दुर्गा शक्ति की नहीं जेवर एसडीएम की उपस्थिति में गिराई गई थी दीवार, एलआईयू की रिपोर्ट..

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मेरी बिटिया के संपादक कुमार सौवीर ने राज फाश किया है कि पुलिस-एलआईयू की जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आये हैं..दुर्गा शक्ति नागपाल तो इस पूरे नाटक मौजूद ही नहीं थी…निलंबन पर केंद्र और उप्र सरकार के बीच तू-तू मैं-मैं लगातार गरमा रही….अब एलआईयू की रिपोर्ट की काट खोजने में जुटे हैं सपा के वरिष्ठ नेता…..

-कुमार सौवीर||

नोएडा : गौतमबुद्ध नगर की एसडीएम (सदर) रहीं और मौजूदा निलंबित आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के मामले में आज नाटकीय मोड़ आ गया है. दुर्गा को मस्जिद की दीवार गिराने के आरोप में निलंबित करने वाली उप्र सरकार के दावों को सरकार की ही पुलिस की लोकल इंटेलीजेंस यानी एलआईयू की रिपोर्ट ने बुरी तरह कुचल दिया है. स्थारनीय अभिसूचना इकाई की इस बारे में तैयार की गयी जांच रिपोर्ट में तो दुर्गा शक्ति नागपाल का इसमें जिक्र तक नहीं है. हकीकत तो यह है कि इस रिपोर्ट में इसी जिले के एक दूसरे इलाके के एसडीएम का जिक्र दर्ज किया गया है. आपको बता दें कि दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन को लेकर फिलहाल केंद्र सरकार के जवाब-तलब पर उप्र सरकार बुरी तरह हत्थे से उखड़ चुकी है. आज तो सपा के नेता और मुख्य मंत्री अखिलेश यादव के साथ ही साथ, पार्टी के बड़े नेता रामगोपाल यादव समेत कई दिग्गज नेताओं ने केंद्र और आईएएस नौकरशाही पर खूब कोसा और यहां तक कह दिया कि केंद्र सरकार अगर चाहे तो सारे आईएएस अफसरों को अपने यहां बुला ले, इन अफसरों की जरूरत को दूसरी तरह पूरा करने में यूपी सरकार पूरी तरह सक्षम है.durga-shakti-nagpal

उल्लेखनीय है कि दुर्गा शक्ति को 27 जुलाई को निलंबित कर दिया गया था और इसके पीछे उत्तर प्रदेश सरकार ने कथित तौर पर बिना आवश्यक प्रक्रिया का पालन किए एक निर्माणाधीन मस्जिद की दीवार गिराने का आदेश दिए जाने की वजह बताई थी. अब जो रिपोर्ट सामने आई है, उसके अनुसार जेवर के एसडीएम की मौजूदगी में दीवार ढही थी. लोकल इंटेलीजेंस ने इस मामले में अपनी रिपोर्ट में दुर्गा का जिक्र नहीं किया है.

आपको बता दें कि दुर्गा शक्ति नागपाल जिले में रेत माफिया पर अपनी कार्रवाई को लेकर चर्चा में रही हैं. उनके खिलाफ रविवार को आरोपपत्र दाखिल किया गया. सूत्रों के अनुसार, मेरठ संभाग के आयुक्त की रिपोर्ट के आधार पर आरोपपत्र तैयार किया गया जो संभवत: 10 पन्नों का है. वहीं, विपक्षी दलों का आरोप है कि इस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई खनन माफिया के कहने पर की गई.

निलंबित आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के मामले में आज समाजवादी पार्टी और केंद्र सरकार में टकराव बढ़ता तब दिखाई दिया जहां सपा ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार का फैसला सही और अंतिम है. पार्टी ने केंद्र पर राज्य से सभी आईएएस अधिकारियों को हटाने का ताना तक मार दिया. सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने कहा कि आईएएस अधिकारी दुर्गा को निलंबित करने का फैसला उचित है. उन्होंने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा कि यह सही है. यह अंतिम है. निलंबन के आदेश को रद्द किए जाने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर मुलायम ने ‘नहीं’ में उत्तर दिया.

इस मुद्दे पर सपा और केंद्र में टकराव बढ़ने के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि केंद्र इस मामले में राज्य सरकार के साथ संपर्क में हैं और निर्धारित नियमों का पालन किया जाएगा. उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ सपा का ऐसा ही रवैया लखनऊ में भी सामने आया जहां मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि गलती करने वाले अधिकारियों को दंडित किया जाएगा.

2010 बैच की आईएएस अधिकारी दुर्गा के निलंबन को सही ठहराने वाले अखिलेश ने एक समारोह में कहा कि यहां कई बच्चे हो सकते हैं जो बता सकते हैं कि गलती करने पर उनके शिक्षकों और माता-पिता ने उनकी पिटाई की होगी. सरकार भी इसी तरह चलती है. जब भी कोई अधिकारी कुछ गलत करता है तो उसे दंडित किया जाता है. सपा नेता राम गोपाल यादव ने दिल्ली में कहा कि अगर केंद्र सरकार हस्तक्षेप चाहती है तो वह उत्तर प्रदेश से सभी आईएएस अधिकारियों को हटा सकती है. हम अपने अधिकारियों के साथ प्रदेश को चला लेंगे.

केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री वी. नारायणसामी ने कहा कि निलंबित की गयी अधिकारी को नियमों के तहत अपील करने का अधिकार है. उन्होंने कहा कि उन्होंने अभी तक हमसे संपर्क नहीं किया है. अगर वह हमें अपनी अपील भेजती हैं तो हम इसकी प्रतिलिपि राज्य सरकार को भेजेंगे और उसका जवाब मांगेंगे. उसके बाद हम आगे की कार्रवाई के बारे में निर्णय लेंगे. सामान्य रूप से अधिकारी राज्य सरकार से संपर्क करते हैं. हम स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई नहीं कर सकते.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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