/* */

जो सच बोलेंगें, मारे जाएंगे..!

admin 6
Page Visited: 154
0 0
Read Time:4 Minute, 35 Second

-विजय त्रिवेदी||

यूपी के ग्रेटर नोएडा की आईएएस अफसर दुर्गा शक्ति नागपाल को सस्पेंड करने को लेकर भले ही यूपी की आईएएस एसोसिएशन उनके समर्थन में सामने आ गई हो ,लेकिन ऐसे ईमानदार अफसरों की कहानियों की कमी नहीं है जिन्हें सरकार के गुस्से का निशाना बनना पड़ा हो। दुर्गा शक्ति नागपाल को सस्पेंड कर राजनेता ये संदेश देना चाहते हैं कि झुक जाइए, वरना …..

वरना तोड़ दिये जाओगे और साथ ही अपने वोटर को ये बताना कि असली मालिक वे हीं हैं, लेकिन जब तक बिना रीढ़ की हड्डी वाले सीनियर अफसर रहेंगें ,राजनेता ही मास्टर बने रहेंगें।durga

ग्रेटर नोएडा में रेत माफिया के खिलाफ अभियान चलाने वाली दुर्गा शक्ति नागपाल को अखिलेश सरकार ने एक धार्मिक स्थल की दीवार गिराने के मामले में सस्पेंड कर दिया है।

अलग अलग राज्यों में इस तरह के अफसरों पर आए दिन अपने राजनीतिक आकाओं की नाराज़गी की गाज़ गिरती रहती है। इसके पहले मायावती सरकार के दौरान यूपी के एक आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर को नाराज़गी झेलनी पड़ी। 18 साल में उनका 22 बार तबादला किया गया यानी एक साल भी एक पोस्ट पर वे नहीं रह पाए।

पिछले दिनों हरियाणा के आईएएस अफसर अशोक खेमका पर हुडा सरकार की नाराज़गी तब बरसी जब उन्होंने एक बिल्डर और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा के बीचे हुई डील का खुलासा किया और उसकी जांच के आदेश दिए. तब से तो लगातार उनका तबादला हो ही रहा है, लेकिन उससे पहले चौटाला सरकार भी उनको बर्दाश्त नहीं कर पाई थी और चौटाला सरकार के दौरान भी खेमका को लगातार एक जगह से दूसरी जगह बेवज़ह तबादले की वजह से जाना पड़ा था।

उधर गुजरात में नरेन्द्र मोदी सरकार की नाराज़गी एक आईपीएस अफसर राहुल शर्मा को इसलिए झेलनी पड़ी क्योंकि उन्होंने गुजरात दंगों के दौरान एक भीड़ को दूसरे लमुदाय के धार्मिक स्थल पर हमला करने से रोक दिया था।

शर्मा तब भावनगर के एसपी होते थे , दो महीने बाद उन्हें अहमदाबाद में एक लो प्रोफाईल पोस्टिंग पर भेज दिया गया और राहुल शर्मा का पिछले 20 साल में 12 बार ट्रांसफर किया गया।

ईमानदार अफसरों के लिए बिहार में भी कोई जगह नहीं दिखती। बिहार के एख शानदार पुलिस अफसर रहे हैं मनोज नाथ। 39 साल की नौकरी में उनका 40 बार ट्रांसफर हुआ और मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में एक साल में चार बार उन्हों जगह बदलनी पड़ी। तीन बार उनसे जूनियर अफसरों को उनके आगे कर पुलिस विभाग का मुखिया बनाया गया।

यानी किसी की भी सरकार रही हो ,ईमानदार अफसर बर्दाश्त नहीं है । बिहार में ही सत्येन्द्र दुबे की कहानी किसी से छिपी नहीं हैं , घोटाले सामने लाने की वजह से जिनकी नवंबर 2003 में हत्या कर दी गई ।उधर इंडियन आइल कार्पोरेशन और तेल माफिया के बीच की गड़बड़ी को ज़ाहिर करने वाले नरेन्द्र नाथ की भी हत्या कर दी गई।
इनके अलावा भी दर्जनों ऐसे मामले हैं जिनमें काम करने वाले और ईमानदार लोगों को सज़ा मिली ।कवि राजेश जोशी की एक कविता याद आ रही है – जो सच बोलेंगे वो मारे जाएंगे।

(लेखक राजस्थान पत्रिका के राष्ट्रीय संपादक हैं तथा उनका यह लेख उनके ब्लॉग सरोकार पर प्रकाशित हो चुका है)

About Post Author

admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

6 thoughts on “जो सच बोलेंगें, मारे जाएंगे..!

  1. यह तो तयशुदा है कि अपराधी नेताओं के बीच रह कर कोई भी इमानदार अधिकारी काम नहीं कर सकता.या तो वे उसे अपने जैसा चोर बना देंगे या उसे मजबूर कर दिया जाये यदि वह अधिकारी ऐसा नहीं कर सकता तो उसकी दुर्गति ऐसे ही होगी.यह सब किसी भी दल कि सरकार के राज में होगा.अपराधियों राजनीतिज्ञों व भ्रष्ट अफसरों का तिगड्डा गिरोह ही भारतीय राजनीति का आधार बन गया है.

  2. यह तो तयशुदा है कि अपराधी नेताओं के बीच रह कर कोई भी इमानदार अधिकारी काम नहीं कर सकता.या तो वे उसे अपने जैसा चोर बना देंगे या उसे मजबूर कर दिया जाये यदि वह अधिकारी ऐसा नहीं कर सकता तो उसकी दुर्गति ऐसे ही होगी.यह सब किसी भी दल कि सरकार के राज में होगा.अपराधियों राजनीतिज्ञों व भ्रष्ट अफसरों का तिगड्डा गिरोह ही भारतीय राजनीति का आधार बन गया है.

  3. neta yo ko kusan chahiye ''kushasan''vo chae jo so kare niyam to un ke neeche rahata hai vo kahate hai neeyam kanoon ke upar hai kiayo ki be jam pratinidhi hai nokar nahi kanoon to nokararo par hi lagat hai EEMANDARI'' KISE THEEK LAGAT HAI JO SWAYM EEMAN DAR HO BE EEMANO KO EEMANDARI SE KAIY SAMMBANNDH HAI IESILIYE EEMANDAR MARE JAATE HAI YE ALAG BAAT HAI KI EEMANDRI KABHI MARTI NAHI HAI.

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Next Post

वापस खुलेगी धर्म गुरु गाजी फ़क़ीर की हिस्ट्रीशीट..!

-चन्दन सिंह भाटी|| जैसलमेर गाजी फकीर की 48 साल पुरानी हिस्ट्रीशीट एक बार फिर सीमावर्ती जैसलमेर-बाड़मेर जिले की चर्चा में […]
Visit Us On TwitterVisit Us On FacebookVisit Us On YoutubeVisit Us On LinkedinCheck Our FeedVisit Us On Instagram