अग्निवेश हुए टीम अन्ना से आउट, कहा, ”अपने ही सिद्धांतों से भटके हजारे”

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टीम अन्ना के एक प्रमुख सदस्य स्वामी अग्निवेश ने कुछ ‘ मतभेदों’ की वजह के बाद अपने आपको टीम की गतिविधियों से अपने आपको अलग कर लिया है। बीबीसी से हुई एक बातचीत में उन्होंने कहा है कि चूंकि अन्ना हज़ारे अपना अनशन ख़त्म नहीं कर रहे हैं और उन्होंने ड्रिप लेने से इनकार कर दिया है इसलिए वे अपने आपको अलग कर रहे हैं क्योंकि सिद्धांतों के अनुसार वे आमरण अनशन के साथ ख़ड़े नहीं रह सकते।

वैसे उन्होंने अपने कुछ मित्रों से ये भी कहा है कि अन्ना हज़ारे का आंदोलन सामाजिक न्याय से सहमत नहीं है इसलिए वे अपने आपको इससे अलग कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने इस बात से इनकार किया कि टीम अन्ना में कोई दरार पड़ गई है। उनका कहना है कि ”सदस्यों के बीच छोटी-मोटी बातों को लेकर मतभेद हैं लेकिन इसे दरार नहीं कहा जाना चाहिए क्योंकि इस समय आंदोलन अच्छा चल रहा है।”

स्वामी अग्निवेश का कहना है कि पहले ये सहमति बनी थी कि अगर सरकार ये मान जाती है कि जन लोकपाल बिल को कुछ संशोधनों से साथ संसद में पेश कर दिया जाए तो उतने पर अन्ना को अपना अनशन समाप्त कर देना चाहिए। उनका कहना है कि अन्ना अब कह रहे हैं कि वे तब तक अपना अनशन जारी रखेंगे जब तक सरकार बिल पारित नहीं कर देती। स्वामी अग्निवेश का कहना है, “उनका स्वास्थ्य बिगड़ रहा है लेकिन उन्होंने ड्रिप लेने से भी इनकार कर दिया है। वो एक रास्ता था जिससे अनशन भी चलता रहता और स्वास्थ्य भी संभल जाता।”

उन्होंने कहा, “अन्ना ने अपने समर्थकों से कहा कि अगर पुलिस पकड़ने के लिए आए तो रास्ता बंद कर देना, मुझे ले जाने मत देना। ये तो अन्ना के भी सिद्धांतों के ख़िलाफ़ है।” उनका कहना है कि अन्ना ने पहले कहा था अगर पुलिस गिरफ़्तार करने आएगी तो वे प्रतिरोध नहीं करेंगे। पहले अनशन से ही टीम अन्ना के सदस्य रहे स्वामी अग्निवेश ने बीबीसी से कहा है कि उन्होंने आरंभ में ही कह दिया था कि वे आमरण अनशन के पक्ष में नहीं हैं और अब चूंकि परिस्थितियाँ प्रतिकूल हैं इसलिए वे अलग हो रहे हैं।

उनका कहना था, “अन्ना कह रहे हैं कि वे अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुन रहे हैं, वे सरकार से कह रहे हैं कि जनता की आवाज़ सुनो और ख़ुद जनता की आवाज़ सुनने की जगह अंतरात्मा की आवाज़ सुन रहे हैं।” हालांकि कुछ लोगों से उन्होंने कहा है कि वे सामाजिक न्याय के मुद्दे पर अलग हो रहे हैं। उनका कहना था कि उन्होंने सामाजिक न्याय के मुद्दे पर सभी को सहमत करने की कोशिश की लेकिन वे अलग-थलग पड़े रहे और इसलिए वे टीम से अलग हो रहे हैं।

उधर सूत्रों का कहना है कि स्वामी अग्निवेश के कारण टीम अन्ना की खासी आलोचना हो रही थी और इसी वजह से टीम अन्ना ने उनसे किनारा कर लेना शुरु कर दिया है।

(पोस्ट बीबीसी की खबर पर आधारित)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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  1. are me to is aandolan ke shuru me hi coment kiya tha ki team anna me ye ek gaddar he.. naxliyo ka himayati mao ka samrthak aarya samaj se trishkrt nakli sanyasi jisaki asliyat ab duniya ke samne he

  2. स्वामीजी एक अग्रणीय विचारक और समाजसेवी हैं .उन्होंने अगर ये कदम उठाया तो उसमे कुछ तथ्य ज़रूर होगा .उन्होंने समझ लिया की केजरीवाल,किरण बेदी और प्रशांत भूषण जैसे हठी लोग अन्ना की आँख और कान बन गए हैं जिससे आन्दोलन दिशाहीन हो जाएगा और ऐसा लग भी रहा है .स्वामीजी की मध्यस्तता से ज़रूर कोई विकल्प मिल जाता,अन्ना की टीम ने अच्छा अवसर और एक अच्छा सिपाही खो दिया है

  3. अग्निबेश जी जो आन्ना टीम के प्रुमुख सहय्गी थे उन्होंने अलग हटने का फेसला किया रास नहीं आ रहा बह देश के सिविल सोसायटी के बहुत पुराने नेता है उन्होंने बधुआ मजदूरो के हित बहुत काम किया है लेकिन आन्ना की आंधी में बह भी पीछे पीछे चल रहे थे,उन्होंने ओ निर्णय लिय बहुत अच्छा है हमारे साथ जमीनी सिविल सोसायटी जिन्हें cbo कह्तेही बहुत बड़ा नेटवर्क है हम तो एक भी दिन नहीं गए रामलीला मैदान हमारी रूचि प्रजातंत्र में है जिसको सारी संसद ने अनसन खत्म करने को कहा बह फिर फी नहीं माना बस्तम में सिविल सोसायटी की भूमिका प्रजातंत्र में बहुत महत्ब्पूर्ण है आजादी की लड़ाई से लेकर अब तक इनने भी आन्दोलन हुय उनका संचालन सिविल सोसायटी ने ही किया है यकीन सिविल सोसायटी को भी संसद का सम्मान करना चाहिय अन्ना तेम एसा नहीं कररही

  4. अन्ना जी की इतनी कुर्बानियों क बाद भी आज समाज का १ शिक्षित वर्ग अगर ऐसी बात करता है तो बहुत दुःख का विषय है ये! अरे भले मानस अन्ना जी को प्रोत्साहित करने क बजाये आप उन पर लांचन लगा रहे है और वो भी स्वामी अग्निवेश के करंजो की खुद १ राजनितिक हस्ती है…..अरे स्वामी अग्निवेश को क्या लेना देना है इस जन लोकपाल से वो तो सिर्फ अपनी राजनीतिक रोटिय सकने ए थे सो हो गया!
    और रही बात अन्ना जी की तो आप सभ लोगो से मेरा विनम्र निवेदन है की अन्ना जी को समर्थन देना उत्तम भारत के निर्माण में योगदान देने क बराबर है…..
    १९८२ में सिंगापोरे में लोकपाल बिल पारित हुआ था,१८२ भरष्ट ऑफिसर और नेता एक ही दिन म जेल गए थे
    और आज वह पर सिर्फ १% गरीबी है
    वाहा की सर्कार को लोगो के टैक्स की भी आवशयकता नहीं है
    ९२% लूग शिक्षित है
    हमारे देश से अच्छी स्वस्थ सुविधाए है
    हमारे देश से कम महेंगे है
    ९०% पैसा लोगो के पास जायज़ और कानूनी है
    और सिर्फ १% लोग बेरोजगार है………………..???

    इसी लिए भाइयो ये लड़ाई आपकी या मेरा नहीं ये हमारे देश की और हमारे देश के स्वाभिमान की लड़ाई है…
    JAI HIND JAI BHARAT

    1. swami ji hamesa surkhiyon me rahna chahte hai, apne bibadit byano ke liye jane jate hai. tatha kangres ke najdiki bhi hai, is liye alag to hona hi tha.

    2. अंध समर्थन बगेर चिंतन किये हमेशा दुखदाई हो जाता है .संतुलित मानसिकता ही आज के समय की आवश्यकता है .अपने देश के परिवेश को किसी दूसरे देश से तुलना करना तर्कसंगत नहीं है क्योंकि सिंगापूर एक बहुत छोटा देश है और वहाँ की परिस्थिति अलग है .हमें अपने अंतर्मन को टटोलकर स्वयं को सुधार लें तभी बदलाव आ सकता है कानून की मजबूरी से सुधार पूर्णतया अपेक्षित नहीं होते

  5. अन्ना टीम का आन्दोलन देश में दलित /आदिवासी और पिछड़े वर्ग में सामाजिक न्याय के आन्दोलन को समाप्त करने की एक बहुत बड़ी साजिश है …….इन वर्गो को ये समझाने की जरूरत है….इस देश का मीडिया वो क्यों नहीं बता रहा है देश को …जो दलित/आदिवासी और पिछड़े वर्गो के संगठन देश में अन्ना टीम का विरोध कर रहे है.बामसेफ और उसके सहयोगी लगभग १५ संगठनो ने दिल्ली में जंतर -मंतर पर अन्ना और उनके बिल के खिलाफ १ अगस्त से ५ अगस्त तक धरना दिया ..राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को ज्ञपन दिया …….ये वो संगठन है जो देश में दलित/आदिवासी और पिछड़े एंड अल्पसंख्यक समुदाय के पड़े लिखे लोंगो का संगठन है.लगातार अन्ना का देश भर में विरोध कर रहा है. उदित राज और उनकी जस्टिस पार्टी लगातार देश में अन्ना और उनके बिल का विरोध कर रही है…भारत मुक्ति मोर्चा १ सितम्बर को राम लीला मैदान डेल्ही में वामन मेश्राम, ह.डी.देवगोडा, शरद पवार, रामबिलास पासवान के नेत्रत्वा में अन्ना और उनके बिल का विरोध करने जा रहा है….. पूरे देश में अन्ना और उनके बिल का विरोध हो रहा है….. मीडिया का एक वर्ग सिर्फ अन्ना का मोवेमेंट चला रहा है……दिल्ली का इंसाफ संगठन माननीय मूल चाँद जी नेत्र्त्वा में अन्ना और उनके बिल के खिलाफ आन्दोलन चला रहा है….यानि की देश के दलित/आदिवासी /पिछड़ा और अल्पसंख्यक समुदाय का अन्ना और उनके बिल को कोई समर्थन नहीं है स्वामी अग्निवेश ने सामजिक न्याय के मुद्दे पर अन्ना का साथ छोड़ा है……यानि की अन्ना और उनकी टीम सामाजिक न्याय के खिलाफ है…………

  6. इस प्रकार के स्वामियों का अपना अलग इतिहास रहा है. कुछ वर्ष पहले तक हरियाणा के यह तीन स्वामी बहुत प्रसिद्द हुए थे जो स्वयं को आर्यसमाजी कहलाते थे परन्तु विभिन राजनैतिक दलों के साथ संत-गांठ रखते हुए एक दुसरे का हद से बाहर जा कर भी विरोद्ध करने के कारण बहुत चर्चा में रहते थे. स्वामी अग्निवेश वेश-भूषा से आर्यसमाजी, विचारधारा से वाम-पंथी और कांग्रेस की छत्र-छाया में रहना अधिक पसंद करते हैं. भ्रष्टाचार और घोटालों का विश्व रिकार्ड बनाने वाली कांग्रेस सरकार ने जब अन्ना और जनता के दबाव में आकर संयुक्त प्रारूप समिति बनाने की घोषणा की तो इस स्वामी ने सबसे पहले सोनिया को धन्यवाद दिया. किस बात का ? घोटाले करवाने का या दबाव में आकर समिति बनवाने में रजामंदी देने के लिए..? यानि मौका मिलते ही स्वामी ने चाटुकारिता प्रारंभ कर दी थी. अमर नाथ यात्रा पर इसी ने फिकरे कसे थे. देश और जन-सामान्य तो कब का चाहता थे की अन्ना की टीम इसे निकाल बाहर करे.

  7. महाशय राम अवध यादवजी मुझे खेद है कि आप एडवोकेट हैं ! खैर, खुदा ने कैसी-कैसी सूरतें बनाई हैं, ताज्जुब होता है !

  8. स्वामीजी का ऐसा पुराना इतिहास है ! यह जरूर है कि इस बार वे ज़रा जल्दी ही मुखालिफत करते नज़र आ रहे हैं ! खैर अल्लाहताला का शुक्रिया कि वो अन्ना से दूर हैं ! इस मूवमेंट की भलाई भी इसी में है !

  9. इन महाशय जी को अन्ना विरोधियों ने मोटी रकम दी है तभी सारे सिद्धांत याद आ रहे हैं.

  10. http://www.facebook.com/व्ब्रावत
    दलित को महा रैली संबिधान को बचने के लिए २४ अगस्त को इंडिया गेट से पार्लियामेंट तक डॉ उदित राज के नेत्रित्व में हुई

  11. हम स्वामी जी के निर्णय का समर्थन का स्वागत करते है , और यह कहना चाहते है की लोकपाल दलित बच्क्वार्ड और मुसलमान विरोधी है . हम ऐसे किसी विधयक का समर्थन नहीं कर सकते है जो किसी पर हिंसा करता हो और देश के दबे कुचले लोगो का विरोद करता हो

    1. क्या करप्सन से पिछरे लोगो को ऊपर उठने का मौका मिलाता है.क्या कॉमनवेल्थ घोटाले का पैसा से दलित बैकवार्ड अरु मुसलमानों का भला हुआ है.
      अन्ना हम तुम्हारे साथ है
      वन्दे मातरम.
      जय hind

  12. ये तो एक दगाबाज साथी की तरह व्‍यवहार है श्रीमान अग्निवेश का, उनके ऐसे व्‍यवहार से तो ऐसा लगता है जैसे सत्‍ताधारी दल की ओर उन्‍हें कुछ प्रलोभन दिया गया है क्‍योंकि अगर डराया धमकाया गया रहता तो वो चुप नहीं बैठते, फिर इस तरह अन्‍ना का साथ नहींं छोडते। कुछ न कुछ रहस्‍य तो जरूर है, पर उनका ऐसा करना सर्वथा निंदनीय है । बीच मझधार में अन्‍ना और उनकी टीम को छोडना निर्लज्‍तापूर्ण और कायरतापूर्ण हरकत है इस तथाकथित स्‍वामी का

  13. From Initial point of time, I was surprised the association of Swami Agnivesh with Anna Hhajare and his company, the self styled representative of the civil society!
    There are valid reasons, Swami Agnivesh, drifting his association with Anna. With such development Anna should leave his obsinatchy end and his hunger strike and join the government for negotiation to incorporate his views in the lokpal bill. Swami has rightly pointed out that Anna movement is against social justice.

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