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कोई तो बताये कहाँ से आया इतना रुपया अन्ना टीम के पास?

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-सुग्रोवर||
इसमें कोई शक या शुबह नहीं कि अन्ना हजारे एक निहायत नेक किस्म के देशभक्त इन्सान हैं और उनके अनशन के पीछे उनका देशभक्ति का ज़ज्बा ही काम कर रहा है. लेकिन यही बात अन्ना की टीम के बारे में कहना मेरे लिए तब तक संभव नहीं है, जब तक की टीम अन्ना इस आन्दोलन में पारदर्शिता न लाये और कुछ सवालों का संतुष्ट करने वाला जवाब ना दे दे.
यह तो एक बच्चा भी जानता है कि इस आन्दोलन को परवान चढ़ाने पर काफी खर्चा किया गया होगा. जानकारों का मानना है कि इस पर करीब पचास से सत्तर करोड़ रुपये खर्च किये गए होंगे. ऐसे में जेहन में एक सवाल बारम्बार उमड़ता है कि इतनी बड़ी राशि आखिर जुटायी कैसे गयी होगी? कहाँ से आया ये धन? आखिर कौन है इतना बड़ा दानदाता? क्या नाम है उसका? करता क्या है वोह?  क्या फायदा है उस धन्ना सेठ का इस आन्दोलन से?

 

गरीब मजदूरों से तो उम्मीद कि नहीं जा सकती कि ये राशि उन्होंने अपनी मज़दूरी में से निकाल कर दे दी होगी. खुद केजरीवाल या किरण बेदी अपनी जेब से इतनी बड़ी राशि खर्च करने की हैसियत नहीं रखते. रहा सवाल भूषण पिता पुत्र की जोड़ी का तो वे भी इतने बड़े देशभक्त नहीं जो अपनी गांठ ढीली कर दें और वोह भी गुप-चुप में.

 

निश्चित तौर पर कोई धन्ना सेठ ही होगा जिसने ये राशि उपलब्ध करवाई होगी. अगर ये सच है, तो उसका नाम जनता के सामने आना चाहिए ताकि इस देश की जनता यह जान सके कि उसे छला तो नहीं जा रहा. किसी का हित साधन तो नहीं हो रहा इस आन्दोलन के ज़रिये? हो सकता है कि आप लोग इन सवालों को भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन को कमज़ोर करने कि चाल समझें लेकिन आप भी ठन्डे दिमाग से इन सवालों पर गौर करेंगे तो ये सवाल जो अब तक सिर्फ मुझे ही नहीं, बड़े बड़े बुध्दिजीवियों के दिलो-दिमाग में गूंज रहें हैं, आपके मस्तिष्क में भी कोहराम मचा देगें.
मेरे इन सवालों का कोई जवाब आपको सूझता हो तो कृपया बताएं.

About Post Author

admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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45 thoughts on “कोई तो बताये कहाँ से आया इतना रुपया अन्ना टीम के पास?

  1. माननीय प्रधान सम्पादक.
    सादर प्रणाम

    मुक्तक
    जीत लें विश्वास अपना तब कोई खटका नहीं.
    फिर कभी तूफ़ान में भी आदमी रुकता नहीं.
    हौंसलों से हाथ ऊपर हम उठाएँ दोस्तो.
    कौन कहता है भला की आसमाँ झुकता नहीं.

    मैं एक ग़ज़लकार,साहित्यकार ,मास्टर ऑफ़ आर्ट ऑफ़ लिविंग ,योग साधक ,समाज सेवी दिल्ली निवासी हूँ!
    लगभग बीस वर्षों से देश हित में देश की दशा व् दिशा के सुझाव में माननीय प्रधान मंत्री व् देश वासियों को.
    लिखता आया हूँ किन्तु वही ढाक के तीन पात! भ्रष्टाचार एक कैंसर रोग जैसा है जो भारत सहित समस्त विश्व में.
    व्याप्त है! आप बुद्धिजीवी इन पांच सुझावों पर अमल करने की किरपा करेंगे तो मेरा दावा है देश की दशा व् दिशा ही बदल जाएगी!

    १—-विवाह उपरान्त पांच वर्ष में मात्र एक बच्चा.
    २—-नस बंदी अभियान….दो व् दो से अधिक जिनके बच्चे हों उनकी नसबंदी अनिवार्य.
    ३…..बंगला देशियों व् अवैध रूप से निवास करने वाले विदेशियों को देश निकाला!
    ४……सामान नागरिक अधिकार!
    ५—कानून की लचर व् ढुल-मुल व्यवस्था को सही दिशा देना!

    पेश-ए-खिदमत हैं चंद रुबाई.

    तक़दीर मे क्या-क्या न लिखा होता है.
    हर शख्स का यूँ ख़्वाब जुदा होता है.
    जो खुद को मिटा देता है ओरों के लिए.
    इन्सान वही सबसे भला होता है.

    कुछ लोग कहाँ खाक जिया करते हैं.
    खुद के लिए जीते हैं मरा करते हैं.
    नभ पर वो चमकते हैं सितारों की तरहं.
    कुर्बान सदा जाँ जो किया करते हैं.

    मानव के अगर दुःख में बिसर जाएगा.
    इक दिन तेरा जीवन भी संवर जाएगा.
    काबिल है मगर देख तू मगरूर न बन.
    हर शख्स कि नज़रों से उतर जाएगा.

    कुछ लोग जो डर-डर के जिया करते हैं.
    दिन-रात वो सौ बार मरा करते हैं.
    ऐ मौत तू क्या हमको भला मारेगी.
    हम उनमें नहीं हैं जो डरा करते है.

    रुकते कहाँ तूफान कहर ढाते हैं.
    दरिया को भी कंगाल बना जाते है.
    यह हौसला कुदरत ने हमें बक्शा है.
    हम डूबती कश्ती को बचा लाते हैं.

    साहित्यकार ,ग़ज़लकार
    "गुरु जी"पुरुषोत्तम अब्बी "आज़र".
    निवासी..नई दिल्ली
    मोबा=9818376951

  2. बेव्कोफी की बातें है… कानपूर में लाखों रुपए खर्च हुआ ,अन्ना टीम से इस खर्च का कोई लेना देना नहीं है , आप इसी तरह से करोरों जोड़ रहें हैं…घर से बहार निकल कर देखो टेबल से कयास बजी से कोई फायदा नहीं
    अरविन्द और मनीष से एक छोटी सी मुलाकात के बाद मैंने अपने ढंग से कानपुर का आन्दोलन सजाया ,अकेले मैंने अपने दोस्तों से मिलकर लाख रुपए लगाये . कानपुर सिविल सोसायटी बने. मैं हूँ अन्ना की मुहीम चलाई ,दिल लगाया ,दिमाग लगाया . किसी से कूचा पुन्चाने नहीं गया .मेरे जैसे लाखों लोग लगे थे. होगया न हिसाब”

    1. प्रमोद जी मान लिया कि आपने कानपुर में खर्चा किया. यदि कर सकते हैं तो कुछ दिनेश यादव के परिवार के लिए भी कर के दिखाइए. उसके आत्मदाह के बाद पहले से ही गरीबी में जी रहे यादव परिवार का अब कोई आसरा नहीं. सिर्फ यहाँ कमेन्ट करके काम मत चलाइये. टीम अन्ना की उकसावे आ कर भोली भाली भारतीय जनता आगे आयी. उसी आवेश में दिनेश यादव भी आया और जान दे बैठा. टीम अन्ना और आप जैसे लोग इस मसले पर कुछ तो मानवता दिखाइये. चुप्पी साध लेने से कुछ नहीं होगा. आप लोगों की मानसिकता ही सामने आएगी.

  3. paisa kha se aaya kisne diya yeh sab sochte hai. thik bhi hai yeh sab paisa wha se aaya jha se election ka fund aata hai sab jante hai election ke time leader manmanana fund lete hai or badle mai kya karte hai sab ne socha bar bar dene se acha hai is par rok lgane wale ko itna paisa de do ki sab par rok lag jay eor desh ka kalyan ho sake or mahangai kam ho sake or profit pa asar na pade or to or rozgar ke avsar ban sake

  4. August 26, 2011 at 2:41 am
    कितना पैसा ??? अन्ना से कियो पूछ रहे हो . राजा से पूछो, कलमाड़ी से पूछो सोनिया से, मनमोहन से?
    झूठ बोलकर जनता का ध्यान बाँट रहे हो !
    आम आदमी को मूरख बना रहे हो!
    देस धरोह
    देस का पैसा वापस लाने मे सहयोग करो

  5. मेरे शहर में भी इंडिया एंगेस्ट करेप्शन टीम काम कर रही है। हजारौं टोपियां, प्रचार सामग्री आदि बांट दी गयी है। अनशन पर बैठने वालों को जरूरी चीजें भी पहुंच रही हैं। क्या इस संगठन को दिल्ली से फंडिंग हो रही है? जी नहीं। मैं देख रहा हूं कि लोग खुद जुड़ रहे हैं और लिफाफा पकड़ाकर चले जाते हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे इस हवन में हर कोई आहूति देने चाहता है और दे रहा है। पचास से सत्तर करोड़ तक रकम खर्च की कह देना दिन में सपने देखने जैसा है। मुझे मालूम है एक ब्रीफकेस में एक करोड़ की रकम नहीं आ पाती है। टीम अन्ना का प्रबंधन बेहतर है और ये टीम सोचना और जवाब देना जानती है। प्लीज इसे नपुंसक मत बनाइए।

  6. यह पैसा देश के पूंजीपतियों ने दिया है और उसका एक ही मकसद है जनता को एक ऐसी झूठी लड़ाई मैं उलझा कर रखना जो उनका ध्यान मूल मुद्दे से भटका सके . महंगाई बेरोजगारी , श्रम कानूनों का उल्लंघन , बाद से बदतर होती आम आदमी की जिंदगी में पूंजीपतियों की लूट के लिए चल रही व्यवस्था पैर यह सर्कार लगाम लगा नहीं सकती क्योंकि यह लोकतंत्र के नाम पैर पूँजी के लिए पूँजी द्वारा चलाया जा रहा पूंजीतंत्र है . इस आन्दोलन को भी खाद पानी वहीं से मिल रही है. भ्रस्टाचार के खिलाफ आन्दोलन के नाम पैर देस के पैमाने पर सरकार एवं तथाकथित सिविल सोसाइटी के नेताओं के बीच नूरा कुश्ती चल रही है मीडिया इसे देश की जनता के सामने देस्भक्ति के नाम पर परोस रहा है. यह खेल सत्ता की सहमती से चलरहा है . यही आन्दोलन अगर देस की गरीब मजदूर जनता कर रही होती तो उन्हें कब का खदेड़ दिया जाता , जेल में ठूस दिया जाता गोलियां चल जाती रामलीला मैदान में .

  7. सवाल सही है कि अन्ना के पास इतना पैसा कहां से आया। अन्ना को इसका जवाब देना चाहिये। लेकिन साथ ही जनता को ये भी जानने का हक है कि गुर्जर आरक्षण आंदोलन के लिये कर्नल बैंसला के पास पैसा कहां से आया। तेलंगाना में जो आंदोलन चलाया गया उसके लिये पैसा कहां से आया।
    लोकतंत्र में पारदर्शिता होनी चाहिये इसलिये इन सवालों का जवाब भी चाहिये।

    1. आनंद जी आप किसी को अपनी बात कहने के कारन सिफ देशद्रोही नहीं कह सकते . प्लीज भाषा को संयमित रखे..आप किसी को अपने विचार रखने पर यदि देशद्रोही कहते है….तो आप स्वयं उसके मौलिक अधिकारों का हनन करते है……जो भारतीय संविधान ने उसको दिए है.भारतीय संविधान आप को अपनी बात कहने की छूट देता है लेकिन किसी को गाली देने इजाजत नहीं देता…….लेखक ने सिर्फ कुछ सवाल उठाये है यदि आप के पास जबाब है तो दे देदीजिए , नहीं तो अपनी बात कहिये..लेकिनं देशद्रोही जैसे शब्द तो मत इस्तेमाल कीजिये. वह भी एक इन्सान है और अपने संविधान प्रदत्त अधिकारों का उपयोग कर रहा है..धन्यवाद्.

      1. सही कहा आप ने में भी यही देख रहा हूँ की अन्ना जी के supporters कुछ अभद्र भाषा का उपयोग कर रहे हैं….जो भी जे कर रहे है उन्हें पहले यह समाज लेना चाह्यी की सिर्फ ढोल पीटने से देश भक्त नहीं बना जाता किसी को भी चोर कहने से पहले आपने गिर्रंबान में झाँक के देखे की कौन कितना सच्चा है…

    2. तुम नहीं समझोगे मुरख हो अन्ना ने सोनिया के लिए समय और मौका बनाया स्विस बैंक से पैसा निकालने का तुम यहाँ अन्ना नाम का घंटा बजाते रहे उधर स्विस बैंक से ३५ लाख करोड़ रुपये दिग्विय सोनिया व् अन्य कांग्रेसियों ने निकाल कर ठिकाने लगा भी लगा दिए और ये भी बता देता हूँ अब क्या होगा राहुल गाँधी आएगा किसी हीरो की तरह और सारी मांगे मान लेगा फिर कांग्रेस राहुल को प्रधान मंत्री के लिए पेश करेगी अन्ना भी इनके साथ खड़े नज़र आयेंगे और कहेंगे रहू मेरी सारी शर्तें मानी है अब ये ही प्रधान मंत्री बनना चाहिए इसको वोट डालो फिर से भोली जनता पांच साल के लिए जीने से पहले ही मर जाएगी

    3. कोई भी रईस घराना बिना किसी स्वार्थ के कुछ नहीं करता. निस्वार्थ भाव से मंदिर में भी नहीं जाता कोई. भगवान से भी मांगते हैं की भगवान जी ऐसा कर दोगे तो मैं इतने रुपये का प्रसाद चढाऊंगा. जब भगवान को प्रसाद चढाते समय भी बदले में भगवान से कुछ रिटर्न की चाहत होती है तो फिर ऐसे कैसे कोई कॉर्पोरेट घराना अपनी तिजोरी खोल देगा? लेखक ने तथ्यहीन बात थोड़े ही की है जो ऐसे भड़क रहे हो जैसे भैंस को लाल छाता दिखा दिया हो. लेखक को मत गरियाओ. अन्ना हजारे का साथ न देने और उनके साथियों पर शक करने का मतलब देशद्रोह नहीं है, मुर्खता है ये तुम लोगों की.

  8. अगर किसी की माँ बीमार होगी तो क्या वो पैसे खर्च नहीं करेगा.. आज भ्रष्टाचार भारत माँ की बीमारी है और उसे दूर करने के लिए उसके बेटे खर्च की परवाह नहीं करेंगे. फैसला आपका है की आप इनमे से एक हैं या नहीं

    1. आप सही कह रहे हैं मायावती का घोटाला सबको दिखाई देता है सोनियां गाँधी व कांग्रेसी सबको संत दिखाई देते हैं वैसे आपको मैं जानकारी के लिए बता देता हूँ सभी पार्टियों के इनकम स्त्रोत क्या हैं
      १ कांग्रेस छोटे स्तर के लेकिन सबसे बड़े घोटालों से आय जैसे हर कांग्रेसी के पास बीस हजार से भी ज्यादा फर्जी वोटर पहचान पत्र व् bpl राशन कार्ड के माध्यम से राशन(जैसे गेहूं चीनी मिटटी का तेल ) का पैसा खाना corporate छोटे बड़े बिजनेस मैन से धन उगाही सरकारी ठेकेदारों से धन मिलता है बदले में कम लागत के महंगे रेट पर ठेका मिलता है उधारण के तौर पर रास्त्रमंडल खेल के ठेके वो तो विश्व मीडिया की वजह से खुल गया वर्ना तुम्हे ये भी पता नहीं लगता जनता के लिए बनाये मकानों को ब्लैक में बेचना
      २ भाजपा के आय स्त्रोत मुख्या तोर पर देश सत्तर % उद्योग घरानों से आता है वाकी जहाँ राज्यों में सरकारें है वहां से
      ३ राकांपा मुख्या तोर आय स्त्रोत देश के सरकारी गरीबों के राशन के गेंहू से शराब व बीयर बनाकर बेचने से व चीनी मीलों से उघाई बदले चीनी के दाम महंगे करना
      ४ बहुजन समाज पार्टी मुख्या तोर पर आय स्त्रोत बसपा के कार्यकर्ताओं द्वारा स्वंय इच्छा से २० रूपये महिना से से लेकर २००० तक अपनी मर्जी व आमदनी की औकात के हिसाब से पार्टी फंड जमा करते हैं पुरे देश में बसपा के कार्यकर्ताओं की संख्या साडे तीन करोड़ से भी ज्यादा है तथा भाजपा कांग्रेस व राकांपा के तीनो के कार्यकर्ता मिला कर कुल तीन करोड़ हैं
      ५ समाजवादी पार्टी मुख्या तोर पर आय स्त्रोत जबरन उगाही
      ६ cpi सीपीएम कार्यकर्ताओं आम जनता से जबरन उगाही
      आया कुछ समझ में

  9. अंग्रेजों के राज्य में भी कुछ हिन्दुस्तानी उनकी गुलामी करते थे .. तो अगर आज कुछ ऐसी ही मानसिकता के लोग इस आन्दोलन का विरोध कर रहे हैं तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए. इनसे कहो की जब इंसान का जमीर जगता है तो वो अपना सर्वस्व देश के लिए बलिदान कर देता है तो आन्दोलन के लिए थोडा पैसा देना तो बहुत तुक्ष बात है. लेकिन इसे समझने के लिए दिल में राष्ट्रप्रेम होना जरूरी है.

  10. स्वतंत्रता संग्राम को चलाने के लिए भी तो पैसा कहीं से आता था ? अंग्रेजों ने भी कभी गांधीजी को यह नहीं पूछा । राणा प्रताप को भामशह ने पैसे दिये पर अकबर ने कभी राणा से यह प्रश्न नहीं किया । भगत सिंह, चन्द्र शेखर आज़ाद और सुभाष चन्द्र के पास पैसा कहाँ से आता था । ये प्रश्न फिजूल के हैं । मुझे एक बात समझ नहीं आती कि आप यह तो नहीं पूछते कि भ्रष्ट नेताओं के पास इतना पैसा कहाँ से आया ? आप एक महान उद्देश्य पर प्रश्न लगा रहे है ! आपने तो पैसे दिये ही नहीं ! फिर आपके पेट में क्यों दर्द हो रहा है ?

  11. जो सवाल लेखक ने यहाँ पर उठाये है वो सब सही लगते है …..कोई भी आन्दोलन बिना पैसे के नहीं चलाया जा सकता है….. सवाल ये है की ये पैसा कहाँ से आया …..निशित तौर पर इस आन्दोलन की आड़ में कहीं न कहीं कोई बड़ी साजिश नजर अति है.सर्कार को इस बात की जाँच करनी चाहिए की इस आन्दोलन में लगने वाला पैसा कहाँ से अ रहा है…कौन अपना हित साध रहा है. वैसे भी अन्ना टीम के सारे सदस्यों की सम्पति की जाँच बहुत जरूरी है . सच्चाई सामने आनी ही चाहिए. धन्यवाद् मीडिया दरबार…देश के दलित/अद्विवासी और पिछड़े व्यापक पैमाने पर देश में अन्ना टीम के आन्दोलन का विरोध कर रहे है………स्वामी अग्निवेश ने खुद को आन्दोलन से अलग कर लिया है…….आखिर कहीं कुछ गड़बड़ी तो जरूर है….

  12. अरे शायद तुम्हे चंदे में अभी भीख मिलना प्रारंभ नहीं हुआ है तभी तो इनके दिमाग में उल जुलूल बाते आती रहती है कुछ भारतीय जन मानस के जज्बातों का ख्याल करो भारत के रहने वाले हो गद्दारों की भासा तो मत बोलो नहीं तो ये जन आन्दोलन आपसे भी हिसाब मागेगी यद् रखना आप अभी पता नहीं किसके दम पर बोल रहे हो…………..सम्हल के रहना

  13. जिस देश में नेता अपनी जेब लाखों करोड़ों से भर रहे है,उस देश में अगर क्रांति लाने और भ्रष्टाचार को दूर करने के लिए कुछ करोड़ कोई खर्च करता है तो वो कहाँ से आये ये सवाल क्या मायने रखता है ? विदेशी बेंकों में नेताओं के जो रूपये जमा है अगर उनसे उसका हिसाब माँगा जाये तो क्या बेहतर नहीं होगा ?ये इस देश में बड़ी खासियत है की यहाँ नेता भ्रष्टाचार करे तो कोई सवाल नहीं ,अगर कोई घोटाला पकड़ा जाये तो महीनो लग जाते है जेल जाने को और अगर कोई अनसन करना चाहे तो करने से पहले ही जेल में दाल देते है *

    1. अरे हम भी तो ये ही कह रहे हैं अन्ना ब्लैक मनी लाने का जिक्र क्यों नहीं कर रहे हैं तुम जो अन्ना का समर्थन कर रहे हो बाद में आप ही रोयेंगे कि हमने क्या किया फिर तुम्हारे बच्चे तुम्हे कोशेंगे ये तुम नहीं समझोगे राजनीती है और तुम एक भारतीय मुरख भेड हो दूसरी भेड के पीछे -पीछे चल रहे हो अरे अन्ना ने सोनिया के लिए समय और मौका बनाया स्विस बैंक से पैसा निकालने का तुम यहाँ अन्ना नाम का घंटा बजाते रहे उधर स्विस बैंक से ३५ लाख करोड़ रुपये दिग्विय सोनिया व् अन्य कांग्रेसियों ने निकाल कर ठिकाने लगा भी लगा दिए और ये भी बता देता हूँ अब क्या होगा राहुल गाँधी आएगा किसी हीरो की तरह और सारी मांगे मान लेगा फिर कांग्रेस राहुल को प्रधान मंत्री के लिए पेश करेगी अन्ना भी इनके साथ खड़े नज़र आयेंगे और कहेंगे रहू मेरी सारी शर्तें मानी है अब ये ही प्रधान मंत्री बनना चाहिए इसको वोट डालो फिर से भोली जनता पांच साल के लिए जीने से पहले ही मर जाएगी

  14. देश में अनशन हडताले जोरों पर चल रही हैं…हजारेजी का साहस तो देखते ही बनता हैं…इस आंदोलन में जो धनराशि लगाई जा रही हैं उसमे जरुर किसी राजनीतिक संगठन का ही हाथ हैं जो इसे मुददा बना अपनी रोटियां सेखने की तैयारी में है
    कोई तो बैठा किसी का कंधा लेकर
    मौके की तलाश में
    मिले अवसर एक तो
    दाग दे गोली धडाधड

    नीतिक संगठन का ही हाथ हैं जो इसे मुददा बना अपनी रोटियां सेखने की तैयारी में है
    कोई तो बैठा किसी का कंधा लेकर
    मौके की तलाश में
    मिले अवसर एक तो
    दाग दे गोली धडाधड

  15. ये बात कई दिनों से जेहन में नाच रही थी कि इतना धन आया कहाँ से और एक बात और अन्ना के पिछले आंदोलनों के सक्रिय साथी कहाँ चले गए. आख़िरकार अन्ना ने पिछली लड़ाइयाँ अकेले तो नहीं लड़ी. इस बात का भी खुलासा होना अति आवश्यक है.
    एक बात और कि अन्ना टीम इस बात का जवाब देने में असमर्थ नहीं है, पर वो जवाब न देना चाहें तो ये एक अलग मुद्दा बन सकता है. हमारी सरकार को पूर्ण अधिकार है कि वोह इन प्रश्नों के उत्तर मांगे, वर्ना आर.टी.आई . का सहारा भी लिया जा सकता है.

    1. कितना पैसा ??? अन्ना से कियो पूछ रहे हो . राजा से पूछो, कलमाड़ी से पूछो सोनिया से, मनमोहन से?
      झूठ बोलकर जनता का ध्यान बाँट रहे हो !
      आम आदमी को मूरख बना रहे हो!
      देस धरोह
      देस का पैसा वापस लाने मे सहयोग करो

      1. तुम नहीं समझोगे मुरख हो अन्ना ने सोनिया के लिए समय और मौका बनाया स्विस बैंक से पैसा निकालने का तुम यहाँ अन्ना नाम का घंटा बजाते रहे उधर स्विस बैंक से ३५ लाख करोड़ रुपये दिग्विय सोनिया व् अन्य कांग्रेसियों ने निकाल कर ठिकाने लगा भी लगा दिए और ये भी बता देता हूँ अब क्या होगा राहुल गाँधी आएगा किसी हीरो की तरह और सारी मांगे मान लेगा फिर कांग्रेस राहुल को प्रधान मंत्री के लिए पेश करेगी अन्ना भी इनके साथ खड़े नज़र आयेंगे और कहेंगे रहू मेरी सारी शर्तें मानी है अब ये ही प्रधान मंत्री बनना चाहिए इसको वोट डालो फिर से भोली जनता पांच साल के लिए जीने से पहले ही मर जाएगी

  16. अगर ऐसा अनसन करके अपनी मनमानी मनवाते हे तो ये थोड़ी गलत बात हे की जब गवर्मेंट लोकपाल बिल को संसद में लेन को तेयार हे और गवर्मेंट सिर्फ इतना चाहती हे की उसमे कुछ बदलाव लाने की पेसकस कर रही हे वोह सब आगे पीछे का देख के उसका गलत क्या हो सकता ये सभी बाते सोच के ही उसमे बदलाव लाने को बोल रहे हे तो क्या ये गलत बात नहीं हे ,क्या जब ४ -५ लोग जो लोकपाल बनाये वोही एकदम ओके हो गया ,क्या उसमे गलती नहीं हो सकती ,ये तो बात गलत हे अन्ना की ,और दूसरी बात ये जो उचतम न्यायलय को भी लोकपाल के दायरे में लाना चाहते हो तो न्यायलय का मतलब क्या रहेगा .अगर आपको मेरी कमेन्ट में बात अच्छी लगे तो ………….आभार

    1. आप लो क्या पड़ा है के वो अनसन तोड़ दे ?? अरे उनको अनसन पर रहने दे और सर्कार जल्दी से जल्दी अपना काम संसद में खतम करे और फिर रामलीला मैदान में आये ..क्या जो धोखे हम दो महीने में खा चुके है वो कम है अब नही तो कभी नही…………..

      1. भाई वो इन्सान जो हमारे आराम के लिए लड़ रहा हैं , कम से कम हम यही साथ दे नही सकते तो आलोचना करना तो गलत ही ह न,
        और हितेश पटेल जी इतने समझदार हो गये की उस इंसान के लिए बोल अरे ह जो फोकल मैं हमारे किये जान दे रहा हैं हा हा हा , भाई कोई रिश्तेदार नेता ह क्या ? और हो भी तो यार जिन्दगी भर नेता ही रहेगा क्या ?

        1. तुम जो अन्ना का समर्थन कर रहे हो बाद में आप ही रोयेंगे कि हमने क्या किया फिर तुम्हारे बच्चे तुम्हे कोशेंगे ये तुम नहीं समझोगे राजनीती है और तुम एक भारतीय मुरख भेड हो दूसरी भेड के पीछे -पीछे चल रहे हो अरे अन्ना ने सोनिया के लिए समय और मौका बनाया स्विस बैंक से पैसा निकालने का तुम यहाँ अन्ना नाम का घंटा बजाते रहे उधर स्विस बैंक से ३५ लाख करोड़ रुपये दिग्विय सोनिया व् अन्य कांग्रेसियों ने निकाल कर ठिकाने लगा भी लगा दिए और ये भी बता देता हूँ अब क्या होगा राहुल गाँधी आएगा किसी हीरो की तरह और सारी मांगे मान लेगा फिर कांग्रेस राहुल को प्रधान मंत्री के लिए पेश करेगी अन्ना भी इनके साथ खड़े नज़र आयेंगे और कहेंगे रहू मेरी सारी शर्तें मानी है अब ये ही प्रधान मंत्री बनना चाहिए इसको वोट डालो फिर से भोली जनता पांच साल के लिए जीने से पहले ही मर जाएगी

    2. ये थोड़े से बदलद कुछ ऐसे होंगे जिस से बड़े भ्रष्टाचारियों का तो बल भी बांका नहीं होगा और भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने वालो के वाट लग जाएगी. सरकारी लोकपाल ये कहता है के अगर कोई भ्रष्टाचार मैं लिपट पाया जाता है तो उसे कम से कम ६ महीने और अधिकतम २ साल की सजा और अगर नहीं पाया जाता तो शिकायत करने वाले को २ साल की सजा, कहाँ का न्याय है ये. और सरकारी लोक पल मैं लुटे हुए धन की वापसी के बारे मैं भी कुछ नहीं कहा गया. कोई रेकोवेरी नहीं होगी. ऐसे मैं अगर पकडे भी जाते है तो कुछ साल जेल मैं रहने के बाद उस पैसे से जीवन भर मौज कर सकेंगे ये भ्रष्ट लोग

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