नमो ने लगाई ममो पर सवालों की बौछार…

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स्वतंत्रता दिवस पर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने भुज के लालन कॉलेज में तिरंगा फहराया. इस दौरान अपने भाषण में मोदी ने गुजरात की उपलब्धियों का जिक्र करने के साथ ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लाल किले से दिए गए संबोधन पर जमकर हमला बोला. मोदी ने कहा कि पीएम ने अपने भाषण में सिर्फ एक परिवार का ही जिक्र किया. पीएम ने भ्रष्टाचार पर भी कुछ नहीं किया. मोदी ने मनमोहन को आर्थिक नीतियों से लेकर विदेश नीति तक घेरा.narendra_modi

राष्ट्रपति के संबोधन का किया जिक्र

मोदी ने अपने भाषण में राष्ट्रपति के संबोधन का भी जिक्र किया. मोदी ने कहा कि आजादी की जंग में गुजरात का बड़ा योगदान है. आजादी के इतने साल बाद. संसद, विधानसभा अखाड़ा बन गई है. राष्ट्रपति की चिंता इस बात से है कि सत्ता में दल संसद और विधानसभा नहीं चलने देते हैं. संसद की इज्जत को बनाए रखने के लिए यथोचित प्रयास करें.

सहनशक्ति की सीमा होती है:-मोदी

पाकिस्तान का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सहनशक्ति की एक सीमा होती है. आशा थी कि पीएम राष्ट्रपति की चिंता पर जवाब देते. पीएम से ये सुनने को नहीं मिला. अंतरराष्ट्रीय संबंधों को देखते हुए कैसे बोलना चाहिए, ये मैं जानता हूं. सेना का आत्मविश्वास बना रहे. सेना के मनोबल को शक्ति देने का प्रयास करना चाहिए था. लालकिला देश की सेना का मनोबल बढ़ाने की जगह है. सहनशीलता का फैसला केंद्र करना चाहिए. सवाल पाकिस्तान का नहीं, देश की सुरक्षा का है. चीन आजाद भारत की सीमा पर अड़ंगा डाल रहा है. देश चुपचाप देखता है. तब सुरक्षा का सवाल खड़ा होता है. केरल में इटली के सैनिक देश कें मछुआरों को मार दे, पाक के सैनिक हमारे सैनिकों को मार डाले इससे चिंता होती है. भारत के राष्ट्रपति की चिंता के साथ मैं भी हूं.

भ्रष्टाचार पर पीएम चुप्प क्यों?

मोदी ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लाल किले से पीएम कुछ बोलते. राष्ट्रपति की भावना का आदर करना पीएम का पहला कर्तव्य होता है. लेकिन वो कुछ नहीं बोले. भ्रष्टाचार देश की पीड़ा है. भाई भतीजावाद, मामा-भांजा और सास-दामाद का दौर चल रहा है. देश तबाह हो रहा है. शासन में बैठे लोग बुरी तरह लूट रहे हैं. मुंह पर ताले लगाकर देश चलाया जा रहा है.

शास्त्री-पटेल का जिक्र क्यों नहीं?

लालकिले से भारत के पीएम का भाषण सुन रहा था, गुजरात का मंत्र रहा है भारत का विकास के लिए गुजरात का विकास. ये दायित्व हम सभी को निभाना चाहिए. हमें पीएम से अच्छे संदेश की आशा थी. आप इस देश के पीएम हैं सभी सरकारों के काम से ही देश आगे पहुंचा है. पीएम लालकिले से भाषण में एक परिवार का स्मरण कर रहे थे. वो सरदार पटेल को भी याद करते लालकिले से. पंडित नेहरू का जिक्र, इंदिरा, राजीव का जिक्र कर रहे थे तो लाल बहादुर शास्त्री का जिक्र कर लेते पीएम.

परिवार भक्ति में डूबे पीएम-मोदी

राजनीति या परिवारवाद नहीं होना चाहिए था. वाजयपेयी को याद नहीं करें तो ये समझ में आता है लेकिन शास्त्री को याद नहीं किया ये बात पीड़ा देती है. पीएम एक परिवार की भक्ति में डूब गए हैं. देश को चिंता हो रही है. पंडित नेहरू ने जो अपने पहले भाषण में कहा था वहीं आपने भी गिनाया तो आपने देश को क्या दिया. कच्छ से बोल रहा हूं मेरी आवाज पाकिस्तान को पहले सुनाई देती है. देश की सरकार को बाद में सुनाई देती है.

पीएम की आर्थिक नीतियों पर हमला

मोदी ने कहा कि रुपये का स्तर गिर रहा है. इसके लिए जिम्मेदार कौन है? आपने वैश्रि्वक मंदी का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया. कोई राज्य सरकार के विकास में बाधा की जिम्मेदार केंद्र की नीतियां हैं. फूड सिक्योरिटी बिल में कमियां हैं. हमने बिल का विरोध नहीं किया है. कमियों को दूर करना जरूरी है. कमियों को दूर करने की नहीं सोच रहे हैं. गरीब की थाली में नमक, एसिड छिड़कते जा रहे हैं.

स्वतंत्रा दिवस के अवसर गुजरात के मुख्यमंत्री में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर तिरंगा फहराया. इस अवसर पर उन्होंने सभी देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई देत हुए कहा कि आजादी के लिए जान देने वालों को याद करें. प्रधानमंत्री को ललकारते हुए उन्होंने कहा कि देश को नई सोच की जरूरत है हमें गुलामी की मानसिकता से बाहर निकला होगा. उन्होंने कहा कि जिस तरह से देश के वीर जवानों ने अंग्रेजों से मुक्ति दिलाई हम देश को भ्रष्टाचार और महंगाई, असुरक्षा, भय से मुक्ति दिलाएंगे.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को चुनौती देते हुए उन्होंने कहा कि आपके भाषण से हमें काफी निराशा हुई है. अपने भाषण में मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति के भाषण में पीड़ा झलकी लेकिन पीएम के भाषण में कुछ नया नहीं दिखा. कच्छ जिले के भुज में देशवासियों को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति देश ने व्याप्त भ्रष्टाचार पर गहरी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि लाल किले पर झंडा फहराते हुए प्रधानमंत्री ने कोई नई बात नहीं की उन्होंने सिर्फ एक ही परिवार को याद किया जबकि आजादी में योगदान देने और देश को आगे ले जाने और विकास में योगदान देने वाले सरदार वल्लभ भाई पटेल और लाल बहादुर शास्त्री को याद नहीं किया.

मोदी ने कहा कि पड़ोसी देश मेरी आवाज पहले सुनता है लेकिन दिल्ली बाद में सुनता. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को ललकारते हुए कहा कि देश में महंगाई, बेरोजगारी चरम पर है. देश का आम आदमी त्रस्त है.

(जागरण)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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