अन्ना ने की जेल जाने की तैयारी, लेकिन सरकार ने नहीं किए गिरफ्तारी के आदेश जारी

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  • अरविंद केजरीवाल ने कहा, “प्रणब ने बंद किया बातचीत का रास्ता”
  •  किरण बेदी ने कहा, “अन्ना को रामदेव की तरह गिरफ्तार करने की तैयारी में है सरकार”
  • अन्ना ने कहा, अगर मुझे जेल भेजा जाता है तो जनता भी देगी गिरफ्तारी”
  • प्रणब मुखर्ज़ी ने आधी रात को दिया आईबीएन-7 पर फोनो
  • वित्त मंत्री ने कहा, “टीम अन्ना तोड़-मरोड़ कर पेश कर रही है उनका बयान”
  • कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने भी कहा, “टीम अन्ना ने जैसा कहा वैसा कुछ भी नहीं हुआ”
  • मामला बिगड़ते देख किरण बेदी ने कहा, “पुलिस नहीं करेगी गिरफ्तारी, कमिश्नर ने एसएमएस भेज कर भरोसा दिलाया”
अन्ना की अपील: किसने भड़़काया?

अन्ना हज़ारे ने बुधवार देर रात रामलीला मैदान से ऐलान किया कि अगर पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर लेती है तो देशवासी जेल भरो आंदोलन शुरु कर देंगे। उन्होंने टीवी चैनलों पर लाइव अपील करते हुए कहा कि अगर पुलिस उन्हें उठा ले जाती है तो वे भी दिल्ली के लिए कूच कर दें और सांसदों के घरों का घेराव करते हुए अपनी अपनी गिरफ्तारी दे दें।नौ दिनों से अन्न का एक भी दाना मुंह में न डालने वाले अन्ना की ये एक ऐसी दहाड़ थी जिसने सरकार के साथ-साथ टीम अन्ना को भी डरा दिया।

दरअसल, मामले की शुरुआत तब हुई जब बुधवार रात टीम अन्ना प्रणब मुखर्जी से मिल कर निराश होकर लौटी। बैठक से बाहर निकलते वक्त किरण बेदी और अरविंद केजरीवाल ने सरकार पर बेरुखी दिखाने के आरोप लगाए। केजरीवाल और किरण बेदी ने बताया कि वित्त मंत्री उनके जन-लोकपाल बिल लाने के अपने पुराने वायदे से भी मुकर गए हैं और एक अलग ही बिल बनाने का प्रस्ताव रखा है। लेकिन रामलीला मैदान पहुंचते ही उनके शब्द बदल गए। अपने बयानों में और अन्ना से बातचीत में बेदी ने कहा कि सरकार उनलोगों से खासी  नाराज़ है। दोनों ने प्रणब मुखर्जी के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस उन्हें बाबा रामदेव की तरह गिरफ्तार कर सकती है।

बस इतना सुनते ही अन्ना भड़क उठे। हालांकि अपने स्वभाव के मुताबिक उन्होंने अपनी भाषा संयत रखी, लेकिन सरकार में मौजूद लोगों को काले अंग्रेज की उपमा देने से भी नहीं चूके। अन्ना ने लोगों से अपनी गिरफ्तारी की स्थिति में जेल भरने की अपील की और जेल जाने के फायदे भी गिनाए। अन्ना के बयान पर जनता कहीं फौरन जेल भरना न शुरु कर दे इस आशंका से सरकार और पुलिस के हाथ-पांव फूल गए। वह भी तब जब गिरफ्तारी की कोई तैयारी भी नहीं थी।

मामला बिगड़ते देख कमिश्नर ने मोबाइल पर अपनी वेब वार जारी रखने वाली किरण बेदी को फौरन एसएमएस भेजा और गिरफ्तारी जैसी किसी कार्रवाई की तैयारी नहीं है। किरण बेदी ने भी फौरन इस बात को माईक पर बताया और कहा कि गिरफ्तारी या पुलिस हस्तक्षेप तभी होगा जब अन्ना की हालत गंभीर होने लगेगी। हालांकि अरविंद केजरीवाल ने यह कह कर सनसनी फैला दी कि बैठक में वित्त मंत्री प्रणब मुकर्जी ने कह दिया कि अगर अन्ना सरकार द्वारा सुझाए गए प्रस्तावों से अनशन तोड़ने से इंकार करते हैं तो उनकी जिम्मेदारी सिविल सोसाइटी के लोगों की है।

उधर प्रणब मुखर्जी ने भी अपना मोर्चा संभाला और आनन-फानन में पत्रकार सम्मेलन बुला लिया। आधी रात के बाद बुलाए गए पत्रकारों को वित्त मंत्री ने बताया कि उन्होंने बातचीत का रास्ता बंद नहीं किया है और उनकी बात को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। प्रणब ने कहा कि उन्होंने ऐसा कभी नहीं कहा कि अन्ना की चिंता सरकार को नहीं है। आईबीएन-7 पर फोनो देते हुए प्रणब ने लोगों से अपील की कि वे टीम अन्ना के बहकावे में न आएं।

जिस वक्त वित्त मंत्री आईबीएन पर फोनो देने में जुटे थे उसी वक्त आजतक पर सलमान खुर्शीद अपना फोनो दे रहे थे। कानून मंत्री सलमान खुर्शीद भी उस बैठक में मौजूद थे जिसमें सिविल सोसाइटी और प्रणब मुखर्जी के बीच तकरार के आरोप लगाए जा रहे थे। खुर्शीद ने पत्रकारों को यह बी बताया कि सरकार ने बातचीत का रास्ता बंद नहीं किया है। खुर्शीद ने बताया कि उन्होंने टीम अन्ना को बाकायदा चाय नाश्ता भी करवाया था और पूछा कि अगर सिविल सोसाइटी के लोग सरकार से नाराज़ होते तो दोपहर के बाद दोबारा शाम को क्यों आते?

बाद में पूर्वी दिल्ली के सांसद संदीप दीक्षित भी कई चैनलों पर फोनो देते सुनाई दिए। हालांकि आधी रात को करीब डेढ़-दो घंटे चली नाटकीय सनसनी तब खत्म हो गई जब कुछ चैनलों ने लाइव टेलीकास्ट कर दिखाया कि कैसे टीम अन्ना के सदस्य मंच पर चादर तान के सो गए।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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