षासमिति का आंदोलन जारी रहेगा.

प्रशासन का इस पर दावा है कि किसान चाहे चेक ले या नहीं, जलापूर्ति के लिए पाइप लाइन का काम लंबे अरसे तक बंद नहीं रहेगा. समिति ने जवाब में सिंगुर नंदीग्राम की तरह आंदोलन की धमकी दी है. समिति के मुताबिक जब दीदी कानून बनाकर सिंगुर के किसानों को जमीन वापस दिलाने की बात कर रही है और नंदीग्राम में केमिकल हब ही रद्द हो गया तब उनकी जमीन जबरन कैसे ली जा सकती है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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