हमारी हिम्मत को नहीं तोड़ सकती पुलिस

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हम किसी व्यक्ति विशेष का समर्थन नहीं कर रहे हैं, बल्कि हम लोग भ्रष्टाचार के खिलाफ उठी आवाज को बुलंद करने के लिए दिल्ली आए हैं। चाहे माध्यम बाबा रामदेव हों या अन्ना हजारे। बाबा रामदेव के आह्वान पर हम सब चार जून को रामलीला मैदान में भ्रष्टाचार के खिलाफ छेड़े गए सत्याग्रह में भाग लेने के लिए आए थे।

सरकार के इशारे पर दिल्ली पुलिस की बर्बरता ने हमें रामलीला मैदान से तो खदेड़ दिया, लेकिन अभी भी दिल्ली पुलिस हमारी हिम्मत को तोड़ने में सफल नहीं हो सकी है। अब हम सब आठ जून को जंतर-मंतर में अन्ना हजारे के सत्याग्रह का इंतजार कर रहे हैं। अन्ना हजारे के सत्याग्रह में भाग लेने के बाद ही अब हम अपने घरों को रवाना होंगे।

रामलीला मैदान से खदेड़े गए रामदेव समर्थकों ने बंगला साहिब गुरुद्वारे में शरण ले रखी है। बिहार के खगड़िया से आए सत्यनारायण शर्मा के अनुसार रामलीला मैदान से खदेड़े जाने के बाद उन्हें ऐसे आसरे की दरकार थी, जहां पर दिल्ली पुलिस अपनी मनमानी न कर पाए। उस दौरान उन्हें बंगला साहिब गुरुद्वारा ही ऐसा आसरा नजर आया, जहां दिल्ली पुलिस की मनमानी नहीं चल सकती थी। वे रविवार सुबह से बंगला साहिब गुरुद्वारे में रुके हुए हैं।

अब उन्हें आठ जून का इंतजार है, जब वे जंतर-मंतर में अन्ना हजारे के सत्याग्रह में भाग लेकर अपने घरों के लिए वापस पाएंगे। बाबा रामदेव के आह्वान पर भ्रष्टाचार के खिलाफ सत्याग्रह में भाग लेने बिहार से आए मनोरंजन कुमार ने बताया कि रामलीला मैदान से खदेड़े जाने के बाद करीब बीस हजार से अधिक साधकों ने बंगला साहिब गुरुद्वारे में शरण ली।

न सिर्फ साधकों को यहां दिल्ली पुलिस के अत्याचारों से निजात मिली, साथ ही रहने व खाने का भी प्रबंध हो गया। मनोरंजन कुमार के अनुसार रविवार देर शाम उन्हें पतंजलि योग पीठ से निर्देश मिले कि जैसे भी हो, जहां भी शरण मिले, आप लोग दिल्ली में ही रुकिए।

सोमवार तड़के करीब तीन बजे उन्हें पीठ से आदेश आए कि जो लोग हरिद्वार आना चाहे, वो हरिद्वार आ जाएं, जो लोग अपने घर लौटना चाहते हैं वे वहीं से भ्रष्ट्राचार के खिलाफ छेड़े गए सत्याग्रह को आगे बढ़ाएं। जिसके बाद भारी संख्या में लोग अपने घरों व हरिद्वार के लिए कूच कर गए।

महाराष्ट्र के वर्धा से आए शिवरतन सिंह के अनुसार इतिहास उठा कर देख लीजिए, ऐसा कौन सा जन आंदोलन है, जिसे कुचलने की कोशिश नहीं की गई। चार जून की रात पुलिस की बर्बरता पुराने इतिहास को फिर दोहराया गया है। भ्रष्टाचार को लेकर अब लड़ाई आर-पार की है।

अब जब तक भ्रष्टाचार से निपटने के लिए बाबा रामदेव व अन्ना हजारे की मांगों को पूरा नहीं किया जाता, हम इसी तरह डटे रहेंगे। चाहे लाठियां खानी पड़े या जेल जाना पड़े, अब हम हर परिस्थिति को झेलने के लिए मानसिक रूप से तैयार हो चुके हैं।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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