जोगी एक्सप्रेस को सोनिया का रेड सिग्नल…

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-प्रतीक चौहान||

रायपुर, छत्तीसगढ़ की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी माने जाने वाली कांग्रेस की गृह दशा कुछ ठीक नहीं चल रही है. पहले नक्सली हमले में पार्टी के कई बड़े नेता मारे गए. वहीं अब पार्टी की अंदरूनी खींचतान इतनी बढ़ गई कि बेपटरी हुई जोगी एक्सप्रेस को सोनिया ने रेड सिग्नल दिखा दिया है.Ajit Jogi

छत्तीसगढ़ के एक न्यूज चैनल की ब्रेकिंग न्यूज पर भरोसा किया जाए तो कांग्रेस पार्टी ने अजीत जोगी को दो दिन में पार्टी छोड़ने  का वक्त दिया है. कुछ सूत्रों का ये भी कहना है कि यदि दो दिनों में ऐसा नहीं हुआ तो पार्टी खुद कोई बड़ी कार्रवाई कर सकती है.

imagesशनिवार को एक ओर कांग्रेस का संगठन खेमा दंतेवाडा में कलश यात्रा के शुभारंभ में व्यस्त रहा, वहीं सागौन बंगले में राजनीति गरम रही. जोगी बंगले के सूत्रों के अनुसार जोगी अब अपनी उपेक्षा से त्रस्त होकर खुद भी पार्टी छोडऩे का मन बना रहे हैं. जोगी बंगले में आज भी उनके समर्थकों की भारी भीड़ जुटी और लोगों ने उनसे जल्दी ही सख्त निर्णय लेने की अपील की है.

सवाल ये है कि क्या जोगी नई पार्टी बनाएंगे. क्यों कि एक दिन पहले ही अजीत जोगी ने एक अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा था कि उनकी राजनीति सोनिया गांधी से ही शुरू होती है और सोनिया गांधी पर ही खत्म. ऐसे में नई पार्टी बनाने पर अभी भी संशय की स्थिति बनी हुई है. इसकी एक वजह पूरे प्रदेश में जोगी सबसे मजबूत है, इसमें भी लोगों शंका है. वहीं दूसरी ओर लगातार पिछले दो दिनों से अलग-अलग पार्टी के नेताओं ने जोगी को जगह देने की बात कही है. अब जोगी को तय करना है कि वो प्रदेश में तीसरे मोर्चे के साथ जाएं या अलग होकर सोनिया गांधी और कांग्रेस को अपनी ताकत दिखाए. कहां जाता है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चरणदास महंत को जोगी स्वीकार नहीं करते. यह एक बड़ी वजह है कि दोनों के बीच लड़ाई इतनी बढ़ गई कि अब बात पार्टी से अलग होने या निकाले जाने तक पहुंच गई है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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2 thoughts on “जोगी एक्सप्रेस को सोनिया का रेड सिग्नल…

  1. जोगी भी अपने राजनातिक जीवन की एंटी लड़ाई लड़ रहें हैं.आज के युग में उनके सभी पांसे उलटे पद रहें है,इसलिए कभी हताश हो डींग मारने के लिए लंगोटा घुमाने की बात करते हैं,कभी सोनिया के चरणों में पड़ते हैं.पर अब खेल की अंतिम तीन चार चाले ही रही हैं,जिसमें वे शाह देने का ढोंग कर रहें है,पर हाथ आने वाला कुछ नहीं.पार्टी भी उनसे पिंड छुड़ाना चाहती है,पर अब दोनों ही एक दुसरे को छोड़ नहीं पा रहे,कांग्रेस ने उनसे मुक्ति नहीं पाई तो वह अपना मैदान खो बैठेगी.

  2. जोगी भी अपने राजनातिक जीवन की एंटी लड़ाई लड़ रहें हैं.आज के युग में उनके सभी पांसे उलटे पद रहें है,इसलिए कभी हताश हो डींग मारने के लिए लंगोटा घुमाने की बात करते हैं,कभी सोनिया के चरणों में पड़ते हैं.पर अब खेल की अंतिम तीन चार चाले ही रही हैं,जिसमें वे शाह देने का ढोंग कर रहें है,पर हाथ आने वाला कुछ नहीं.पार्टी भी उनसे पिंड छुड़ाना चाहती है,पर अब दोनों ही एक दुसरे को छोड़ नहीं पा रहे,कांग्रेस ने उनसे मुक्ति नहीं पाई तो वह अपना मैदान खो बैठेगी.

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